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बाग बगीचे याद आए तो सही।

चलो बाग याद आये तो सही जलियावाला बाग के बाद से अब जुबा पर फिर से बाग निकलने लगे है। पेड़ पौधों के न सही महिला पुरषो के झुंड ही सही खुशबू न सही बेरोजगारी की मांग ही सही। पहले इंसान के बगीचे में फल फूल दिखाई देता था। अब होनहार युवा मासूम बचपन दिखाई देता है। पहले का इंसान



भविष्य की आवाज।

भविष्य की आवाज।जुबा चुप ही सही सत्य बोलताहैं, गरीब ही अमीरी को जानता हैं।लम्हे कितने भी दुख भरे होजीवन की राह मे, चलते रहो मंजिल की तरफ। जिसे मजदूर अपनी जरूरत समझताहैं, अमीर उसे अपना सौक समझता हैं।मोटा दाना खाने वाले को दिमागसे मोटा कहते हैं,चना खाकर घोड़ा दौड़ता हैं।मक



क्या आप जानते हैं ???

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