‘‘न्यूटन के गति‘‘ का नियम क्या ‘‘अपराधिक राजनीति पर भी लागू होता है?

‘‘न्यूटन‘‘ क्या भारतीय राजनीति को ‘‘न्यूट्रल‘‘ कर देगें?मैं विज्ञान का छात्र रहा हूं। बचपन में मैंने पढ़ा है कि ‘‘न्यूटन के गति‘‘ के तीसरे नियम के अनुसार ‘‘हर क्रिया के बराबर (समान) और विपरीत प्रतिक्रिया होती है‘‘। प्रसिध्द वैज्ञानिक ‘‘न्यूटन‘‘ ने अपनी पुस्तक ‘‘प्रिंसीपिया मैथमैटिका‘‘ (वर्ष 1687) के



कोई रोता है।

( 1)क्यों? मुझको ऐसा लगता है। दूर कहीं कोई रोता है।कौन है वो? मैं नही जानता। पर,मानो अपना लगता है।कहीं दूर कोई रोता है। मुझसे मेरा मन कहता है। ( 2)अक्सर अपनी तन्हाई में, ध्



किरायेदार

लघुकथाकिरायेदार" भैया ये छह पाईप हैं जो पास की दूकान पर ले चलने हैं , ले चलोगे ? " मैंने ई - रिक्शे वाले को रोककर कहा ।" जी, ले चलेंगे । "" बताओ किराया क्या लोगे ? " " सत्तर रुपए लगेंगे ।"" भैया , पचास लो । सत्तर का काम तो नहीं है । "" ठीक है , पचास दे दीजिएगा ।"" तो फिर लाद लो । "वो अपने काम पर



एक रूपये नहीं तो जेल, झूठे आरोप की सजा

एक रूपये नहीं तो जेल, झूठे आरोप की सजा ! एक गरीब व्यक्ति से लेकर एक बड़े से बड़े व्यक्ति तक उसकी इज्जत उसके लिए बहुत माईने रखती है. कहा भी गया की व्यक्ति को अपनी इज्जत बनाने में वर्षो लग जाते है और गवाने में एक मिनट ही काफी है. समाज में प्रत्येक व्यक्ति को ये अधिकार है की वो अपनी मान प्रतिष्‍ठा, इज्



पथिक

(1)वो घर से निकला पीने को, मानो अंतिम पल जीने को।उसे अंतिम सत्य का बोध हुआ। मानो अंतिम घर से मोह हुआ।सोते बच्चों को जी भर देखा, सोती बीबी के गालों को चूमा,माँ-बाप को छूपकर देखा, चुपके सोते चरणों को पूजा।कुछ पैसे



छत्‍तीसगढ के स्‍कूलों में अब नहीं ली जा सकेगी मनमानी फीस !

छत्‍तीसगढ के स्‍कूलों में अब नहीं लीजा सकेगी मनमानी फीस ! वैसे तो देशभर में स्‍कूलफीस अभिभावकों के लिये एक समस्‍य बनती आई है लेकिन अब कम से कम छत्‍तीसगढ सरकार नेतो इसपर संज्ञान लिया है: पालकों की समस्‍याओं को समझते हुए विधानसभा के मानसूनसत्र में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 बहु



कट्टर पंथियों द्वारा राम मन्दिर के भूमि पूजन के खिलाफ प्रोपगंडा

कट्टर पंथियों द्वारा राम मन्दिर के भूमि पूजन के खिलाफ प्रोपगंडा डॉ शोभा भारद्वाज 'ऑल इंडिया इमाम एसोसियेशन के मौलाना साजिद रशिदी टीवी डिबेट में कहते थे राम मंदिर बनाइये कौन मना करता है ,मन्दिर वहीं बनायेंगे तारीख नहीं बतायेंगे| जब मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ उनके विचार अलग थे मौलाना ने कहा



‘‘फेक’’ ‘‘एनकाउंटर’’ को ‘‘वैध‘‘ बनाने के लिए ‘‘कानून‘ क्यों नहीं बना देना जाना चाहिए?

‘‘विकास दुबे एनकाउंटर’’ (मुठभेड़) पूरे देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित है। यह घटना न केवल स्वयं ‘‘सवालों में सवाल’’ लिये हुये है, बल्कि उपरोक्त ‘‘शीर्षक’’ प्रश्न भी पुनः उत्पन्न करता है। लगभग हर ‘एनकाउंटर’ के बाद उस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह अवश्य लगते रहे हैं। उक्त ‘प्रश्नचिन्ह’ क



‘विकसित’’ यूपी में ‘‘विकास‘‘ ‘‘राज‘‘ के साथ ‘‘ अराजकता राज‘‘ भी चल रहा है!

जिस बात की आशंका ‘‘गैंगस्टर’’ विकास दुबे की गिरफ्तारी के समय उत्पन्न हो रही थी व कतिपय क्षेत्रों में व्यक्ति भी की गई थी, वह अंततः चरितार्थ सही सिद्ध हुई। मुठभेड़ की घटना के पूर्व ही माननीय उच्चतम न्यायालय में एक वकील द्वारा दायर याचिका में भी उक्त आंशका व्यक्त की गई थी। यह आशंका भी व्यक्त की जा रही



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



नर्तकी ( कहानी )

नर्तकी a अम्बुज जब तीन दिन के बादविभावरी के घर पंहुचा तो वह उससे बिलकुल नहीं बोली और मुँह फुलाये बैठी मेजपोशकाढती रही | वह पास ही कुर्सी पर बैठ गया और मेजपोशखींचते हुए बोला -`` पता है , मैं कल सुबह ही पूरे एक साल के लिए बनारस जारहा हूँ और तुम हो कि काढने से ह



एहसास



कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



काली काली रात में

काली काली रात में काले काले बादलों को देखकरकाला हो गया मैं अब काल देव भी काले रथ में आ रहे है काले काले बादलों को देखकर अब नजरो के सामने दोनों आ चुके है काले काले बादलों को देखकर ये भी काले मैं भी कालासारा जहां है काला काले काले बादलों को देखकरअब प्राण ले जा रहे है मे



08 अप्रैल 2020

दूर ही रहना

प्यारे देशवासियों,आप सभी जानते हैं इन दिनों हमारा देश कोरोना वायरस जैसी महामारी से जूझ रहा है। यह एक ऐसी भयानक बीमारी है जो एक इंसान से दूसरे में और धीरे-धीरे समाज में फैलती है। आपस में ज़्यादा मिलने जुलने और संपर्क बढ़ने से इसका वायरस बहुत तेजी से फैलता है। सिर्फ एहतियात बरतकर ही इस बीमारी से बचा जा



हसन मियाँ कुछ कीजिये

रामनाथ जी और हसन मियाँ , सदियों से साथ रह रहे हैं. एक ही धरती और एक ही देश में, बस चेहरा और जगह बदल जाया करती है. लेकिन किसी घटना को ले के दोनों के रवैये में बड़ा ही अंतर है.



अंतिम विदाई

बरसात का मौसम था | शाम से ही हल्की-हल्की बारिश होते - होते रात में कडकडाती बिजली के साथ किसी तूफानी घटना की ओर इशारा करने लगी । पत्नी तो मेरी बाहों में बंधते ही मेरे प्यार को रो



kundali online

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रंग की एकादशी - कुछ भूली बिसरी यादें

रंग की एकादशी – कुछ भूली बिसरी यादेंआज फाल्गुनशुक्ल एकादशी है, जिसे आमलकी एकादशी और रंग की एकादशी के नाम से भी जाना जाता है | इस दिनआँवले के वृक्ष की पूजा अर्चना के साथ ही रंगों का पर्व होली अपने यौवन मेंपहुँचने की तैयारी में होता है | बृज में जहाँ होलाष्टकयानी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होली के उत्सव



असग़र वज़ाहत की बेशक़ीमती सोच : दिनेश डाक्टर

प्रसिद्द लेखक और अभिन्न मित्र डॉ असग़र वज़ाहत ने , जो सबकी तरह दंगो के बाद के मौजूदा हालत से बहुत दुखी और मायूस है , कल एक दिल को छूने वाला मेसेज भेजा है | आप सब पाठकों से शेयर कर रहा हूँ और प्रार्थना कर रहा हूँ कि आप भी अपने विचारों से ज़रूर अवगत कराएं |



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