ग़ालिब

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ग़ालिब

हवस को है निशात-ए कार कया कया, न हो मरना तो जीने का मज़ा कया !!(Ghalib) ------- ہوس کو ہے نشاطِ کار کیا کیا نہ ہو مرنا تو جینے کا مزا کیا -------- havas ko hai nishaa:t-e kaar kyaa kyaa nah ho marnaa to jiine kaa mazaa kyaa.(ghalib) Translation Eagerness has different var



ग़ालिब

ग़ालिब को वो क्या समझेंगे जो ना समझे औकात अपनी, इल्मे अदब से नावाफिक़ ज़ाहिलीयत के ये ज़मीरफ़रोशी. (आलिम)



कुछ तो लोग कहेंगे

जब किसी को अपने में कोई खूबी नज़र नहीं आती तब वो दुसरो में बुराई खोजता है. ऐसे लोगो की जिंदगी दुसरो में बुराई ढूंढ़ने और बुराई करने में ही गुज़र जाती है, और एक रोज़ जब वो दुनिया छोड़ देते है तो लोग भी उसको याद करना छोड़ देते है. रहीम ने कहा है " बुर



मिर्ज़ा ग़ालिब

आज गूगल के सर्च-इंजिन पर महान शायर मिर्जा “ग़ालिब” को विशेष रूप से सम्मानित करने के लिए उनके 220वें जन्म-दिवस(27दिसम्बर) पर ‘डूडल’ बनाकर प्रदर्शितकिया है । मिर्ज़ा असद -उल्लाह बेग ख़ां उर्फ“ग़ालिब” (27 दि





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