क्यों देरी से विवाह कर रहे है युवा ?

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एक शाम के इंतज़ार में

कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब



निकाह के लिए बॉलीवुड हीरोइन्स लिबास

बॉलीवुड में कई ऐसी फ़िल्में है जिसमें मुस्लिम कल्चर को बड़े ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है। कई फ़िल्मों में निकाह की रस्म भी दिखाई गई है। अगर आप भी भविष्य में दुल्हन बनने जा रही है तो बॉलिवुड की दुल्हन से इन्सपिरेशन ले सकती है। हमारे लेख



नारी होना अच्छा है

नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहींमेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में बैठे दिग्गजों को



एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



क्या कश्मीर में लौटेगा रूमानी फ़िल्मों का दौर ?

कितनीख़ूबसूरत ये तस्वीर है, मौसमकी बेमिसाल बेनजीर है,



जब बॉलीवुड पर चढ़ा "बंधेज" और "बांधनी" का रंग

भले ही बॉलीवुड पर वेस्टर्न स्टाइल को फॉलो करने वाले का तमगा मिला हुआ हो, लेकिन आज भी भारतीय प्रिंट का काफी खूबसूरत तरीके से इस्तेमाल हो रहा है। अब बांधनी और बंधेज प्रिंट की ही बात कर ले। गुजरात और राजस्थान के



थोड़ा स्वार्थी होना चाहता हूँ मैं

कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व



लघुकथा -बदलती निगाहें

कहानी-बदलती निगाहेंवक्त के साथ लोग भी बदल जाते है,लेकिन स्मिता से मुझें ऐसी उम्मीद नहीं थी. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही स्मिता है, जिस



सिर्फ तुम्हारी

जब तुम आँखों से आस बन के बहते होउस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैंलड़खड़ाती गिरती और संभलती हुईसिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैंलोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सीऔर भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैंवो दूरियां



अलग अलग

अलग अलग आती मुश्किलें, अलग अलग जाल हैं. अपने अपने शौक हैं सब के, अपने अपने ख्याल हैं, उलझी उलझी सी राहें, बिखरा बिखरा सा है सफर, टूटी टूटी सी नींद आती, टुकड़े टुकड़े आते ख्वाब हैं. लाख लाख इच्छाएं सबकी,हजार हजार हैं कोशिशें, पाव पाव सब पा लेते, पौने पौने रह जाते सवाल



मेरा स्वार्थ और उसका समर्पण

मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहींएक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहींचंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहींवो इस धरती का पहरेदार है, जिसे और कोई रिश्ता मालूम नहींउसके रग रग में बसा ये देश मेरा, और मेरा जीव



आंखें

जब से छुप कर कहीं तुम को देखा है.आंखों ने हम को परेशान कर रखा है,कोई और देखना अब इसे गवारा नहीं,कईं बार इसे चाँद दिखा कर परखा है.हमारे काबू में नहीं, तुम्हारी हो चुकी हैं,काला जादू सा तुमने कुछ कर रखा है.झपकना भूल गयी है शायद तब से ही,पलक तक को भी नाकाम कर रखा है.हद तो तब हुई जब नींद आ गई यारो,कह रह



वो पिता है

ऊँगली पकड़कर जो हमें चलना सिखाते है,लड़खड़ाने पर सबसे पहले सँभालने वही आते हैप्यार तो करते है पर जताते कभी नहीं हम पे मरते है पर बताते कभी नहींहमारी खुशियों के लिए जो खुद को जलाते हैतकलीफ में तो होते है पर अपना दर्द छुपाते हैहमारा पेट भरने के लिए खुद भूखे सो जाते है ख



उड़ चला है “दिल “थोड़ा और जी लेने को

चंद अधूरीख्वाहिशें और बिखरे ख्वाब लिए उड़ चला है दिल कही दूरकुछ नयी हसरतें और फर्माइशें पूरी कर लेने को थोड़ा और जी लेने को यूं तोमायूस रहा अब तक चाहतों के बोझ तले पर अब न होगा येफिर कभी ये सोच उड़



प्रकृति मानव की

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम



ज़िन्दगी का शाही टुकड़ा

ज़िन्दगी मिली जुली धूप छाँव में घुली कभी नमक ज़्यादा तो चीनी कमपर शाही टुकड़े सी लगी दुख ने सुख को पहचाना इन दोनो का मेल पुराना क्या राजा क्या रंक केजिसकी झोली में ये जोड़ी ना मिलीज़िन्दगी मिली जुली धूप



"लाडली"

मैं बेटी हूँ नसीबवालो के घर जनम पाती हूँ कहीं "लाडली" तो कहीं उदासी का सबब बन जाती हूँ नाज़ुक से कंधोपे होता है बोझ बचपन सेकहीं मर्यादा और समाज के चलते अपनी दहलीज़ में सिमट के रह जाती हूँ और कहीं



दिल की बात

जो लफ़्ज़ों से होती नहीं बयान उन्हें आँखे जाती हैं आंखो से नहीं पद्सकें तो मेरी खामोशी को पहचान लो दिल से दिल तक बात पहुंचाने के बहुत रास्ते हैं बस सुनने और समझने की ही देरी हैं



जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है...

जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जनसंघ के संस्थापक, हिन्दू महासभा के के अध्यक्ष , कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, मुस्लिमलीग की सरकार में मंत्री, नेहरू सरकार में मंत्री.



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