आज भी सड़कों पर भीख मांगता है सुभाष चंद्र बोस के साथ देश की आजादी के लिए लड़ना वाला ये सिपाही

आज हम आज़ादी का मजा लेते हुए अपने घरों में बड़े-बड़े मुद्दों को बड़ी आसानी से बहस में उड़ा देते है, लेकिन कभी सोचा है कि जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश को आज़ाद कराया, उनमें से जो जिंदा हैं, वो किस हाल में हैं ?ये हैं झाँसी के रहने वाले श्रीपत जी, 93 साल से भी ज्यादा की उम्र पार कर चुके श्रीप



यूपी के इस गांव में मां- बाप अपने बच्चों को डॉक्टर -इंजीनियर नहीं बल्कि भिखारी बनाना चाहते हैं

हर माँ-बाप अपने बच्चों के लिए कोई न कोई सपना ज़रूर देखते हैं कोई चाहता हैं उनका बच्चा डॉक्टर बने तो किसी का ख्वाब होता है कि उनका बच्चा इंजीनियर बने लेकिन आपको ये बात सुनकर थोड़ी हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िले में नगला दरबारी नाम का एक गांव है, जहां माता-पिता बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर



बाबुल भी रोये बेटी भी रोये - अमीरी गरीबी

Babul Bhi Roye Beti Bhi Roye Lyrics of Amiri Garibi (1990): This is a lovely song from Amiri Garibi starring Jeetendra, Rekha, Rishi Kapoor and Urmila Bhatt. It is sung by Kavita Krishnamurthy and composed by Laxmikant and Pyarelal.अमीरी गरीबी (Amiri Garibi )बाबुल भी रोये बेटी भी रोयेबाबुल भी रोये ब



बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम - अमीरी गरीबी

Budhi Ghodi Lal Lagaam Lyrics of Amiri Garibi (1990): This is a lovely song from Amiri Garibi starring Jeetendra, Rekha, Rishi Kapoor and Urmila Bhatt. It is sung by Alka Yagnik and composed by Laxmikant and Pyarelal.अमीरी गरीबी (Amiri Garibi )कान में झुमके हे हे हेचाल में ठुमके हे हेकान में झुमकेयह



ओ मेरी सासु ो मेरे सेल - अमीरी गरीबी

ओ मेरी ससु ओ मेरे बिक्री अमिरी गारिबी (1 99 0) के गीत: यह जीतेन्द्र, रेखा, ऋषि कपूर और उर्मिला भट्ट अभिनीत अमिरी गारिबी का एक सुंदर गीत है। इसे शैलेंद्र सिंह और सुखविंदर सिंह द्वारा गाया जाता है और लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल द्वारा रचित किया जाता है।अमीरी गरीबी (Amiri Garibi )ओ मेरी सासु ो मेरे सेलबीव



तवाइफ़ कहाँ किसी के साथ - अमीरी गरीबी

Tawaif Kahan Kisi Ke Sath Lyrics of Amiri Garibi (1990): This is a lovely song from Amiri Garibi starring Jeetendra, Rekha, Rishi Kapoor and Urmila Bhatt. It is sung by Alka Yagnik and composed by Laxmikant and Pyarelal.अमीरी गरीबी (Amiri Garibi )बजा बेरुखी है यह सर्कार की क्ष २के मैं चीज़ हूँ एक बाज



अमीरी गरीबी (Amiri Garibi )

"Amiri Garibi" is a 1990 hindi film which has Jeetendra, Rekha, Rishi Kapoor, Urmila Bhatt, Poonam Dhillon, Raj Babbar, Neelam Kothari, Dan Dhanoa, Rajesh Puri, Chand Usmani, Yunus Parvez, Lalita Kumari, Guddi Maruti, Rohini Hattangadi, Sushma Seth, Shakti Kapoor, Pran, Tiku Talsania, Gurubachan Si



डाॅक्टर बनने की राह आसान बनाने हेतु एक सार्वजनिक अपील

माउंटेन मैन के नाम से विख्यात दशरथ मांझी को आज दुनिया भर के लोग जानते हैं। वे बिहार जिले के गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे, जिन्होंने अकेले अपनी दृ़ढ़ इच्छा शक्ति के बूते अत्री व वजीरगंज की 55 किलोमीटर की लम्बी दूरी को 22 वर्ष के कठोर परिश्



मासूमीयत

शर्मा जी अभी-अभी रेलवे स्टेशन पर पहुँचे ही थे। शर्मा जी पेशे से मुंबई मे रेलवे मे ही स्टेशन मास्टर थे। गर्मी की छुट्टी चल रही थी इसलिए वह शिमला घूमने जा रहे थे, उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मंजू और बेटी प्रतीक्षा भी थी। ट्रेन के आने मे अभी समय था।तभी सामने एक महिला अपने पाँच स



“गरीबी”

“गरीबी” गरीबी एक शूल की तरह पली बढ़ी चढ़ती गई व प्राण हरती गई उतरी तो धमनियों से रक्त निचोड़ गई जब सुस्त हुई तो तगड़े व स्वस्थ नौजवान को भी पस्त कर गई गरीबी गरीब कर गई॥ गरीबी लता की तरह बढ़ी उपजाऊँ जमीन पर उगी पर किसी दरख्त तक न पहुँच पाई जमीन प



मिलिए कमली से जो ख़ुद पति की लाश को ले गई श्मशान

कफन खरीदने के लिए पैसे मांगे. फिर पति की लाश को श्मशान ले गई. खुद से अपना सिंदूर धोया और अपने पति को मुखाग्मी दी। पटना: आम तौर पर जब किसी महिला के पति की मौत हो जाती है तो वो टूट जाती है. लेकिन आर्थिक तंगी और खुद की औलाद से मिले धोखे ने उसे एक मिनट के लिए भी पति के मरने पर टूटने नहीं दिया. उसने पहले



समय का मोल ...

कहानी------------समय का मोल...!!अमितेश कुमार ओझाकड़ाके की ठंड में झोपड़ी के पास रिक्शे की खड़खड़ाहट से भोला की पत्नी और बेटा चौंक उठे। अनायास ही उन्हें कुछ  प्रतिकूलता का भान हुआ। क्योंकि भोला को और देर से घर पहुंचना था। लेकिन अपेक्षा से काफी पहले ही वह घर लौट आया था। जरूर कुछ गड़बड़ हुई.... भोला की



17 दिसम्बर 2015

गरीबी को डर बस भूख का है

बारिश भिगाती रही मगर गरीबी को डर बस भूख का हैगर्मी भी सताती रही मगर गरीबी को डर बस भूख का हैसर्दी कंपकंपाती रही मगर गरीबी को डर बस भूख का हैमौसम से अमीरी ही डरी, गरीबी को डर बस भूख का हैकोई सत्ता में आया,छाया गरीबी को डर बस भूख का हैकिसी ने सिंहासन गवांया गरीबी को डर बस भूख का हैव्यस्त सब सियासी खेल



भूख से मरने वालों का सच नहीं जानते हम

गिरिजा नंद झाहालांकि, इस तथ्य को जानने में अपनी कोई दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए, लेकिन सामान्य ज्ञान बढ़ाना हो तो इस पर एक नज़र डालने में कोई हजऱ् नहीं है। बहुत बड़ा आंकड़ा नहीं है और इसीलिए इसे याद रखने के लिए बहुत ज़्यादा माथापच्ची भी नहीं करनी होगी। तथ्य यह है कि मौत अब तक का आखिरी सच है और इस सच क



अपनी बर्बाद फसल को देखते हुये मैंने एक किसान से कहा कि ...

सिर को पकडे हुये अपनी बर्बाद फसल को कातर निगाहों से देखते हुये मैंने एक किसान से कहा कि चल उठ मन की बात ही सुन ले सुकून मिलेगा।  वह उठा और अपने मन की जो सुनायी वह बयान करता हूँ----  बोला " कहाँ जाऊँ मैं अपनी यह बर्बाद फसल लेकर; सोचता हूँ मर जाऊँ इसी आम के पेड़ पर लटक कर;  घर जाऊँ कैसे? मेरी बूढी माँ



25 जनवरी 2015

सच्चा सुख: किसान और उसकी कहानी

एक युवक जो कि एक विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था, एक दिन शाम के समय एक प्रोफ़ेसर साहब के साथ टहलने निकला हुआ था। यह प्रोफ़ेसर साहब सभी विद्यार्थियों के चहेते थे और विद्यार्थी भी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे। टहलते- टहलते वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब के साथ काफ़ी दूर तक निकल गया और तभी उ





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