16 जनवरी 2019

एक भिक्षु के रूप में शांत: कैसे उपेक्षा आपके विवेक को बचा सकती है। 

जो लोग नहीं जानते हैं, उनके लिए उपेक्षा या "समरूपता" मूल रूप से बौद्ध धर्म में चार "उदात्त दृष्टिकोण" में से एक हैं - जिन्हें "फोर इमैसुलेबल्स", या "चार उदात्त दृष्टिकोण" कहा जाता है। करुणा, प्यार, दयालुता, और सहानुभूति से खुशी।इसमें मैं हमेशा सफल नहीं होता (मुझे गुस्सा आता है या हर किसी की तरह चिढ़



"छंद दुर्मिल सवैया" चित भावत नाहिं दुवार सखी प्रिय साजन छोड़ गए बखरी। अकुलात जिया मन लागत का छड़ राजन काहुँ गए बहरी।

दुर्मिल सवैया ( वर्णिक )शिल्प - आठ सगण, सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा 112 112 112 112 112 112 112 112, दुर्मिल सवैया छंद लघु से शुरू होता है ।छंद मे चारों पंक्तियों में तुकांत होता है"छंद दुर्मिल सवैया" चित भावत नाहिं दुवार सखी प्रिय साजन छोड़ गए बखरी।अकुलात



सफर

आज मन की हलचलों ने कदमों को चलने न दिया।बहुत सोचा जाऊं या ना जाऊ । घर दूर, अपने आंखों से दूर, मौसम भी मगरूर ठंडी का है।सफर सहर में है। शाम की बातों ने मन को बोझिल कर दिया था।सब हलचलों और बोझिल शाम को समेट अपनी चारपाई पर तकिए के नीचे दबा लिया था। ठंडी की सिहरन



साधना - - दिनचर्या के कार्यों के साथ - साथ

^^^^^ साधना - - दिनचर्या के कार्यों के साथ - साथ ^^^^^ ()साधना, जिसके लिए अलग समय देने की आवश्यकता नहीं;ऐसी साधना की बात करें। साधना, जो दिन प्रतिदिन के कार्यों को करते हुए की जा सके;ऐसी साधना की बात करें।। स्वयं से जुड़े रहना;होश में बने रहना;बड़ी उपलब्धियां हैं;उन्हे



फेरों के बाद सिंदूरदान की रस्म के लिए दुल्हन ने किया इंकार ,वजह जान रह जायेंगे दंग

आजकल शादियों का सीजन चल रहा है। और किसी भी शादी में छोटी-मोटी भूल-चूक, नाराज़गी होना तो आम बात है। लेकिन जब इन छोटे छोटे बातों का लोग मुद्दा बना देते हैं तो शादी के रंग में भंग पड़ते देर नहीं लगती। जिसके चलते कभी कभी नौबत शादी टूटने तक भी आ जाती है। आपने शादी टूटने के कई कि



प्रकृति और हम - ( वयस्कों केलिए )

* प्रकृति और हम *(( वयस्कों केलिए गहरा सन्देश लिए ))जब एक पेड़ बीमार होता है, तो क्या करते हैं ??यदि पेड़ प्रिय है, तो उपाय करते हैं;क्या फिर, उसके तने, डालियों, पत्तों का इलाज करते हैं ??या, उसकी जड़ों पर काम करते हैं;चलो इसकी बात करते हैं, इस दिशा में कार्य करते



"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसान बरगद पीपल खलिहानों में, गाते साँझ बिहान......लहराती फसलें .....

आधार छंद - सरसी (अर्द्ध सम मात्रिक) शिल्प विधान सरसी छंद- चौपाई + दोहे का सम चरण मिलकर बनता है। मात्रिक भार- 16, 11 = 27 चौपाई के आरम्भ में द्विकल+त्रिकल +त्रिकल वर्जित है। अंत में गुरु /वाचिक अनिवार्य। दोहे के सम चरणान्त में 21 अनिवार्य है"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसानबरगद पीपल खलिहा



करण जौहर पर अनुष्का शर्मा का गंभीर आरोप कहा – शूटिंग के दौरान मेरे साथ करण जौहर ने…

#MeeToo ने बॉलीवुड की दुनिया में इन दिनों तहलका मचा रखा है।आये दिन बॉलीवुड हस्तियों से जुड़े तमाम खुलासे सामने आ रहे हैं, ऐसा माना गया है कि बॉलीवुड और विवाद हमेशा से ही एक दुसरे के पूरक रहे हैं। इस जगमगाती दुनिया में आये दिन नए-नए खुलासे और विवाद सामने आते रहते हैं। लेकिन, इस वक्त इस जगमगाती दुनिया



कोशिश करने वालों की हार नहीं होती - सोहनलाल द्विवेदी

Hindi poem - koshish karne walon ki लहरों से डर कर नौका पार नहीं होतीकोशिश करने वालों की हार नहीं होतीनन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती हैचढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती हैमन का विश्वास रगों में साहस भरता हैचढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता हैआख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होतीकोशिश करने वालों की हार नहीं



कर्तव्य- नैतिकता के बीच जिम्मेदार कौन?

अमृतसर हादसा: पंजाब के अमृतसर में दशहरे पर बड़ा हादसा हो गया. रावण दहन के दौरान मची भगदड़ के कारण 61 लोग ट्रेन से कट गए. वे रेल की पटरी पर थे और रेल इतनी रफ्तार में आई कि वे संभल भी नहींसके. घटना में 150 से ज्यादा लोग घायल हैं. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटरी के करीब 20



विजयादशमी दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ

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चपैय्या छंद, हे माँ जग जननी, तुम्हरी अवनी, नाम रूप जगदंबा। शक्ति पीठ बावन, अतिशय पावन, नमन करूँ माँ अंबा।।

जय नव दुर्गा ^^ जय - जय माँ आदि शक्ति - छंद, शिल्प विधान, 10, 8, 12 मात्रा पर यति, प्रथम दो यति पर सम तुकांत, व प्रथम द्वितीय चरण का सम तुकांत....... ॐ जय माँ शारदा.......!शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ जगत जननी नवदुर्गा के 51 शक्तिपीठ को नमन करते हुए आप सभी को हार्दिक बधाई, ॐ जय माता दी!"चवपैय



गणपति बप्पा मोरया

गणपति बप्पा मोरया डॉ शोभा भारद्वाज श्रीगणेश की पौराणिक जन्म कथा के अनुसार पार्वती जी स्नान करने जा रहीं थीं उन्होंने अपने बदन से उतरे उबटन से गणेश जी कीमूर्ति बनाई उनकी प्राण प्रतिष्ठा कर उन्हें आदेश दिया जब तक वह स्नान कर रहीं है किसीको अंदर आने न दिया जाये| समय से पूर्व शिव जी



"कुंडलिया" खेती हरियाली भली, भली सुसज्जित नार।

"कुंडलिया"खेती हरियाली भली, भली सुसज्जित नार।दोनों से जीवन हरा, भरा सकल संसार।।भरा सकल संसार, वक्त की है बलिहारी।गुण कारी विज्ञान, नारि है सबपर भारी।।कह गौतम कविराय, जगत को वारिस देती।चुल्हा चौकी जाँत, आज ट्रैक्टर की खेती।।-1होकर के स्वछंद उड़े, विहग खुले आकाश।एक साथ का है सफर, सुंदर पथिक प्रकाश।।सुं



‘‘सरकारें ’’ देशहित में ‘‘जुमलों’’ से कब बाहर आयेगीं?

यद्यपि हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने का दावा करते हैं, और हैं भी। तथापि जनता लोकशाही से, लोकतांत्रिक तरीके से लोकतांत्रिक मूल्यो के आधार पर देश चलाने की अपेक्षा करती है। लेकिन पिछले कई दशकांे से हमारे देश में लोकतंत्र के नाम पर ‘‘जुमले बाजी’’ ही चल रही है। एक ‘जुमले’ मात्र से कई बार सरका



हरियाणा और जम्मू- कश्मीर में भूकंप के तेज झटके

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में बुधवार को सुबहभूकंप के तेजझटके महसूस किये गए | पहले जम्मू- कश्मीर में 5:15 am पर भूकंपआया | रिचटर स्केल पर जिसकी तीव्रता4.6 थी | भारतमौसम विज्ञान विभागके अनुसार, भूकंपकी 35.6 एन अक्षांश,76.3 ई रेखांश



हरतालिका तीज और वाराह जयन्ती

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हरतालिका व्रत – तीज का महत्व

तीज का त्यौहार हिन्दुओ का एक पवित्र त्यौहार व पर्व है, इसको हरतालिका व्रत, तीजा या तीजा के नाम से भी जाना जाता हैं|तीज फेस्टिवल के व्रत को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन मनाया जाता है| इस दिन स्त्रियाँ (कुवारी और सौभाग्यवती) भगवन गौरी-शंकर जी की पूजा करती हैं| हरितालिका त



पूर्वांचल की राजधानी - गोरखपुर

गोरखपुर, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में राप्ती नदी के किनारे स्थित एक शहर है | गोरखपुर को पूर्वांचल की राजधानी कहा जाता है। यह नेपाल सीमा के पास स्थित है, राज्य की राजधानी लखनऊ के 273 किलोमीटर पूर्व में। 2011 की जनगणना के अनुसार गोरखपुर की कुल आबादी ६,७३,४४६ है |न्त गोरखनाथ जो



12 सितंबर को हरतालिका तीज, जानिए पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त

अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला व्रत हरितालिका तीज 12 सितंबर को है। भाद्र शुक्ल तृतीया बुधा के चित्रा नक्षत्र को तीज व्रत रखा जाता है, जिसमें महिलाएं पतियों के सुख- सौभाग्य, निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं। आचार्य राजनाथ झा बताते हैं कि इस बार सुबह से ही यह



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