गांव

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कहां गए फिल्मों से गांव ?

एक दौर था जब ग्रामीणपरिवेश पर बनीं फ़िल्में खूब पसंद की जाती थी। तत्कालीन ग्रामीण भारत केस्वाभाविक चित्रण वाली फ़िल्म मदर इंडिया तो ऑस्कर अवार्ड तक भारत की मिट्टी कीखुशबू बिखेर आई। सिर्फ एक वोट कम पड़ने की वजह से ये फ़िल्म पीछे रह गई। फणी



काले जादू की दुनिया है मायोंग गाँव, यहां का बच्चा- बच्चा करता है काला जादू : बड़ी दिलचस्प कहानी है......

भूत- प्रेत, जादू -टोना ये सब पढ़े- लिखे लोगों के लिए तो एक कल्पना है लेकिन समाज का अधिकांश हिस्सा इसे वास्तविकता मानता है। संविधान के अनुभाग 5 के अनुच्छेद 51A में कहा गया है कि सभी भारतीयों का ये मौलिक कर्तव्य है कि वो वैज्ञानिक मनोवृती को बढ़ावा दें। लेकिन आज हम जो बात कहने वाले हैं, वो हमारे पहले



क्या आपको लगता है साध्वी प्रज्ञा गुनहगार हैं?

2008 मालेगांव ब्लास्ट मामले में कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपियों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट द्वारा आतंकी साजिश और हत्या के आरोप तय किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। इससे पहले सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने विस्फ



देश में 'ब्लैक आउट' का खतरा: बिहार, बंगाल, यूपी, दिल्ली की बत्ती हो सकती है गुल

नई दिल्ली: देश के बड़े हिस्से को ब्लैक आउट का सामना करना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित उत्तर भारत के बड़े हिस्से में भयंकर बिजली संकट पैदा हो सकता है. बताया जा रहा है कि इन इलाकों में बिजली सप्लाई करने वाले एनटीपीसी के प्लांट में कोयल



लेख-- राजनीतिक उदासीनता के शिकार गांव और ग्रामीण

भारत की दो तिहाई आबादी अगर जेल से भी कम जगह में रह रही है। तो ऐसे में निजता के मौलिक अधिकार बन जाने के बावजूद छोटे होते मकान और रहवासियों की बढ़ती तादाद प्रतिदिन की निजता को छीन रही है। जिस परिस्थिति में देश में सबको घर उपलब्ध कराने की बात सरकारें कह रही हैं। उस दौर में देश की आबादी का अधिकांश हिस्सा



मेरा गाँव

मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद का एक छोटा सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बड़ा तो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन अब नहीं रहा क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की और पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चार



व्यंग कथा... आज के गांव

मेरा गांव मेरा देश मेरा ये वतन ,तुझपे निसार है मेरा तन मेरा मन । आदित्य कुछ सोचते हुए कहता है कि ऐसा ही होता है गांव ? जहाँ हर आदमी के दिल में प्रेम हिलोरें मारता है । जहाँ इंसानी ज़ज़्बात खुलकर खेलते हैं । हर कोई एक दूसरे के सुख, दुःख में भागीदार होता है । पड़ोसी के भूखे होने पर पड़ोसी बेचैन हो जाता





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