मैंने देखा था एक सपना



मरा जा रहा हूँ

""""" """""मरा जा रहा हूँ (हास्य)""""" """' ************************* प्रिय मुझसे तेरा यूँ मुंह का फुलाना, नखरे दिखाना यूँ रूठ के सो जाना, गजब ढा रहा है, गजब ढा रहा है। न हँसना तनिक भी न सजना सवरना, न आँखें दिखाना न लड़ना झगड़ना, गजब ढा रहा है, गजब ढा रहा है। ओ तिरछी नजर से न मुझको रिझाना, न कसमों



हृदय दान

हृदय दान पर बड़े हल्के फुल्के अन्दाज में लिखी गयी ये हास्य कविता है। यहाँ पर एक कायर व्यक्ति अपने हृदय का दान करने से डरता है और वो बड़े हस्यदपक तरीके से अपने हृदय दान नहीं करने की वजह बताता है। हृदय दान के पक्ष में नेता,बाँट रहे थे ज्ञा



गुदगुदी

पति: अर्ज़ किया है कि जग घूमिया थारे जैसा ना कोई जग घूमिया थारे जैसा ना कोई!पत्नी: घर की साफ सफाई में हाथ बटाओ वरना दिमाग घूमिया तो म्हारे जैसा ना कोई!आमतौर पर लड़कियों की शादी में हर चीज़ उनकी पसंद की दिलवाई जाती है!सिवाये दूल्हे के!जब आधार कार्ड इतना इम्पोर्टेन्ट है, हर जगह लगता है तो, अपनी मनपसंद की



वकील

जो कर न सके कोई वो काम कर जाएगा,ये वकील दुनिया में नाम कर जाएगा।फेकेगा दाना , फैलाएगा जाल,सोचे कि करे कैसे मुर्गे हलाल।आये समझ में ना , शकुनी को जो भी,चाल शतरंजी तमाम चल जायेगा .ये वकील दुनिया में नाम कर जायेगा।चक्कर कटवाएगा धंधे के नाम पे,सालो लगवाएगा महीनों के काम पे।ना



प्रतिभाशाली गधे

आज दिल्ली में गर्मी आपने उफान पे थी। अपनी गाड़ी की सर्विस कराने के लिए मै ओखला सर्विस सेंटर गया था। गाड़ी छोड़ने के बाद वहां से लौटने के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढने लगा। थोड़ी ही देर में एक ऑटो रिक्शा वाला मिल गया। मैंने उसे बदरपुर चलने को कहा। उसने कहा ठीक है साब कितना दे दो



रिश्ता पक्का है नाटिका

पात्र – परिचय लड़का --- दिनेश (ऑफिसमें अकाउंटेंट)लडके का पिता श्री सतीश बहल -- (पेशे से टीचर)लडके कि माँ शशिबाला --------- (गृहणी)लड़के का छोटा भाई ------------ वरुणलडके की बहन-------------------- कल्पनारिश्ता करवाने वाला व्यक्ति---- शास्त्री जी लडकी का परिवारलड़की – संजनालडकी की बहन –रंजनालडकी



भैस

भैंस “अकल बड़ी या भैंस” सुना जब, मेरा मन चकराया,भैंस देखने के खातिर मैं, बड़े तबेले आया.कामराज सा रंग, अंग बैंगन सा सुन्दर पायागाय लगे गोरी, शायद इसलिए श्यामली काया.कमसिन, कठिन कमर, कर कोमलमूक, मगर विचलित होंठों के दलअर्ध-वृत्त में मुड़ी दो सींघेंतैल-लिप्त, चमकाती तिल-तिलभाव-हीन, पगुराता चेहरास्नेहिल,



दूसरों की कमाई , हमें क्यों बताते हो भाई ....!!

उस विवादास्पद अभिनेता पर बनी फिल्म की चर्चा चैनलों पर शुरू होते हीमुझे अंदाजा हो गया कि अगले दो एक - महीने हमें किसी न किसी बहाने से इसफिल्म और इससे जुड़े लोगों की घुट्टी लगातार पिलाई जाती रहेगी। हुआ भीकाफी कुछ वैसा ही। कभी खांसी के सिरप तो कभी किसी दूसरी चीज के प्रचार केसाथ फिल्म का प्रचार भी किया



पचपन का यौवन (हास्य)

पचपन का यौवन दाढ़ी जब से सफ़ेद है मेरी , हुस्नवालों ने आँख है फेरी ....कैसे बतलाऊं इनको, कैसा हूँ ,यारों ! मैं नारियल के जैसा हूँ ...हाथ में ले के मुझको तोड़ो तो !मेरे अन्दर गिरी को फोड़ो तो !कितना समझाया इन हसीनों को ,ठीक करता हूँ मैं मशीनों को ....एक बोइंग सा हाल है मेरा , दिल अभी भी कमाल है मेरा .



हास्य कविता (कुछ नए अंदाज में मुश्किल है अपना मेल प्रिये)

मुश्किल है अपना मेल प्रिये यह प्यार नही है खेल प्रिये तुम एक पागल बंदरिया सी मैं हु जंगल का शेर प्रिये तुम कड़वी नीम की पत्ती सी मैं हु मीठा से बेर प्रिये मुश्किल है अपना मेल प्रिये यह प्यार नही है खेल प्रिये तुम हवा हवाई चप्पल सी मैं हु रिबॉक का सूज प्रिये मैं तला पकौडा बेसन का तू सड़ा हुवा बचा तेल



गीतिका चौपाई हास्य रस

गीतिका चौपाई हास्य रसराधा मधुबन तेरा आना रोज रोज का नया बहानाबोल सखी कैसा याराना बैरी मुरली राग बजाना।।बस कर अब नहि ढ़ोल बजाना मोहन गोकुल गाँव पुरानाबहती यमुना चित हरषाना यशुदा नंदन ग्वाल सयाना।।सुंदर है तू ऊंचा घराना काहें न लाज शरम जी जानासुध बुध खोकर ई गति पाना लौ



लखनऊ मेट्रो में आपका इस्तकबाल है, तैयार रहें इन एनाउंसमेंट्स के लिए

जियो के ऑफर से बड़ी गुड न्यूज लखनऊ वालों के लिए है. सीएम मेट्रो का प्री ट्रायल निपटा दिए हैं जल्दी में. लेकिन पब्लिक के लिए खोलने में जल्दी नहीं करेंगे. अगले साल 26 मार्च का प्लान है. मेट्रो जब आएगी तब आएगी. अभी तो उसके अंदर एनाउंसमेंट कैसे होगा, इसका प्लान सरकार को तैयार



नौकरी...

उन्होंने ताकीद की,बड़े गुस्से में कहा,देखो, इतना समझो,जो मुझे चाहिए,आदमी सौ टका हो,ठोका-बजाया हो,सिखाना न पड़े,आये और चल पड़े,काम बस काम करे...समय की न सोचे,घर को भूल आये,मल्टीटास्कर तो हो ही,ओवरवर्क को सलाम करे,प्रेशर हैंडल कर सके,पीपुल-फ्रेंडली तो हो ही,डेडलाईन की समझ



दोनों ही पेशेवर हैं...

जो हो, उसे न देख पाना,जो न हो, उसे देख पाना,दोनों ही मर्ज हैं मिजाज के,दोनों ही पहलू हैं यथार्थ के,एक को मूर्खता समझते हैं,दूजे को गर्व से विद्वता कहते हैं,नफा-नुकसान दोनों में बराबर है,नाजो-अंदाज में दोनों ही पेशेवर हैं,जरूरत दोनों की ही है समाज को,नशा अजीज है दोनों ही मिजाज कोदोनों जो एक-दूजे से उ



बातें कुछ अनकही सी...........: खर्राटे

सुनने में जितना भी अजीब लगे पर हाँ ये कविता खर्राटों पर है/खर्राटे जो आप भी लेते हैं हम भी लेते हैं/हाँ पर जब खर्राटों की ध्वनि जब चाहकर अनसुनी न रह जाये यानि की शोर प्रचंड हो तो वो व्यक्ति रोगी कहलाता है और उसके बगल वाला भुक्तभोगी /ऐसी स्तिथि में आप भी कभी न कभी जरूर रहे



नुक्कड़ वाला मकान

गली के नुक्कड़ पर जो वो मकान है, सारे मोहल्ले के मनोरंजन का सामान है,जो भी वहाँ से निकले वह रह जाए हक्का बक्का, बेलन लग गया तो चौका नहीं तो छक्का!!



लम्बा नाम

ट्रेन में एक आदमी सबके छोटे नाम का मजाक उड़ा रहा था तभी वो मुझसे बोला - “हैलो मेरा नाम चंद्रशेखरन मुत्तुगन रामस्वामी पल्लीराजन भीमाशंकरन अय्यर! ….. और आपका नाम?”“नरेन्द्र” मैंने जवाब दिया तो वो हँसते हुए बोला “हमारे यहाँ इतना छोटा नाम किसी का नहीं होता”! मैंने जवाब दि



बस एक दाल रोटी का सवाल है

बच्चे से मैं प्रौढ़ हो गया जाना जीवन जंजाल हैइंसानी फितरत में देखा बस एक दाल रोटी का सवाल है कोई भी चैनल खोलो तो बेमतलब के सुर ताल हैंपत्रकारों की भीड़ का भी बस एक दाल रोटी का सवाल है नेता नित देश की सेवा करते देश मगर बदहाल हैइसमें में भी तो आखिर उनकी बस एक दाल रोटी का



कम्बख्त,इश्क़ में लग गए

"मोहल्ले के लौंडों का प्यार अक्सर इंजीनियर डॉक्टर उठा कर ले जाते हैं।"रांझना फिल्म का ये डॉयलोग तो आपके जेहन में होगा ही।practical life में यानी की असल जिन्दगी में प्यार काफी हद तक ऐसा ही होता है।अब हर लव स्टोरी तो srk की फिल्मों की तरह होती नहीं कि पलट बोला और लड़की पलट ग



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