हिंदी दिवस पर प्रस्तुत गीत

"गीत"हिंदी हिंद की जान है, आन बान और शान हैभारत के हर वासी का, युग-युग से पहचान हैहर बोली में लहजा हिंदी, हर माथे पर सोहे बिंदीघर-घर में इंसान है, आँगन मुख मुस्कान है.......लिखना रुचिकर पढ़ना रुचिकर, रुचिकर है आठो डाँड़ीहिंदी के हर शब्द में बहती, गंगा यमुना की नाड़ीस्वर व्यंजन की आरती, प्रिय प्रतीक माँ



संगीत का अनोखा कार्यक्रम...

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एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



पल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगी ...

धूल कभी जो आँधी बन के आएगीपल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगीअक्षत मन तो स्वप्न नए सन्जोयेगाबीज नई आशा के मन में बोयेगाखींच लिए जायेंगे जब अवसर साधनसपनों की मृत्यु उस पल हो जायेगीपल दो पल फिर ...बादल बूँदा बाँदी कर उड़ जाएँगेचिप चिप कपडे जिस्मों से जुड़ जाएँगेचाट के ठेले जब



दुश्मन देश पाकिस्तान में गाना मीका सिंह के लिए बनी मुसीबत, AICWA ने किया बहिष्कार

जब से पुलवामा हमला हुआ है तब से पूरा देश और भारत सरकार एकजुट होकर पाकिस्तान का बहिष्कार करने में लगा हुआ है। छुट्टी से ड्यूटी पर लौट रहे भारतीय जवानों की बस में धमाका करवाने वाले आतंकियों का समूह जैश-ए-मोहम्मद का था लेकिन पाकिस्तान ने इस बात से इंकार कर दिया। भारत ने इसका सबूत दिया फिर भी पाक को अपन



घास उगी सूखे आँगन ...

धड़ धड़ धड़ बरसा सावनभीगे, फिसले कितने तनघास उगी सूखे आँगनप्यास बुझी ओ बंजर धरती तृप्त हुईनीरस जीवन से तुलसी भी मुक्त हुई,झींगुर की गूँजे गुंजनघास उगी ...घास उगी वन औ उपवनगीले सूखे चहल पहल कुछ तेज हुईहरा बिछौना कोमल तन की सेज हुईदृश्य है क



आशा का घोड़ा ...

आशा की आहट का घोड़ासरपट दौड़ रहासुखमय जीवन-हार मिलासाँसों में महका स्पंदनमधुमय यौवन भार खिलानयनों में सागर सनेह कासपने जोड़ रहा सरपट दौड़ रहा ...खिली धूप मधुमास नयाखुले गगन में हल्की हल्कीवर्षा का आभास नयामन अकुलाया हरी घास परझटपट पौड़ रहासरपट दौड़ रहा ...सागर लहरों क



कजरी गीत

"कजरी गीत"मोहन गोकुल नगर सुधारी, मधुवन कीन्ह सुखारी नाजाकर मथुरा डगर निहारी, सुखी कीन्ह महतारी ना......मोहन गोकुल नगर....धारी गोवर्धन गिरधारी, आओ न फिर यमुन कछारी नागाय ग्वाल गोपिन दुख हर्ता, पनघट की सखियाँ न्यारी..... मोहन गोकुल नगर ......रास आस तुमसे बनवारी, गौतम तो रहा अनारी नासावन झूला डाल-डाल प



चातुर्मास्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में समय-समय पर विभिन्न व्रत उपवास एवं त्योहारों का पर्व मनाने की परंपरा रही है | प्रत्येक व्रत / पर्व के पीछे एक वैज्ञानिक मान्यता सनातन धर्म में देखने को मिलती है | आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है | इसका बहुत ही



बाल गीत

"बाल गीत"चंदा मामा आ भी जाओ, लेकर अपना प्यारमेरी माँ के भाई हो तुम, तारों के सरदारबहुत खिलाया माँ ने कहकर, लाएंगे चंदा मामादूध-भात से भरा कटोरा, रहते घिर बादल श्यामाछुप जाते क्यों आप बताओ, वादा नहीं निभाते होआज छमाछम है सावन की, तुम हो झूला के रखवारचंदा मामा आ भी जाओ, लेकर अपना प्यारमेरी माँ के भाई



गीतिका

मंच को प्रस्तुत गीतिका, मापनी- 2222 2222 2222, समान्त- अन, पदांत- में...... ॐ जय माँ शारदा!"गीतिका"बरसोगे घनश्याम कभी तुम मेरे वन मेंदिल दे बैठी श्याम सखा अब तेरे घन मेंबोले कोयल रोज तड़फती है क्यूँ राधाकह दो मेरे कान्ह जतन करते हो मन में।।उमड़ घुमड़ कर रोज बरसता है जब सावनमुरली की धुन चहक बजाते तुम मध



गीत, आंचलिक पुट

"गीत" आंचलिक पुटमोरे अँगने में है तुलसी का चौराएक पेड़ नीम संग आम खूब बौराअड़हुल का फूल लाल केसर कियारीमगही के पतवा तुराये भरि दौरा.....मोरे अँगने मेंगाय संग कुकुरा के रोज रोज कौराधूल और माटी में खेले चंचल छौरागैया के गोबर भल घास दूब मोथाबगिया फुलाए पै उड़े लागल भौंरा.....मोरे अँगने मेंहोखे जब ओसवनी तब



कभी अलविदा ना कहना तुम

कभी अलविदा ना कहना तुम मेरे साथ यूँ ही रहना तुम !तुम बिन थम जाएगा साथी ,मधुर गीतों का ये सफर ;रुंध कंठ में दम तोड़ देगें -आत्मा के स्वर प्रखर ;बसना मेरी मुस्कान में नित ना संग आंसुओं के बहना तुमतुम ना होंगे हो जायेगी गहरीभीतर की तन्हाईयां-टीसती विकल करेंगीयादों की ये परछाईयां-गहरे भंवर में संताप के -



गीत

शादी के बाद ससुराल से एक बेटी की अपनी माँ को भावनात्मकपाती -- गीत जिसकी रज ने गोद खिलाया , पैरों को चलना सिखलाया . जहाँ प्यार ही प्यारभरा था - वह आंगन बहुत याद आता है | सुबहसुबह आँखें खुलते ही , तेरा वहपावन सा चुम्बन | फिरदोनों बांहों में भरकर. हल



गीतिका

प्रस्तुत गीतिका, मापनी-2212 122 2212 122, समांत- अना, स्वर, पदांत- कठिन लगा था..... ॐ जय माँ शारदा!"गीतिका"अंजान रास्तों पर चलना कठिन लगा थाथे सब नए मुसाफिर मिलना कठिन लगा थासबके निगाह में थी अपनों की सुध विचरतीघर से बिछड़ के जीवन कितना कठिन लगा था।।आसान कब था रहना परदेश का ठिकानारातें गुजारी गिन दि



2019 के चुनाव अभियान में मर्यादाएं तार तार

2019 के इलेक्शन संपन्न हुए-गणतांत्रिक प्रक्रियाका एक मील का पत्थर. सारी गहमा-गहमी, उत्तेजना, भाषण, सभाएं इत्यादि कीअभी के लिए तो इति हुई.परन्तु गणतंत्र में चुनाव तो आम बात है और फिरचुनाव होंगे और होते रहेंगे. सभी (आम नागरिक) इस बात से सहमत होंगे किप्रतिस्पर्धता जो गणतंत्र में एक स्वस्थ घटना होनी चाह



गीतिका

"दोहा गीतिका"बहुत दिनों के बाद अब, हुई कलम से प्रीतिमाँ शारद अनुनय करूँ, भर दे गागर गीतस्वस्थ रहें सुर शब्द सब, स्वस्थ ताल त्यौहारमातु भावना हो मधुर, पनपे मन मह नीति।।कर्म फलित होता सदा, दे माते आशीषकर्म धर्म से लिप्त हो, निकले नव संगीत।।सुख-दुख दोनों हैं सगे, दोनों की गति एककष्ट न दे दुख अति गहन, स



भोजपुरी गीत

"भोजपुरी गीत"चल चली वोट देवे रीति बड़ पुरानीनीति संग प्रीति नौटंकी भई कहानी.......लागता न लूह, न शरम कौनो बाति केघूमताटें नेता लोग दिन अउर राति केकेके देई वोट केकरा के गरिआईंउठल बाटें कई जनी हवें अपने जाति केलोगवा के मानी त होई जाई नादानीनीति संग प्रीति नौटंकी भई कहानी.......चल चली वोट.....भागु रे पत



गीतिका

, समांत- आम, पदांत- को, मापनी- 2122 2122 1222 12"गीतिका"डोलती है यह पवन हर घड़ी बस नाम को नींद आती है सखे दोपहर में आम कोतास के पत्ते कभी थे पुराने हाथ में आज नौसिखिए सभी पूजते श्री राम को।।राहतों के दौर में चाहतें बदनाम करलग गए सारे खिलाड़ी जुगाड़ी काम को।।किश्त दर किश्त ले आ रहें बन सारथीबैंक चिं



गीतिका

मापनी -1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका" अजी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को सुनो किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको नजर खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया तनिक इकरार हो



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