हंसी

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24 जनवरी 2019

हर दिन समय निकलना, वो करने के लिए जिससे आपको प्यार हैं।

हमारे दिन अक्सर उन चीज़ों से भरे होते हैं जो हमें करने पड़ते हैं, और हम जो कुछ करते हैं उससे तनाव और थकावट से खुद को तसल्ली देते हैं… इसलिए हम जो करना चाहते हैं उसे खत्म कर देते हैं।उस बारे में एक सेकंड के लिए सोचें: हमारे दिन चीजों से भरे होते हैं, और आराम करने वाले सामान होते हैं। उन चीजों के लिए



इन तस्वीरों को देखने के बाद हंसते हंसते पेट में दर्द हो सकता है नंबर 9 सबसे अच्छी है

आज हम आपके लिए कुछ ऐसी तस्वीरें लेकर आए हैं, जिन्हें देखने के बाद आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।वाह क्या नजारा है ऐसा फोटोग्राफर आपने पहले कभी नहीं देखा होगा। अपने काम के प्रति इतना समर्पण मैंने आज से पहले कभी नहीं देखा।Third party image referenceकौन कहता है लड़कियां किसी से कम है जिन्हें कोई शक हो ज



हास्य.......

हास्य , जीवन की एक पूंजी......, कुदरत की सबसे बडी नेमत हैं हंसी... , ईश्वरीय प्रदत वरदान है हंसी ..., मानव मे समभाव रखती हैं हंसी..., जिन्दगी को पूरा स्वाद देती हैं हंसी......, बिना माल के मालामाल करने वाली पूूंजीहै हंसी...., मायूसी छायी जीवन मे जादू सा काम करती



तब याद आता है बचपन!

यादों के भंवर से ,पीछे मुड़ कर देखते हूँ तब याद आता है बचपन,रोजमर्रा ज़िन्दगी से जब ऊब जाती हूँ, तब मुस्कराता है बचपन,स्वछंद हंसी देखती हूँ,तो नटखट ढंग से लजाता है बचपन,चॉकलेट और टॉफ़ी देखती हूँतो मनचले सा मचल जाता है बचपनबस्ता टाँगे, कॉपी लिए किसी बच्चे को जाते देखते हूँ,तब याद आता हैं बचपन,खेल-खिलौन



19 सितम्बर 2015

तब याद आता है बचपन!

यादों के भंवर से ,पीछे मुड़ कर देखते हूँ,तब याद आता है बचपन,बस्ता टाँगे, कॉपी लिए किसी बच्चे को स्कूल जाते देखते हूँ,तब दोस्तों संग स्कूल जाने के लिए आतुर हो जाता हैं बचपन,रोजमर्रा ज़िन्दगी से जब ऊब जाती हूँ, तब मुस्कराता है बचपन,स्वछंद हंसी देखती हूँ,तो नटखट ढंग से लजाता है बचपन,चॉकलेट और टॉफ़ी देखती



18 सितम्बर 2015

हंसी की खुराक!

यूँ तो ज़िन्दगी चल रही हैं, अपनी गति से, पर हंसी की खुराक भी होनी चाहिए,परेशानियों से, ज़िन्दगी की आपाधापी से लड़ने के लिए,इक दवा तो होनी चाहिए । पैसों जुटाने की जदोजहद में लगे है सभी,लब्ज़ों को मुस्कराने की वजह तो होनी चाहिए,ज़िन्दगी में आंसू कम नहीं हैं,खिलखिलाने की खता तो होनी चाहिए।



मच्छर चालीसा!

ओम जय! मच्छर देवा,स्वामी जय! मच्छर देवा,रात को सोने ना दो तुम,काट-काट करते हो बेहाल तुम,खून पियों सबका,ओम जय! मच्छर देवा!मलेरिया एवं डेंगू के तुम हो दाता,किसी का निद्रा-सुख तुम्हे ना भाता,राग सुनाते हो ऐसा,ओम जय! मच्छर देवा!





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