लौट चले दिल्ली शहर से रोजगार।

लौट चले दिल्ली शहर से रोजगार।अब सील ने हर हुनर वाले की जुबान बंद कर दी हैं। सील कंपनी मे नहीं हुनर वाले के पैरो मे बेड़ियाँ पड़ी हैं। इससे अच्छा तो तिहाड़ की जेल मे बंद करके सबके हुनर को कैद कर लेते। कम से कम अंग्रेज़ो वाले दिन तो याद आते। इन्होने तो उस लायक भी नहीं छोड़ा। मजदूर कल भी आजाद था आजा भी आजाद



"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसान बरगद पीपल खलिहानों में, गाते साँझ बिहान......लहराती फसलें .....

आधार छंद - सरसी (अर्द्ध सम मात्रिक) शिल्प विधान सरसी छंद- चौपाई + दोहे का सम चरण मिलकर बनता है। मात्रिक भार- 16, 11 = 27 चौपाई के आरम्भ में द्विकल+त्रिकल +त्रिकल वर्जित है। अंत में गुरु /वाचिक अनिवार्य। दोहे के सम चरणान्त में 21 अनिवार्य है"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसानबरगद पीपल खलिहा



गुडगाँव (गुरुग्राम) : "भारत की मिलेनियम सिटी"

एनसीआर क्षेत्र में व्यापारऔर वाणिज्य केलिए एक नयास्थान है, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे केअलावा, यह शहरयात्रा और कई चीजोंको करने केलिए स्थानों कीएक विस्तृत सूचीभी प्रदान करताहै। कई अन्यप्रमुख पर्यटन स्थलों केनजदीक स्थित, गुड़गांवमें घूमन



भारत का एक ऐसा गाँव जहाँ हर व्यक्ति की आय है सालाना 80 लाख रुपये !

गांव का नाम जहन में आते ही सबसे पहले वहां होने वाली असुविधाओं का ख्याल आता है। लेकिन समय के साथ अब गांवों की तस्वीर बदल रही है। आज हम आपको ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे है जिसकी तरक्की की कहानी सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। आप यकीन नहीं करेंगे। जी हां, इस गांव में गरीब नहीं बल्कि सभी बेहद अमीर लोग



गज़ल - सूर्यभान कुशवाहा

गजल-अपनो को कभी गॆर,बताया न कीजियेदिल मे नही जगह,तो सताया न कीजिये।आंखों में बसा लीजिए, काजल ही मानकरआंसू के साथ इनको,बहाया न कीजियेऎसे भला जलाकर नफरत की आग परताली मजे से बॆठ,बजाया न कीजियेमाना तुम्हारे ज



"नदिया किनारे गाँव"

गीत काव्य, "नदिया किनारे गाँव"....... मात्रा भार- 14, नदिया किनारे गाँव रे कहीं ऊँच कहीं खाँव रे चकवी चकवा गुटुरावें झुंगी झाड़ी झनकाव रे।। नदिया नैया बहाव रे बदरी बरखा निभाव रे गर्म ठंड अरु पुरुवाई भिजत गोरी के पाँव रे।। नदिया नैया नहाव रे छलकत मलकत बाव रे



Sketches from Life: भूत

दिल्ली से अपने गांव जिबलखाल, जिला पौड़ी गढ़वाल आये कुछ दिन बीत चुके थे. अब तक गांव के भूगोल की भी जानकारी हो गई थी. मसलन मकान के दायीं ओर से नीचे जाने वाली तंग पगडण्डी पानी के स्रोत की तरफ जाती थी. बायीं ओर से खेतों की मुंडेर पर चल कर नीचे नद



मेरा गाँव

मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद का एक छोटा सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बड़ा तो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन अब नहीं रहा क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की और पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चार



गाँव की ओर

खादी के एक झोले में टूथब्रश डाला, कुछ कपड़े डाले आैर बस गाँव जाने की तैयारी हो गई......Sketches from Life: गाँव की ओर स्कूल की शिक्षा पूरी हो चुकी थी और कॉलेज जाने के बीच कुछ अन्तराल था. सो कुछ समय गाँव मे रहने का मन बना लिया. खादी के एक झोले में टूथब्रश डाला, कुछ कपड़े डाले आैर बस गाँव जाने की तैया



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)प्रस्तुत ब्लॉग में मैनें उन ग़ज़लों और रचनाओं को एक जगह संकलित करने का प्रयास किया है , जिन्हें किसी पत्रिका ,मैग्जीन ,अखबार,संस्करण या किसी वेव साइट में शामिल किया गया है। आशा ही नहीं बल्कि पूरा बिश्वास



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

 मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)



पहाड़ी गाँव

पिछले दिनों लैंसडाउन, जिला पौड़ी गढ़वाल के नजदीक गाँव जिबल्खाल में जाने का मौका मिला जो दिल्ली से लगभग 260 किमी दूर ..... एक फोटो-ब्लॉग Lainsdowne,लैन्सडौन,पहाड़,गांव, Sketches from Life: पहाड़ी गाँव



खेलें खेल

जिलाधिकारी महोदय ने प्रत्येक गाँव में खेल मैदान विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।हलचल सी शुरू हुई बच्चों में,हाथ पैर फैला कसरत चालू कर दी।कोई क्रिकेट मैच की तो कोई गिल्ली डन्डा ही खेलता नज़र आता।अभी तक किसी के खाली पड़े खेत या बाग में खेलते थे,अब अपना खेल मैदान होने जा रहा है।सब बहुत खुशी से चयनि



महज मनोरंजन नहीं : अब 'खेल' बनाते हैं नवाब!

खेलों में आगे आने का यदि कोई अचूक मंत्र है तो वह है ''कैच देम यंगÓÓ जिसका मतलब है छोटी उम्र में ही खेलों में रुचि रखने वाले, स्वस्थ, मजबूत शरीर च इच्छाशक्ति वाले बच्चों को चुनना । स्कूल स्तर से ही उन्हें अच्छे से अच्छा प्रशिक्षण देना, उन्हें सुविधाएं मुहैया कराना, उन्हें अच्छा कैरियर विकल्प व सुरक्ष



बुफे सिस्टम

गाँव कथा दिनांक 14 अप्रैल 2015 चंदनवा के यहाँ तिलक था ! राम आसरे यु तो न्योता खाने के बड़े शौक़ीन थे ,किन्तु उस दिन ज्यो न्योते में गए तो तुरंत ही वापस आ गए ! कल्लन ने भी सोचा न्योते में जाने के लिए राम आसरे को लेता चलु ,अकेले जाने से थोडा संकोच तो होता ही है खाने में ! दो जन रहेंगे तो थोड़ी बेफिक्





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x