आत्मतत्त्व से ही समस्त चराचर की सत्ता

आत्मतत्व से ही समस्त चराचर की सत्ताप्रायःसभी दर्शनों की मान्यता है कि जितना भी चराचर जगत है, जितना भी दृश्यमान जगत है – पञ्चभूतात्मिका प्रकृति है –उस समस्त का आधार जीवात्मा – आत्मतत्त्व ही है | वही परम तत्त्व है और उसी कीप्राप्ति मानव जीवन का चरम लक्ष्य है | किन्तु यहाँ प्रश्नउत्पन्न होता है कि आत्म



गीता और देहान्तरप्राप्ति

गीता औरदेहान्तरप्राप्तिश्राद्ध पक्ष में श्रद्धा के प्रतीक श्राद्ध पर्व काआयोजन प्रायः हर हिन्दू परिवार में होता है | पितृविसर्जनीअमावस्या के साथ इसका समापन होता है और तभी से माँ दुर्गा की उपासना के साथ त्यौहारोंकी श्रृंखला आरम्भ हो जाती है – नवरात्र पर्व, विजयादशमी,शरद पूर्णिमा आदि करते करते माँ लक्



गीता और जैन दर्शन

पर्यूषण पर्व चल रहे हैं, और आज भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण की परा शक्ति श्री राधा जी का जन्मदिवस राधा अष्टमी भी है – सर्वप्रथम सभी को श्री राधाअष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...गीता गायक भगवान श्री कृष्ण... पर्यूषण पर्व के



धार्मिक विश्वास और त्याग भावना

धार्मिक विश्वास और त्याग भावना हम प्रायः दो शब्द साथ साथ सुनते हैं– संस्कृति और धर्म | संस्कृति अपने सामान्य अर्थ में एक व्यवस्था का मार्ग है, औरधर्म इस मार्ग का पथ प्रदर्शक, प्रकाश नियामक एवं समन्वयकारी सिद्धान्त है | अतःधर्म वह प्रयोग है जिसके द्वारा संस्कृति को जाना जा सकता है | भारत में आदिकाल स



अध्यात्म

अध्यात्मपरक मन:चिकित्सामनःचिकित्सक अनेक बार अपने रोगियों के साथ सम्मोहन आदि कीक्रिया करते हैं | भगवान को भी अपने एक मरीज़ अर्जुन के मन का विभ्रम दूर करकेउन्हें युद्ध के लिये प्रेरित करना था | अतः जब जब अर्जुन भ्रमित होते – उनके मनमें कोई शंका उत्पन्न होती – भगवान कोई न कोई झटका उन्हें दे देते | यही क



अध्यात्म और मनश्चिकित्सा

अध्यात्म और मनश्चिकित्साअर्जुन ने जब दोनों सेनाओं में अपने ही प्रियजनों को आमनेसामने खड़े देखा तो उनकी मृत्यु से भयाक्रान्त हो श्री कृष्ण की शरण पहुँचे “शिष्यस्तेऽहंशाधि मां त्वां प्रपन्नम् |” तब भगवान ने सर्वप्रथम एक कुशल वैद्य औरमनोवैज्ञानिक की भाँति उनके मन से मृत्यु का भय दूर किया | मृत्यु को अवश



कर्मयोग - कर्म के लिए कर्म

गीता– कर्मयोग अर्थात कर्म के लिए कर्म “गीता जैसा ग्रन्थ किसी को भी केवलमोक्ष की ही ओर कैसे ले जा सकता है ? आख़िर अर्जुन को युद्ध के लिये तैयार करनेवाली वाली गीता केवल मोक्ष की बात कैसे कर सकती है ? वास्तव में मूल गीता निवृत्तिप्रधान नहीं है | वह तो कर्म प्रधान है | गीता चिन्तन उन लोगों के लिये नहीं ह



राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर)

..... इंसानियत ही सबसे पहले धर्म है, इसके बाद ही पन्ना खोलो गीता और कुरान का......"जय हिन्द"



चातुर्मास्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में समय-समय पर विभिन्न व्रत उपवास एवं त्योहारों का पर्व मनाने की परंपरा रही है | प्रत्येक व्रत / पर्व के पीछे एक वैज्ञानिक मान्यता सनातन धर्म में देखने को मिलती है | आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है | इसका बहुत ही



2019 के चुनाव अभियान में मर्यादाएं तार तार

2019 के इलेक्शन संपन्न हुए-गणतांत्रिक प्रक्रियाका एक मील का पत्थर. सारी गहमा-गहमी, उत्तेजना, भाषण, सभाएं इत्यादि कीअभी के लिए तो इति हुई.परन्तु गणतंत्र में चुनाव तो आम बात है और फिरचुनाव होंगे और होते रहेंगे. सभी (आम नागरिक) इस बात से सहमत होंगे किप्रतिस्पर्धता जो गणतंत्र में एक स्वस्थ घटना होनी चाह



"छंद मुक्त गीतात्मक काव्य" जी करता है जाकर जी लू बोल सखी क्या यह विष पी लू

"छंद मुक्त गीतात्मक काव्य"जी करता है जाकर जी लूबोल सखी क्या यह विष पी लूहोठ गुलाबी अपना सी लूताल तलैया झील विहारकिस्मत का है घर परिवारसाजन से रूठा संवादआतंक अत्याचार व्यविचारहंस ढो रहा अपना भारकैसा- कैसा जग व्यवहारजी करता है जाकर जी लूबोल सखी क्या यह विष पी लूहोठ गुलाबी अपना सी लू।।सूखी खेती डूबे बा



जो काम भारत मे होना चाहिए था वो काम एक अरब देश ने कर दिखाया

हमारे देश में जब योग और वंदेमातरम जैसी चीज़ों को कट्टरपंथी धर्म के चश्मे से देखते हैं भला ऐसे में भारत मे श्रीमद्भागवत गीता को स्कूल में पढ़ाया जाना संभव कैसे हो सकता है। लेकिन एक अरब देश ऐसा भी है, जिसने श्रीमद्भागवत गीता को एक विषय के रूप में कॉलेज में पढ़ाना शुरू भी कर



हमारा गोरखपुर - Gorakhpur City

गोरखपुर district - Gorakhpur News - गीता प्रेस- गोरखनाथ मंदिरगोरखपुरगोरखपुर, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में राप्ती नदी के किनारे स्थित एक शहर है | गोरखपुर को पूर्वांचल की राजधानी कहा जाता है। यह नेपाल सीमा के पास स्थित है, राज्य की राजधानी लखनऊ के 273 किलोमीटर पूर्व में। 2011 क



कोठापल्ली गीता ने जन जागृति पार्टी की घोषणा की

अराकू के एमपीकोठापल्ली गीता नेशुक्रवार को नईक्षेत्रीय पार्टी लांच की | उन्होंने पार्टी के लोगो और झंडेका भी लांच किया और उन्होंने यह भी दावा किया कि यहमहिलाओं और उपेक्षितवर्गों का प्रतिनिधित्वकरेगा।गीता ने नईराजनीतिक पार्टी के लॉन्



अर्जुन का अहंकार

अर्जुन का महाभारत के युद्ध के समय, युद्ध ना करने का निर्णय अर्जुन का अहंकार था. ज्यादातर लोग उसके इस निर्णय का कारण मोह मानते है, परन्तु भगवान् कृष्ण इसे उसका अहंकार मानते है. जिस युद्ध का निर्णय लिया जा चूका है, उस युद्ध को अब



दिल और दिमाग

दिल और दिमाग की जंग में दिल का साथ देना चाहिए, शायद ज्यादातर लोग इससे सहमत होंगे, किन्तु गीता में इसके विपरीत ही कहा गया है. जब व्यक्ति दिल से सोचता है तो उसमे मोह होता है, अपने और अपनों के प्रति , वो मोह ही मनुष्य को धर्म के



कर्म और त्याग

सनातन धर्म में कर्म और धर्म दोनों की ही व्याख्या की गई है , पर तथाकथित हिन्दू इन दोनों ही शब्दों का अर्थ अपनी सुविधा के अनुकूल प्रयोग करते रहे है. सनातन धर्म की सुंदरता इसमें है कि उसमे सभी विचार समा जाते है. यही कारण है कि लोग



पूजा का सच्चा अर्थ

पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट द



कोई लड़की मुझे कल रात सपने में मिली (Koi Ladki Mujhe Kal Raat Sapne Mein Mili )- सीता और गीता

Koi Ladki Mujhe Kal Raat Sapne Mein Mili Lyrics from the movie Seeta Aur Geeta is sung by Asha Bhosle and Kishore Kumar, its music is composed by R D Burman and lyrics are written by Anand Bakshi.सीता और गीता (Seeta Aur Geeta )कोई लड़की मुझे कल रात सपने में मिली (Koi Ladki Mujhe Kal Raat Sapne Mein



ज़िन्दगी है खेल कोई पास कोई फाइल (Zindagi Hai Khel Koi Paas Koi Fail )- सीता और गीता

Zindagi Hai Khel Koi Paas Koi Fail Lyrics of Seeta Aur Geeta (1972): This is a lovely song from Seeta Aur Geeta starring Dharmendra, Hema Malini, Sanjeev Kumar and Asrani. It is sung by Manna Dey and Asha Bhosle and composed by R D Burman.सीता और गीता (Seeta Aur Geeta )ज़िन्दगी है खेल कोई पास कोई फाइ



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