हकीकत

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jindgi ki hakikat

Jindagi ki hakikatप्रिय स्नेही मित्रों जय श्रीकृष्णा *जिंदगी की हकीकत एक प्रेरक प्रसंग = एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान**एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि* *- आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है तो आप क्या करोगे ?* *य



सपने की हकीकत

कल रात को मैंने एक सपना देखा भीड़ भरे बाज़ार में नहीं कोई अपना देखा मैंने देखा एक घर की छत के नीचे कितनी अशांति कितना दुख और कितनी सोच मैंने देखा चेहरे पे चेहरा लगाते हैं लोग ऊपर से हँसते पर अंदर से रोते हैं लोग भूख, लाचारी, बीमारी, बेकारी यही विषय है बात का आँख खुली तो देखा यह सत्य है सपना नहीं रात



दास्तां हकीकत की

बयाँ मैं ये हकीकत कर रहा हूँ मैं धीरे धीरे हर पल मर रहा हूँ तुझे कमियाँ नज़र आतीं हैं मुझमें मुझे लगता है मैं बेहतर रहा हूँ ख़ुदा जाने मिलेंगी मंजिलें कब मैं ख़ुद में हौसला तो भर रहा हूँ नहीं अब ज़िन्दगी से कोई निस्बत मैं आती मौत से भी डर रहा हूँ ये बुत अब भी गवाही दे रहे हैं मैं अपने वक़्त का आ



कर चले हम फिदा जान-ो-तन साथियों - हकीकत

Lyrics of Kar Chale Hum Fida Jaan-o-tan Saathiyon from Haqeeqat: This is a very well sung song by Mohammad Rafi with nicely composed music by Madan Mohan. Kar Chale Hum Fida Jaan-o-tan Saathiyon lyrics are beautifully penned by Kaifi Azmi.हकीकत (Haqeeqat )कर चले हम फिदा जानोतन साथियों की लिरिक्स (



हकीकत (Haqeeqat )

'हकीकत' 1 9 64 की हिंदी फिल्म है जिसमें धर्मेंद्र, प्रिया राजवंश, विजय आनंद, बलराज साहनी, जयंत, गुलाब, सुधीर, संजय, इंद्रानी मुखर्जी और सुधीर प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास एक गीत गीत और हकीकत का एक वीडियो गीत है। मदन मोहन ने अपना संगीत बना लिया है। मोहम्मद रफी ने इन गीतों को गाया है जबकि कैफी



कबीर की ‘खुरपी’

आंखों देखी ‘हकीकत’ का मुगालता,सबको है, इसलिए झूठ हकीकत है।पाखंड है वजूद की जमीन की फसल,जमींदार होने का मिजाज सबमें है।खुदी की जात से कोई वास्ता ही नहीं,मसलों पे दखल की जिद मगर सबको है।अंधेरे में कुछ नहीं बस भूत दिखता है,टटोलकर खुदा देख पाने की आदत है।अपना वजूद ही टुकड़ों में तकसीम है,सच को बांटने की



आज हकीकत के लिए जागना होगा

शून्य में कौन मुझसे कह रहा क्या कह रहा ...कुछ सुनाई नहीं देता !सन्नाटों की अभेद दीवारें पारदर्शी तो है इक साया सा दिखता भी है कभी कुछ कहता कभी चीखता सा ...पर क्या कह रहा है कैसे जानूँ !सुनने से पहले देखना चाहती हूँ साया है किसका चेहरे की असलियत मिल जाए तो जानूँ यह विश्वास दे रहा है या चेतावनी !समय क





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