हिन्द



इश्क़ का अब्सर

मेरे इश्क़ का अब्शर अब बहने दो ।इस जूनून में ख्वाबीदा अब हमें होने दो ।सब कहते है मुख्तलिफ है तेरे मेरे रास्ते,वो क्या जाने मेरा इख्लास तेरे वास्ते।।❤❤



हिन्दी शायरी

🌺🌺🌺🌺जन्में थे जब तो बेहिसाब ज़श्न थे मने,स्वजनों के जाने के साथवसियतनामे खुले।हुनर था बहुत परवह छुपाये न छुप सका--जाने के बाद सभों केआँसुओं संग बह रहे।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹बेवफ़ाई देख कविता-शायरी उमड़ बरसती है।हर हर्फ-छंद से हुश्न की दीवारें चिनी जाती है।।शायर आशिकी कीशहनाई आदतन बजाया है।'कवि' नेह समेट



कविता मौन ही होती है ...(कविता-संग्रह)

'कविता मौन ही होती है...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है लेकिन कई बार यह व्यक्तिगत से सार्वजनिक भाव भी रखता है.भावनाएं कभी स



रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)

रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)‘रश्मि के नाम कुछ खत...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है ल



होली की शुभकामनाएं

सभी हिन्दी सपरिवार को मेरी तरफ से होली एवं रंगोली की ढेर सारी बधाई व हार्दिक शुभकामनाएं



जय हिन्द

हरे से अल्लाह , केसरिये से राम हूं,शांति बनाये श्वेत से,मै यूद्ध विराम हूं ।।



Archana Ki Rachna: Preview "मनमर्ज़ियाँ"

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैंयूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशापर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैंपंख लगा कही उड़ आते हैंये जो शर्मों हया का बंधनबेड़ियाँ बन रोक लेता हैमेरी परवाज़ों कोचलो उसे सागर में कही डूबा आते हैंपंख लगा



बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे - गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali Poems In Hindi

Baharen Aayengi - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiबहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे!सितारों को मालूम था छिटकेगी चाँदनीसजेगा साज प्यार का बजेगी पैंजनी;बसोगे मन में तुम तो मन के तार बजेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे!मिला



मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ - गोपाल सिंह नेपाली | Gopal Singh Nepali Poems In Hindi

Main Vidyut Mein Tumhein Niharu - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँनील गगन में पंख पसारूँ;दुःख है, तुमसे बिछड़ गया हूँ किन्तु तुम्हारी सुधि न बिसारूँ!उलझन में दुःख में वियोग मेंअब तुम याद बहुत आती हो;घनी घटा में तुमको खोजूँमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ!जब से बिछुड़



हिंदी भाषा

कई दशको पहले, यदि भारत में कुछ ऐसा घट जाता,जिस से ये देश धन सम्पन्न और विकसित बन जाता, चहुँमुखी विकास के साथ साथ,अन्तराष्ट्रीय व्यापर भी शशक्त हो जाता, और शशक्त हो जाती हिंदी भाषा, भारत में तो चारो और हिंदी बोली जाती ही ,और विदेशी भी हिंदी बोलते हुए आता,लड़खड़ाती हुई हिंदी बोलते हुए जब विदेशी आता,तो म



सत्यमेव धिकतम?

दोस्तों, आज हम देख रहे हैं की एक पुराण पेड़ समूल उखाड़ने के लिए विदेश-दुश्मन-जाने-अनजाने सभी से गठबंधन कर लिया गया है .ये पेड़ इसलिए नहीं पुराण की ये कोई धर्म है? ये तो अपितु इसलिए पुराना है क्यूंकि भारत की 300 वर्षों की गुलामी और 700 वर्ष



ये उन दिनों की बात है: समीर और नैना के बीच बड़ी लड़ाई

सोनी टीवी के ये उन दिनों की बात है में समीर और नैना के बीच हनीमून के बाद एक बड़ी लड़ाई हुईसोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न के ये उन दीनों की बात है (शशि सुमीत प्रोडक्शन) लगातार दिलचस्प मोड़ लेकर आ रही है और दर्शकों को एपिसोड्स से जोड़े रखती है।दर्शकों ने समीर (रणदीप राय) और नैना (आशी सिंह) को अपने हनीमून



मैं करती हूँ नृत्य

मैं करती हूँनृत्यदोनों हाथ ऊपरउठाकर, आकाश की ओरभर लेने कोसारा आकाश अपने हाथों में |चक्राकार घूमतीहूँ कई आवर्तनघूमती हूँ गतों और परनोंके, तोड़ों और तिहाइयों के |घूमते घूमते बनजाती हूँ बिन्दु हो जाने को एक ब्रह्माण्ड केउस चक्र के साथ |खोलती हूँ अपनीहथेलियों को ऊपर की ओर बनाती हूँनृत्य की एक मुद्रादेने



पुलवामा के अमर शहीदों को शत शत नमन

आज चाहूँ देखनापुलवामा की घटना वास्तव में मन को क्षुब्ध करतीहै… सच में बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ है ये... और हमारे ये शहीद किसीप्रत्यक्ष युद्ध की भेंट नहीं चढ़े हैं, आतंकवादियों ने बड़े कायरतापूर्ण तरीक़े से इन पर हमला किया है... हमारे इन वीरशहीदों को वास्तव में गर्व के साथ शत शत नमन... ये सिर्फ अपने



रोज़ डे पर अपने साथी को तोहफे में भेजें ये बेहतरीन कविता होगी कबूल

रोज़ डे पर हम अपने पार्टनर को गुलाब देकर अपने रिश्तों में ताज़गी भरते हैं और अपने प्यार का इज़हार करते हैं। लेकिन एक कशमकश ये ज़रूर रहती है कि हम अपने पार्टनर को गिफ्ट में क्या दें जिससे वो ख़ुश हो जाए। वैसे तो आजकल कई तरह के तोहफे चलन मेें है लेकिन अगर आप कोई ख़ूबसूरत संदेश भेजते या सुनाते हैं तो य



हिन्दी कविता- हिन्दी प्रसिद्ध कविताएं

हिन्दी साहित्य में कई ऐसे लेखक हुए हैं जिन्होंने वक़्त, जिंदगी , इश्क़ और न जाने कितनों विषयों को अपनी कलम से परिभाषित किया है। इन लेखकों की सोच प्रकाश गति से भी तेज है । आज हम ऐसे ही लेखकों की प्रसिद्ध कविताएं आपके लिए लाए है



कहानी दिवस और निशा की

कहानी दिवस और निशा की हर भोरउषा की किरणों के साथ शुरूहोती है कोई एक नवीन कहानी…हरनवीन दिवस के गर्भ में छिपेहोते हैं न जाने कितने अनोखे रहस्य जोअनावृत होने लगते हैं चढ़ने के साथ दिन के… दिवसआता है अपने पूर्ण उठान पर तबहोता है भान दिवसके अप्रतिम दिव्य सौन्दर्य का… सौन्दर्यऐसा, जोकरता है नृत्य / रविकरो



ठिठुराती भीषण ठण्ड में

ठिठुराती भीषण ठण्ड में जब प्रकृति नटी ने छिपा लिया हो स्वयं को चमकीली बर्फ की घनी चादर में छाई हो चारों ओर घरों की छत पर और आँगन में खामोशी के साथ “टप टप” बरसती धुँध नहीं दीख पड़ता कि चादर के उस पार दूसरा कौन है और फिर इसी द्विविधा को दूर करने धीरे धीरे मीठी मुस्कान के सूर्यदेव का ऊपरउठाना जो कर दे



सूर्योदय

सूर्योदयसमस्याएँजीवन का एक अभिन्न अंग जिनसेनहीं है कोई अछूता इस जगत में किन्तुसमस्याओं पर विजय प्राप्त करके जो बढ़ता है आगे नहींरोक सकती उसे फिर कोई बाधा हर सन्ध्याअस्त होता है सूर्य पुनःउदित होने को अगली भोर में जोदिलाता है विश्वास हमें किनहीं है जैसा मेरा उदय और अवसान स्थाई उसी प्रकारनहीं है कोई



कुछ कुछ - किस्त दूसरी

हिंदी भाषा के अनुसार, हम जो हिंदी काम लाते हैं, उसे सुधारने का एक छोटा प्रयास। हम जो बोलना / कहना चाहते हैं, तो उच्चारण का ध्यान रखना आवश्यक है, तभी हमें सफलता मिलेगी, तब हम वो बोल पाएंगे। इसी तरह हम जो लिखना चाहते हैं, तो हम वही लिखें



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