अभिनेता नसीरूद्दीन शाह अपने देश में डरे हुये हैं

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने देश में डरे हुए हैं ?डॉ शोभा भारद्वाज वह आज के भारत में अपने बच्चों को लेकर बहुत डरे हुए हैं. ''मुझे इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरेबच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. क्योंकि मैंने मेरेअनुसार अ



"गीतिका" अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जाना घुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जाना

मापनी-1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका"अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको सनम खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया नजर इकरार हो जाना



द एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर

द एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर ? डॉ शोभा भारद्वाज डॉ मनमोहन सिंह जी परबनी फिल्म एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर का टेलर रिलीज किया गया है विवाद होनास्वाभाविक है डॉ मनमोहन सिंह की छवि एक ईमानदार व्यक्ति की रही रही है उनकी ईमानदारी पर किसी को शक नहीं है लेकिन आलोचक एवं विपक्ष उनकेकाल को घोटालों का काल



स्वतंत्रता के 70 सालों के पश्चात भी क्या यही ‘‘परिपक्व’’ लोकतंत्र है?

पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आ गये हैं। चुनाव पूर्व का ‘‘ओपीनियन पोल’’ तुरन्त चुनाव बाद का ‘‘एक्जिट पोल’’ व अब ‘‘वास्तविक परिणाम’’ आपके सामने है। मैं यहाँ पर परिणामों का विश्लेषण नहीं कर रहा हूूंँ। ये सब ‘‘पोल’’ अनुमान के कितने नजदीक थे, सही थे, या आश्चर्य जनक थे, इस संबंध में भी कोई विशेष मूर्धन्य़



स्वतंत्रता के 70 सालों के पश्चात भी क्या यही ‘‘परिपक्व’’ लोकतंत्र है?

पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आ गये हैं। चुनाव पूर्व का ‘‘ओपीनियन पोल’’ तुरन्त चुनाव बाद का ‘‘एक्जिट पोल’’ व अब ‘‘वास्तविक परिणाम’’ आपके सामने है। मैं यहाँ पर पर



"गज़ल" अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है

वज़्न - 1222 1222 122 , अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़, काफ़िया - डूबता(आ स्वर) रदीफ़- है"गज़ल"अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है कभी खाते कदम बल चल जमीं परहक़ीकत से हुआ जब फासला है।।उठाकर पाँव चलती है गरजबहुत जाना पिछाना फैसला ह



"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरण है अटल सच दिनकर किरण

शीर्षक- जीवन, मरण ,मोक्ष ,अटल और सत्य"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरणहै अटल सच दिनकर किरणमाया भरम तारक मरणवन घूमता स्वर्णिम हिरणमातु सीता का हरणक्या देख पाया राम नेजिसके लिए जीवन लियादर-बदर नित भ्रमणन कियाचोला बदलता रह गयाक्या रोक पाया चाँद नेउस चाँदनी का पथ छरणऋतु साथ आती पतझड़ीफिर शाख पर किसकी कड़ी



तुम्हें बच्चों की, याद नहीं आती है ,

वृद्ध दंपति द्वारा आत्महत्या... दुर्भाग्यपूर्ण घटना –हल्द्वानी...2018…( भाव= काल्पनिक )जैसे-जैसे आज शाम ढलने लगी, रोज़ की तरह दीपक की, लौजलने लगी,पत्नी की एकटक आँखें, डब- डबा रही थी,घर की एक-एक चीज़, आँखों में उतर-आ रही थी, दोनों नेमिलकर जाने कैसा , अभागा निर्णयले लिया,



कवि सम्मेलन

कवि सम्मेलन जयंत में



हाइजेेनिक आदतें

हाईजेनिक आदतें आजकल कई तरह की बीमारियों ने लोगों को घेरा हुआ है जो गंभीर समस्या की तरह है । पुराने जमाने में लोग बहुत सी हाईजेनिक आदतें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाते थे जिससे उन्हे बीमारियां कम लगती थी, लोग स्वस्थ रहते थे। आज कल के लोगों की तरह बहुत सी बीमारी उन्हे नहीं घेरे रहती थी। हमारे गांव



"गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलो वक्त का वक्त है पल निभाएँ चलो

मापनी--212 212 212 212, समान्त— बसाएँ (आएँ स्वर) पदांत --- चलो "गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलोवक्त का वक्त है पल निभाएँ चलोक्या पता आप को आदमी कब मिलेलो मिला आन दिन खिलखिलाएँ चलो।।जा रहे आज चौकठ औ घर छोड़ क्योंखोल खिड़की परत गुनगुनाएँ चलो।।शख्स वो मुड़ रहा देखता द्वार कोगाँव छूटा कहाँ पुर बसाएँ



"छंद मुक्त गीतात्मक काव्य" जी करता है जाकर जी लू बोल सखी क्या यह विष पी लू

"छंद मुक्त गीतात्मक काव्य"जी करता है जाकर जी लूबोल सखी क्या यह विष पी लूहोठ गुलाबी अपना सी लूताल तलैया झील विहारकिस्मत का है घर परिवारसाजन से रूठा संवादआतंक अत्याचार व्यविचारहंस ढो रहा अपना भारकैसा- कैसा जग व्यवहारजी करता है जाकर जी लूबोल सखी क्या यह विष पी लूहोठ गुलाबी अपना सी लू।।सूखी खेती डूबे बा



अपनी दिशा से भटक रहा युवा

आज भारत देश में करोड़ो की सख्यां में युवा बेरोजगार है और दिशा विहीन हो कर भटक रहा है 1 इसके पीछे मै कई कारन मन रहा हूँ 1 अगर में उत्तर भारत की बात करूं जहां से मैं सम्बन्ध रखता हु तो मुझे ये ज्ञात होता है की दो और तीन कारन ही मुख्यत:



19 नवम्बर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस और भारत

19 नवम्बर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस ‘भारत में’ ? डॉ शोभा भारद्वाज 19 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने का चलन 1960 से चल रहा है | पुरूष दिवस की विशेष रूप से शुरुआत त्रिनिदाद एवं टोबागो में की गयी थी अब यह 70 देशों में मनाया जाता है भारत में भी 19 नवम्बर 2007 के दिन सेव इंडियन



"गीतिका" उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है

, आधार छंद--विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत - आस, पदांत - होता है"गीतिका"उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता हैहवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता हैजहाँ भी आँधियाँ आती उड़ा जाती ठिकाने कोबता दौलत हुई किसकी फकत विश्वास होता है।।बहुत चिंघाड़ता है चमकता है औ गरजता घनबिना मौसम बरसता है छलक चौमास होता



"गज़ल" कहो जी आप से क्या वास्ता है सुनाओ क्या हुआ कुछ हादसा है

वज़्न-- 1222 1222 122 अर्कान-- मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन, क़ाफ़िया— वास्ता (आ स्वर की बंदिश) रदीफ़ - है"गज़ल" कहो जी आप से क्या वास्ता हैसुनाओ क्या हुआ कुछ हादसा हैसमझ लेकर बता देना मुझे भीहुआ क्या बंद प्रचलित रास्ता है।।चले जा चुप भली चलती डगर येमना लेना नयन दिग फरिश्ता है



"गीतिका" याद कर सब पुकार करते हैं जान कर कह दुलार करते है

मापनी, 2122 1212 22/112, समान्त- आर, पदांत- करते हैं"गीतिका" याद कर सब पुकार करते हैंजान कर कह दुलार करते है देखकर याद फ़िकर को आयीदूर रहकर फुहार करते है ।।गैर होकर दरद दिया होगा ख़ास बनकर सवार करते हैं।।मानते भी रहे जिगर अपनाधैर्य निस्बत निहार करते है।।लौट आने लगी हँसी मुँहपरमौन महफ़िल शुमार करते हैं।



प्यार क्या है?

प्यार दो दिलो के बीचका एक गहरा स्नेह है। जो किसी दूसरी चिजो मे ना मिले वो सुखद एहसास है। गंगा की तरह पवित्र, यमुना की तरह सुंदर और हिमालय की तरह विशाल है, जिसे तोड़ना साधारण मानव के बस की बात नही। कुदरत का दिया हुआ वोतोहफा है जिसमे खुदा



सफर जारी है



"गीतिका" उग आई ऋतु है चाहत की मत लाना दिल में शामत की

मापनी- 22 22 22 22, समान्त- अत, पदांत- की"गीतिका"उग आई ऋतु है चाहत कीमत लाना दिल में शामत कीदेखो कितनी सुंदर गलियाँ खुश्बू देती हैं राहत की।। जब कोई लगता दीवाना तब मन होता है बसाहत की।।दो दिल का मिलना खेल नहींपढ़ना लिखना है कहावत की।।माना की दिल तो मजनू हैपर मत चल डगर गुनाहत की।।देखो कलियाँ चंचल ह



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