गाने

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स्वंयवर

सीता स्वंयवर पर .....कैसे मैं पहचानू उन्हें.कैसे मैं जानूं के वो बनें हैै वो मेरे लिए.होगी सैकड़ों की भीड़ वहां.तेजस्वी और वैभवशाली तो होंगेवहां कई और भी.लेकिन सुना है मैंनें शिव का धनुषउठा सकेंगे कुछ ऐसे प्र



मीरा के वचन मोहन के लिए

भेजा था विष का प्याला अमृत बन गया। भेजा था विषैला सांपफूलों का हार बन गया। तेरी ही करामात है ये मोहनकि कलियुग में भी जी रही हूं। बिना डरे तेरी भक्ति के गीतगा रही हूं। शिल्पा रोंघे



जनम जनम की बात है

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धरती करे पुकार - अब मुझे यूं ना सताओ

कहीं कांप रही धरती. कहीं बेमौसम बारिश से बह रही धरती. कहीं ठंड के मौसम में बुखार से तप रही धरती. कभी जल से, तो कभी वायु प्रदूषण से ज़हरीली हो रही प्रकृति. विकास के नाम पर विनाश का दर्द झेलती प्रकृति अपनी ही संतति से अवहेलना प्



फिर होगा राजा महाराजाओं में मुकाबला-बॉलीवुड

इतिहास भले ही गुजरा हुआ वक्त होता है इसका मतलब नहीं हैकि इसके बारे में जानकारी होना हमारे लिए उपयोगी नहीं होता है, ये हमारे देश की धरोहर होता है, मानवसभ्यता के विकास और इतिहास से मिले सबक ही सुनहरे भविष्य को गढ़ने में मदद करतेहै। आज अपने इस



नशामुक्ति

नशा "नाश" का दूसरा नाम है.ये नाश करता है बुद्धि का.ये नाश करता है धन का.ये नाश करता है संबंधों का.ये नाश करता है नैतिक मूल्यों का.नाश नहीं निर्माण की तरफ बढ़ोयुवाओं तुम नशामुक्त समाज बनानेका संकल्प लो.शिल्पा रोंघे



खिलौनों की सभा- बाल कविता

हुई सभा एक दिन गुड्डे गुड़ियों की.गुड़िया बोली,मैं सुंदरता की पुड़ियामुझसे ना कोई बढ़िया.इतने में आया गुड्डापहन के लाल चोला,कितनों का घमंड है मैंने तोड़ा.बीच में उचका काठी का घोड़ाअरे चुप हो जाओ तुम थोड़ा.मैंने ही हवा का रुख़ है मोड़ा.लट्टू घूमा, कुछ झूमा.बोला लड़ों



बाल कविता - एक अश्व है निकला सागर किनारे

इक अश्व है निकला सागर किनारेपंख लगा के नभ में उड़ता जाए.हरा हरा सा है रुप हरियाली काकुहरा सा छाया है मतवाला सा.पीठ पे बिठा के परियों को स्वर्ग से आया धरती के दर्शन कराने को.अब तक था कहानियों में सिमटामोतियों से लिपटा,सुंदर बच्चों को लगता.सो



तुम्हारा स्वागत है शीत ऋतु

सर्द धूप के साथ हो चुकी है शुरू स्वेटरों की बुनाई.और रज़ाईयों की सिलाई.हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.अदरक की खुशबू से महकने लगी है चाय की दुकाने कुछ ज्यादा ही.हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.गज़क और तिल के लड्डूओंसे सजने लगी है दुकानें



पशु और पक्षी के लिए काव्यात्मक अभिव्यक्ति

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गीत सुनता हूं

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अभी तक का सफर। कितना सफल।

वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन दिवस पर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा एक शाखा प्रांरभ कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई थी। वर्ष 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी सौवीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। किसी भी संगठन के लिये 100 वर्ष पूर्ण करने का अत्यधिक महत्व होता है, क्योंकि इतने लम्बे सम



गुड्डन तुमसे ना हो पाएगा: अक्षत ने किया अंतरा को स्वीकार, क्या होगा गुड्डन का? | आई डब्लयू एम बज

ज़ी टीवी का लोकप्रिय शो गुड्डन तुमसे ना हो पायेगा (वेद राज की शून्य स्क्वायर) अपनी मनोरंजक कहानी के साथ दर्शकों का मनोरंजन करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। हाई वोल्टेज ड्रामा दर्शकों को चल रहे एपिसोड से रूबरू करा रहा है। प्लॉट के अनुसार, अंतरा (दलजीत कौर) ने अक्षत (निशा



साजन बेस परदेश

साजन बेस परदेश सूनी - सूनी लगे नाचे गायें घर चौबारे नगरी नगरी द्वारे द्वारे जहर लागे हंसी ठिठोली सून सून लागे होली !चारो और रंग बरसे है मेरा सूखा मन तरसे है खाली अबीर गुलाल झोली सूनी सूनी लागे होली | आँखे सबकी ,खुशियां वांचे पीली पीली सरसो नाचे रंगीले परिधान में टोली सूनी सूनी लागे होली | होड़ म



इस मजेदार गाने का आज भी नहीं है कोई जोड़

कुछ गीत न केवल देखने वरन सुनने में भी मजेदार होते हैं जो आप को गुदगुदा करगुनगुनाने और सराहने पर मजबूर कर जाते हैं | ऐसे ही गीतों में से एक है सन 1968  में रिलीज़ सुनील दत्त, सायरा बानो,महमूद और किशोर कुमार अभिनीत बेहद सफल एवं मजेदार फिल्म “पड़ोसन” का मजेदार गीत “एकचतुर नार”| मन्ना दा, किशोर कुमार और म





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