'अपरिभाषित ज़िन्दगी'

क्या कहूँ, कि ज़िन्दगी क्या होती है कैसे यह कभी हँसती और कभी कैसे रो लेती है हर पल बहती यह अनिल प्रवाह सी होती है या कभी फूलों की गोद में लिपटीखुशियों के महक का गुलदस्ता देती हैऔर कभी यह दुख के काँटो का संसार भी हैहै बसन्त सा



गेहूं की रोटी जहर के समान | Wheat Roti Poison In Hindi

क्या आपको पता है कि गेहूं की रोटी जहर के समान है? शायद नहीं तो चलिए आज हम इस लेख के माध्यम से आपको गेहूं में मौजूद ग्लूटेन प्रोटीन के बारें में बताएंगे जो शरीर में किसी जहर के समान ही कार्य करता है। अब आपको लग रहा होगा कि हमारे पूर्वजों से ही हम गेहूं की रोटी का सेवन



रंग की एकादशी

रंग की एकादशी – कुछ भूली बिसरी यादेंकल रविवार 17मार्च को फाल्गुन शुक्ल एकादशी है | यों आज रात्रि ग्यारह बजकर चौंतीस मिनट के लगभग वणिजकरण, शोभन योग और पुनर्वसु नक्षत्र में एकादशी तिथि का आगमनहो जाएगा, किन्तु उदया तिथि होने के कारण कल एकादशी का उपवासरखा जाएगा | इस प्रकार जैसी कि मान्यता है कि द्वादशी



आखिर देश को क्या हो गया है।

‘‘पुलवामा’’ में हुई बड़ी वीभत्स आंतकी घटना में 40 सैनिकों के शहीद हो जाने की प्रतिक्रिया स्वरूप पाकिस्तान में घुस कर बालाकोट में किये गये हवाई हमलों के द्वारा ‘‘जैश-ए-मोहम्मद’’के आंतकवादी कैम्प (प्रशिक्षण शिविर) को नष्ट करने के बाद सम्पूर्ण देश ने एक जुट होकर सेना व सरकार को बधाई दी थी। कांग्रेस सहि



देशप्रेम-राष्ट्रभक्ति-राष्ट्रवाद को ढूढ़ता मेरा प्यारा देश!

इस लेख का ‘‘शीर्षक’’ देख कर बहुत से लोगों को हैरानी अवश्य होगी और आश्चर्य होना भी चाहिये। पर बहुत से लोग इस पर आखें भी तरेर सकते है। यदि वास्तव में ऐसा हो सका तो, मेरे लेख लिखने का उद्देश्य भी सफल हो जायेगा। एक नागरिक, बल्कि यह कहना ज्यादा उचित होगा एक भारतीय पैदाईशी ही स्वभावगतः देशप्रेमी होता है।



प्यार का दंश या फर्ज

प्यार का दंश या फर्ज तुलसीताई के स्वर्गवासी होने की खबर लगते ही,अड़ोसी-पड़ोसी,नाते-रिश्तेदारों का जमघट लग गया,सभी के शोकसंतप्त चेहरे म्रत्युशैय्या पर सोलह श्रंगार किए लाल साड़ी मे लिपटी,चेहरे ढका हुआ था,पास जाकर अंतिम विदाई दे रहे थे.तभी अर्थी को कंधा देने तुलसीताई के पति,गोपीचन्दसेठ का बढ़ा हाथ,उनके बे



प्रतिशोध-- एक कहानी

होटल में प्रवेश करते ही दिनेश ने अमर कोदेख लिया. उनकी नज़रें मिलीं पर दोनों ने ऐसा व्यवहार किया कि जैसे वह एक दूसरे कोपहचानते नहीं थे. परन्तु अधिक देर तक वह एक दूसरे की नकार नहीं पाये.‘बहुत समय हो गया.’‘हाँ, दस साल, पाँच महीने और बाईस दिन.’‘तुम ने तो दिन भी गिन रखे हैं?’‘क्यों? तुम ने नहीं गिन रखे?’‘



16 जनवरी 2019

निर्भीकता: खालीपन से भागना कैसे रोकें।

हम अपने हर उपलब्ध स्थान को भरने, अधिक कार्यों में व्यस्त रहने, संदेशों का जवाब देने, सोशल मीडिया और ऑनलाइन साइटों की जाँच करने, वीडियो देखने में बिताते हैं।हम अपने जीवन में खाली जगह से डरते हैं।परिणाम अक्सर एक निरंतर व्यस्तता, निरंतर व्याकुलता और परिहार, ध्यान की कमी, हमारे जीवन से संतुष्टि की कमी ह



सामाजिक एकता

2018 समाप्त हुवा । बदलाव , परिवर्तन निसर्ग का एक नियम है । आज विश्व काफी तीव्रगति से चल रहा है । और परिवर्तन की दौड़ मैं कई पीछे छुट रहे है तो कई काफी तेजीसे आगे भी बढ़ रहे है । समाज की एकता और प्रेम तभी आपसे में एक रूप हो सकते है जब हम इस बढ़ती तेज रफ़्तार में एक दूजे के सहायक बन एक दूजे को भी साथ लेकर



एकादशी व्रत २०१९

एकादशी व्रत 2019आने वाले तीनदिन बाद सन् 2018 को विदा करके सन् 2019 में विश्व प्रवेश करेगा | नववर्ष कीअग्रिम शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है वर्ष 2019 में आने वाले हिन्दू पर्व औरत्योहारों की तिथियाँ… सबसे पहले एकादशी…हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्त्व है | पद्मपुराण के अनुसार भगवान् श्री कृष्ण नेधर्



राहुल गांधी का ‘एप’ के माध्यम से मुख्यमंत्री चुनना! जनादेश का अपमान नहीं?

पाँच प्रदेशों में हुये विधानसभा चुनावों में तीन विधानसभाओं में कांग्रेस सरकारें बनने जा रही है। कांग्रेस पार्टी द्वारा तीन प्रदेशों में मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया की औपचारिकताओं की (औपचारिक) पूर्ती की जाकर विधायक दल द्वारा अंतिम निर्णय लेने का अधिकार परम्परा अनुसार हाई कमान अर्थात राहुल गांधी को



तुम्हें बच्चों की, याद नहीं आती है ,

वृद्ध दंपति द्वारा आत्महत्या... दुर्भाग्यपूर्ण घटना –हल्द्वानी...2018…( भाव= काल्पनिक )जैसे-जैसे आज शाम ढलने लगी, रोज़ की तरह दीपक की, लौजलने लगी,पत्नी की एकटक आँखें, डब- डबा रही थी,घर की एक-एक चीज़, आँखों में उतर-आ रही थी, दोनों नेमिलकर जाने कैसा , अभागा निर्णयले लिया,



देव प्रबोधिनी एकादशी

देवोत्थान एकादशीहिन्दू धर्म मेंएकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है | Astrologers तथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक वर्षचौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस होजाती हैं | इनमें से आषाढ़ शुक्ल एकादशी को जब सूर्य मिथुन राशि में संचार करताहै तब उसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है



राष्ट्रवाद एक विवाद

डॉ नीलम महेंद्र कृत“राष्ट्रवाद एक विवाद” में राष्ट्रवाद की सीमाओं का विश्लेषण डॉ नीलम महेंद्र कृत राष्ट्रवाद एक विवाद निश्चित हीएक महत्वपूर्ण कृति है कम से कम पठनीय एवं विचारणीय तो अवश्य ही है। इसचिंतन पटक कृति के आवरण पर पुस्तक के शीर्षक के साथ ही उसकी मूल विषय वस्तुको स्पष्ट करने वाला वाक्य राष्ट्



जन्मसिद्धता

जन्मसिद्धता तू ही नहीं, सभी खुश थे मेरे दुनियां में आने की खबर सुन लेकिन जब किलकारी गूंजी तेरे घर आंगन में मायूस भरे उदास चेहरे हुए कारण समझ ना पाई पर तू जग की रीति निर्वाह अनबूझ रही मुझसे क्या मैं चिराग नहीं दहेज ढोने वाली ठुमके ठुमक करते पग फूटी आँख किसी को ना सुहाते स्वतंत्रता पर प्रश्न चिन्ह लगा



वो लौट के नहीं आआई

लाठी की टेक लिए चश्मा चढाये , सिर ऊँचा कर मां की तस्वीर पर एकटक टकटकी लगाए पश्चाताप के ऑंसू भरे लरजती जुवान कह रही हो कि तुम लौट कर क्यों नहीं आई शायद खफा मुझसे बस, इतनी सी हुई हीरे को कांच समझता रहा समर्पण भाव को मजबूरी का नाम देता हठधर्मिता करता रहा जानकर भी, नकारता रहा फिर, पता नहीं कौन सी बात



वो लडकी

क्या दोष था मेरा बस मैं एक लडकी थी अपना बोझ हल्का करने का जिसे बालविवाह की बलि चढा दिया मैं लिख पढकर समाज का दस्तूर मिटा एक नई राह बनाना चाहती थी मजबूर, बेवश,मंडप की वेदी पर बिठा दिया दुगुनी उम्र के वर से सात फेरे पडवा दिए वक्त की मार बिन बुलाए चली आई छीट की चुनरिया के सब रंग धुल गए कल की शुभ लक्ष



दिल चाहे - शिखा

Dil chahe yu hi teri baaho mai rahena ,Dhadkan ki tarah dil mai basa lu tujko.Dil chahe yu hi teri palko pe rahena,Khwab ki tarah palko pe saja lu tujko.Dil chahe yu hi teri saanso mai rahena,Phoolo ki tarah saanso mai mila lu tujko.Dil chahe yu hi teri bagiya mai rahena,Khushbu ki tarah muj mai mi



गणपति बप्पा मोरया

गणपति बप्पा मोरया डॉ शोभा भारद्वाज श्रीगणेश की पौराणिक जन्म कथा के अनुसार पार्वती जी स्नान करने जा रहीं थीं उन्होंने अपने बदन से उतरे उबटन से गणेश जी कीमूर्ति बनाई उनकी प्राण प्रतिष्ठा कर उन्हें आदेश दिया जब तक वह स्नान कर रहीं है किसीको अंदर आने न दिया जाये| समय से पूर्व शिव जी



जीवन

सांसो में आता जाता है स्पंदन बन चलता जाता है जीवन तू अंतर मैं मुस्काता है कभी अश्रु बन के जीता है कभी स्नेहमय बन जाता है जीवन तू मौन हो सब कुछ कह जाता है माँ की ममता बहन का प्यार और कभी प्रयसी की गुहार जीवन तू सब कह जाता है रेशम की झालर सा सहलात



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