डॉ



वो यात्रा जो सफलता से अधिक संघर्ष बयाँ करती है।

वो यात्रा जो सफलता से अधिक संघर्षबयाँ करती है।आज भारत विश्व में अपनी नई पहचान केसाथ आगे बढ़ रहा है। वो भारत जो कल तक गाँधी का भारत था जिसकी पहचान उसकी सहनशीलताथी,आज मोदी का भारत है जो खुद पहल करता नहीं, किसीको छेड़ता नहीं लेकिन अगर कोई उसे छेड़े तो छोड़ता भी नहीं। गाँधी के भारत से शायद हीकिसी ने सर्जिकल



मौत में अपना अस्तित्व तलाशता मीडिया

मौतमेंअपनाअस्तित्वतलाशतामीडियाआजकलजबटीवीऑनकरतेहीदेशकालगभगहरचैनल "सुशांत केस में नया खुलासा" या फिर "सबसे बडी कवरेज" नाम के कार्यक्रम दिन भर चलाता है तो किसी शायर के ये शब्द याद आ जाते हैं, "लहूकोहीखाकरजिएजारहेहैं,हैखूनयाकिपानी,पिएजारहेहैं।" ऐसालगताहैकिएकफिल्मीकलाकारमरतेमरतेइनचैनलोंकोजैसेजीवनदानदेगय



आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद की राजनीति

आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद कीराजनीति वैशविक परिदृश्य में कुछ घटनाक्रम ऐसेहोते हैं जो अलग अलग स्थान और अलग अलग समय पर घटित होते हैं लेकिन कालांतर में अगरउन तथ्यों की कड़ियाँ जोड़कर उन्हें समझने की कोशिश की जाए तो गहरे षड्यंत्र सामने आतेहैं। इन तथ्यों से इतना तो कहा ही जा सकता है कि सामान्य से लगने



कब तक सामने आते रहेंगे प्यारेमियाँ जैसे चरित्र ?

कब तक सामने आते रहेंगे प्यारेमियाँ जैसे चरित्र ? “हरचेहरेपर नकाबहै यहाँबेनकाबकोई चेहरानहींहर दामनमें दागहै यहाँबेदागकोई दामननहीं।यह अजीबशहर हैजहाँऔरत बेपर्दाकर दीजाती हैलेकिनसफेदपोशोंके नकाबकायम हैंयहाँ” मध्यप्रदेशकीराजधानीएकबारफिरकलंकितहुई।एकबारफिरसाबितहुआकिहमएकसभ्यसमाजहोनेकाकितनाभीढोंगकरेंलेकिनसत



डाँन की 774 किलोमीटर यात्रा, किसने की मदद?

डाँन की 774 किलोमीटर यात्रा, किसने की मदद?अंतत: डाँन का अंत,कोई ड्रामा काम नहीं आ पाया! मौत के बाद कई राज दब गये?बिल्कुल फिल्मी स्टाइल पर डाँन विकास दुबे कानपुर से सत्रह किलोमीटर पहले भौती में पुलिस की गोली का शिकार हो गया. पूरे उत्तर



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



मध्यम वर्ग,एक निरीह प्राणी

मै मध्यम वर्ग,एक निरीह प्राणी हूं, लॉकडॉउन की घोषणा हुई ,छुट्टियों का सोच मुझे बड़ी खुशी हुई,कुछ दिन घर में बीते हंसी खुशी,धीरे धीरे काफुर हुई सारी खुशी।सब्जी खत्म, आटा खत्म,दूध की किल्लत,दाल चांवल के डिब्बे बोलने लगे ,बीबी की आवाज़ सुन,माथे पर आईं सलवट।अंदर सुनो ना ,तो बा



सब सेवक बन गए है।

सब सेवक बन गए है।पेड़ में बैठने वाले पंछी कहाँ जाएंगे? जब पेड़ ही धरा में समा जाए। इस वजह से पेड़ की तुलना प्रवासी मजदूर व प्राइवेट नौकरी से है।अगर नदी का पानी सूख भी जाए, तब भी नाव नदी में रहेगी पानी न सही रेत काफी है। इस वजह से नदी की तुलना सरकारी नौकरी से है।पहाड़ो में औषधि है, राजनीति में पैसा है। स



जीवन रक्षकों के दुश्मन

देश में लगभग रोज कहीं न कहीं से स्वास्थ्य बिभागकर्मियों, डाक्टरों और पुलिस पर कुछ लोगोंद्वारा हमला करने, पथराव करने कीघटनाये सुनने में आती हैं। यह शर्मनाक हैं और खतरनाक भी जिन्हें शक्ति से रोका ही जानाचाहिए। किसी भी देश , धर्म, संप्रदाय या समाज में सब केसब जाहिल हों ऐसा संभव नहीं हैं । किन्तु आश्चर्



विचारणीय प्रश्न (*जागो और जगाओ *)

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लाल छतरी वाली लड़की - डॉ दिनेश शर्मा

डॉ दिनेश शर्मा के यात्रा वृत्तान्त की एक और कड़ी... बहुत सुन्दर औरमार्मिक...लाल छतरी वाली लड़की : दिनेश डाक्टरसबसे पहले मैंने उसे शाम के समय सड़क के किनारे बने मंदिर कीसीढ़ियों के पास देखा था | हाथ में फूल, अगरबत्तीलिए वह अपने आराध्य की प्रतिमा के सामने आंख बन्द किये बड़े श्रद्धा भाव से चुपचापकुछ फुसफुसा



पुरस्कार

पुरस्कारमेरे अच्छे कर्मों के लिए,मुझे पुरस्कार है मिला।मेरी प्यारी प्यारी बहना,उसका वाह क्या है कहना।धरती मिली है भारत जैसीजो है हमारी माँ के जैसी।ये पर्यावरण मिला है ऐसापिता जैसे सब देते वैसा।और मिले संस्कार महानजैसे प्यारा हिंदुस्तान।एक पुरस्कार और मैं चाहूं,किसी को भूखा न मैं पाऊँ।देना है तो दे द



केवल जन आन्दोलन से प्लास्टिक मुक्ति अधूरी कोशिश होगी

केवल जन आन्दोलन से प्लास्टिकमुक्ति अधूरी कोशिश होगीवैसे तो विज्ञान के सहारे मनुष्यने पाषाण युग से लेकर आज तक मानव जीवन सरल और सुगम करने के लिए एक बहुत लंबासफर तय किया है। इस दौरान उसने एक से एक वो उपलब्धियाँ हासिल कीं जोअस्तित्व में आने से पहले केवल कल्पना लगती थीं फिर चाहे वो बिजली से चलने वालाबल्ब



हिंदी दिवस कैसे मनाएं ...

https://duniaabhiabhi.com/how-do-we-celebrate-hindi-day/



पोलका डॉट का इतिहास बॉलीवुड में

हॉलीवुड हो या बॉलीवुड पोलका डॉट का ट्रेंड कभी पुराना नहीं होता है। सत्तर के दशक में ये ट्रेंड काफी पॉपुलर हुआ। अब पोलका डॉट फ़िल्मी परंपरा का हिस्सा बन चुका है। शायद ही कोई ऐसी बॉलीवुड डीवा होगी जिसने पोलका डॉट वाला ड्रेस ना पहना हो। अपने लेख के ज़रिए हम बताने वाले ही कि



डॉक्टर साहिबा की जिंदगी का एक पन्ना

अभी मैंने उस ग्रामीण स्त्री की बायीं आँख का ऑपरेशन शुरू ही किया था कि उसने कहना शुरू कर दिया। ''डाक्टरनी ! तुम तो देवी हो देवी! तुमने पहले मेरे आदमी की आँख का ऑपरेशन किया उसे रोशनी दी। अब तुम मेरा ऑपरेशन कर रही हो। तुम तो सचमुच ही देवी हो।" मेरा मन-मष्तिष्क गर्व और



देश की पहली महिला विधायक और सर्जन

डॉ.रेड्डी को लोग एक शिक्षक,समाज सुधारक, सर्जन और व्यवस्थापक के तौर परजानते और याद करते हैं । आज अर्थात 30 जुलाई को इनकी 133वीं जन्म-जयंतीहै । इन्होंने महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने पर काम किया था । साथ ही लिंग-भेदके लिए भी लड़ाई लड़ी ।



कहा हम कहा तुम के डॉक्टर रोहित सिप्पी प्यार के मामले में काफी पुराने विचारों के है: करण वी ग्रोवर | आई डब्लयू एम बज

करण वी ग्रोवर काफी अच्छे अभिनेता है जो सभी भावनाओं को बड़े अच्छे तरह से संभाल लेते है।करण का अभिनय करियर काफी बड़ा रहा है जिसमें उन्होंने ऐसे किरदारों को निभाया है जो चुनौतीपूर्ण रहे हैं। उनके सहज लुक और प्रदर्शन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होने अपने हर किरदार अपनी प



शरीर में थकान की क्या हैं असली वजह, और जाने उनके घरेलु उपाय - Body Me Thakan ke Karan

शरीर में थकान की क्या हैं असली वजह, और जाने उनके घरेलु उपायअगर आप अक्सर थका हुआ महसूस करते हैं और आपमें ऊर्जा की कमी रहती है तो आप अकेले नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 5 में से एक व्यक्ति हर समय हल्की थकान महसूस करता है और 10 में से एक लंबे समय तक रहने वाली थकान से परेशान रहता है।कई लोगों में थ



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