हिन्द



बन्देमातरम , बन्देमातरम

बंदेमातरम्,बन्देमातरम डॉ शोभा भारद्वाज अमीरखुसरो ने लिखा था –“हस्त मेरामौलिद व मावा व वतन”(हिन्द मेरीजन्म भूमि है|) हिन्द कैसाहै ?‘किश्वरेहिन्द अस्त’ बहिश्ते बरजमीन (भारत देश धरती पर स्वर्ग हैं ) वायसराय लार्ड कर्जनद्वारा बंगाल विभाजन अंग्रेजों की नीति फूट डालो राज करो नीति का हिस्सा था .मुस्लिम बह



हिन्दी की सामर्थ्य

हिन्दी की सामर्थ्यएक भाषा है जो मुझसे, बात करती है मैं कहीं भी जाऊँ, मुलाक़ात करती है , चाँदनी में दिखती, तारों में छिप जाती, जुगनुओं की तरह मेरेसाथ चलती है,हमने अपने बेटे से कहा,हिन्दी मे पहाड़ेसुनाओ,बोला पापा हमें खामखां मत गड़बड़ाओ,मेडम कहती है, नौकरी तभी मिलेगी जब अँग्रेजी पढ़ोगे,नहीं तो ज़िंदगी भरह



अपना ख्याल रखना

अपना ख्याल रखना कि तुम्हे पता भी नहीकितने बेपरवाह हो तुमदिन को रात ,रात को दिन बना रखते हो दुर हु तुमसे... पर फिर भी मेरी बात का मान ऱखना ....मेरी खुशी के लिए...अपना ख्याल रखना... माना कि अब मे पास नही तुम्हे डाटँने का बहाना भी कुछ खास नही मेरी हर झल्लाहट का एहसास रखना अपनी मसरुफ जिंदगी को थोड



जिंदगी

हालात ए जिंदगी , संघर्षरत् हैं इस रुट की सभी लाईने अ़यस्त व्यस्त हैं माना किस्मत का सितारा, अभी ध्वस्त हैं पर हम भी , अपने प्रयासो मे ,निरंतर अभ्यस्त हैं



पुरुषत्व

छोटी को दुर्गा मानकर पुजते हो ,बड़ी को रंभा की दृष्टि से देखते हो | समाज मे रहकर ही समाज की ,मर्यादा को लुटते हो | .... अगर भाई पुरुष ही हो ????? तो फिर क्यो पुरुषत्व पर थुकते हो |....



अरमान

बिखरे अरमानो को छोड, देना सही हैं क्या ??एक बार हारे हैं बस. दुसरा मौका नही हैं क्या ?? क्यो बोझ ढो रहे हो असफलता का . मन में हौसलो की कमी हैं क्या ?? ठान लो तो जीत हैं .. मान लो तो हार... जिंदगी का सफर ही हैं रुमानी तुम्हारे लिए जीतने से ज्यादा सीखना नही हैं क्या ? ? ?



प्रयागराज झांसी स्नातक चुनाव के सम्बन्ध मे सभी पदाधिकारियों की बैठक -श्यामराज यादव पप्पू यादव चेयरमैन सिरसा

अबतक हिंदी न्यूज़ /प्रयागराज/मेजा/सिरसा शिव गंगा वाटिका गेस्ट हाउस में प्रयागराज झांसी स्नातक चुनाव के सम्बन्ध मे सेक्टर प्रभारी, सह सेक्टर प्रभारी, सेक्टर पर्यवेक्षक, बूथ प्रभारी व समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक किया गया जिसका आयोजन समाजवादी पार्टी के मेजा विधान सभा अध्यक्



इश्क़ का अब्सर

मेरे इश्क़ का अब्शर अब बहने दो ।इस जूनून में ख्वाबीदा अब हमें होने दो ।सब कहते है मुख्तलिफ है तेरे मेरे रास्ते,वो क्या जाने मेरा इख्लास तेरे वास्ते।।❤❤



हिन्दी शायरी

🌺🌺🌺🌺जन्में थे जब तो बेहिसाब ज़श्न थे मने,स्वजनों के जाने के साथवसियतनामे खुले।हुनर था बहुत परवह छुपाये न छुप सका--जाने के बाद सभों केआँसुओं संग बह रहे।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹बेवफ़ाई देख कविता-शायरी उमड़ बरसती है।हर हर्फ-छंद से हुश्न की दीवारें चिनी जाती है।।शायर आशिकी कीशहनाई आदतन बजाया है।'कवि' नेह समेट



कविता मौन ही होती है ...(कविता-संग्रह)

'कविता मौन ही होती है...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है लेकिन कई बार यह व्यक्तिगत से सार्वजनिक भाव भी रखता है.भावनाएं कभी स



रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)

रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)‘रश्मि के नाम कुछ खत...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है ल



होली की शुभकामनाएं

सभी हिन्दी सपरिवार को मेरी तरफ से होली एवं रंगोली की ढेर सारी बधाई व हार्दिक शुभकामनाएं



जय हिन्द

हरे से अल्लाह , केसरिये से राम हूं,शांति बनाये श्वेत से,मै यूद्ध विराम हूं ।।



Archana Ki Rachna: Preview "मनमर्ज़ियाँ"

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैंयूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशापर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैंपंख लगा कही उड़ आते हैंये जो शर्मों हया का बंधनबेड़ियाँ बन रोक लेता हैमेरी परवाज़ों कोचलो उसे सागर में कही डूबा आते हैंपंख लगा



बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे - गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali Poems In Hindi

Baharen Aayengi - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiबहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे!सितारों को मालूम था छिटकेगी चाँदनीसजेगा साज प्यार का बजेगी पैंजनी;बसोगे मन में तुम तो मन के तार बजेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे!मिला



मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ - गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali Poems In Hindi

Main Vidyut Mein Tumhein Niharu - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँनील गगन में पंख पसारूँ;दुःख है, तुमसे बिछड़ गया हूँ किन्तु तुम्हारी सुधि न बिसारूँ!उलझन में दुःख में वियोग मेंअब तुम याद बहुत आती हो;घनी घटा में तुमको खोजूँमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ!जब से बिछुड़



हिंदी भाषा

कई दशको पहले, यदि भारत में कुछ ऐसा घट जाता,जिस से ये देश धन सम्पन्न और विकसित बन जाता, चहुँमुखी विकास के साथ साथ,अन्तराष्ट्रीय व्यापर भी शशक्त हो जाता, और शशक्त हो जाती हिंदी भाषा, भारत में तो चारो और हिंदी बोली जाती ही ,और विदेशी भी हिंदी बोलते हुए आता,लड़खड़ाती हुई हिंदी बोलते हुए जब विदेशी आता,तो म



सत्यमेव धिकतम?

दोस्तों, आज हम देख रहे हैं की एक पुराण पेड़ समूल उखाड़ने के लिए विदेश-दुश्मन-जाने-अनजाने सभी से गठबंधन कर लिया गया है .ये पेड़ इसलिए नहीं पुराण की ये कोई धर्म है? ये तो अपितु इसलिए पुराना है क्यूंकि भारत की 300 वर्षों की गुलामी और 700 वर्ष



ये उन दिनों की बात है: समीर और नैना के बीच बड़ी लड़ाई

सोनी टीवी के ये उन दिनों की बात है में समीर और नैना के बीच हनीमून के बाद एक बड़ी लड़ाई हुईसोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न के ये उन दीनों की बात है (शशि सुमीत प्रोडक्शन) लगातार दिलचस्प मोड़ लेकर आ रही है और दर्शकों को एपिसोड्स से जोड़े रखती है।दर्शकों ने समीर (रणदीप राय) और नैना (आशी सिंह) को अपने हनीमून



मैं करती हूँ नृत्य

मैं करती हूँनृत्यदोनों हाथ ऊपरउठाकर, आकाश की ओरभर लेने कोसारा आकाश अपने हाथों में |चक्राकार घूमतीहूँ कई आवर्तनघूमती हूँ गतों और परनोंके, तोड़ों और तिहाइयों के |घूमते घूमते बनजाती हूँ बिन्दु हो जाने को एक ब्रह्माण्ड केउस चक्र के साथ |खोलती हूँ अपनीहथेलियों को ऊपर की ओर बनाती हूँनृत्य की एक मुद्रादेने



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