हो



कोरोना की दूसरी लहर

कौरोना की दूसरी लहरडॉ शोभा भारद्वाज मेरा घर व्यस्त सड़कपर है दिल्ली को नोएडा से जोड़ती लाक डाउन में खाली सड़क उस पर दर्दीला आवाज मेंभागती एम्बूलेंस की आवाज दहशत से हाल कर जाती है आज मई का दूसरा सोमबार पूरे दिनमें एक एम्बूलेंस दिल्ली की तरफ आवाज करती जाती दिखाई दी हैरानी के साथ ख़ुशी हुईशायद कोरोना की दू



राग रंग में रंगा मिलन का त्यौहार

22 मार्च को WOW India की ओर से डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म ज़ूम पररंगोत्सव मनाने के लिए एक काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया... जिसमें बड़े उत्साहसे सदस्यों ने भाग लिया... कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमासिंह ने और संचालन किया WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने... सभी कवयित्रियों के काव



जिससे यह तन मन रंग जाए

22 मार्च को WOW India की ओर से डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म ज़ूम पररंगोत्सव मनाने के लिए एक काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया... जिसमें बड़े उत्साहसे सदस्यों ने भाग लिया... कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमासिंह ने और संचालन किया WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने... सभी कवयित्रियों के काव



होली है हुडदंग मचा लो

आज सभी रंगों से होली खेल रहे हैं... होली... जो पर्व हैरंगों का... रूठे हुओं को मनाने का... मन की सारी नकारात्मकता होलिका के साथ दहनकरके सकारात्मकता के रंगों से होली खेलने का... मेल मिलाप का... हमारे अपनेकार्यक्रम “मेरी बातें” में आप सभी का स्वागत है... होली के हुडदंग के साथ... प्रस्तुतहैं कुछ पंक्ति



होली सो होली , ' आओ मिल कर खेलें होली'

मेरी नन्द मनीषा रामरक्खा फिजी यूनिवर्सिटीमें हिंदी की प्रोफेसर हैं उन्होंने फिजी में हिंदी साहित्य के उत्थान के लिए बहुतकाम किया .मुझे उनपर गर्व हैं . उनकी होली उत्सव पर लिखी कविता मुझे बहुत पसंदआयीं मैने पाठकों के लिए शेयर की है . होली सो होली मनी



27 मार्च 2021

होली

मोहल्ले में होलिका दहन का आयोजन हो रहा था मन में विचारो का सैलाब उमड़ रहा था कल करेंगे मज़े, एक दम दिल खोलरंगो के साथ होगा, मस्ती का माहौलनाचेंगे, नचाएंगे, रंगो में नहाएंगे जात-पात का भेद भूल, मिलकर धूम मचाएंगेएक रंग में रंगे चेहरों की क्या होगी पहचानन होगा कोई ईसाई, न सिख, न हिन्दू और न मुस्लमान स



मनोज्ञा छंद "होली"

मनोज्ञा छंद "होली"भर सनेह रोली।बहुत आँख रो ली।।सजन आज होली।व्यथित खूब हो ली।।मधुर फाग आया।पर न अल्प भाया।।कछु न रंग खेलूँ।विरह पीड़ झेलूँ।।यह बसंत न्यारी।हरित आभ प्यारी।।प्रकृति भी सुहायी।नव उमंग छायी।।पर मुझे न चैना।कटत ये न रैना।।सजन य



कभी एक दिवस नहीं एक युग महिलाओं का भी आएगा

मुझे याद है जब हम बहुत छोटे थे तो हमारे घर- परिवार की तरह ही गांव से कई लोग रोजी-रोटी की खोज में शहर आकर धीरे-धीरे बसते चलते गए। शहर आकर किसी के लिए भी घर बसाना, चलाना आसान काम नहीं रहता है। घर-परिवार चलाने के लिए पैसों की आवश्यकता होती है। उसके बिना न रहने का ठिकाना, न पेट भरना और नहीं तन ढ़



विचित्र अहसास

बिचित्र अहसास डॉ शोभा भारद्वाज जीवन में कई बार बेहद रोमांचक घटित होता है . ईरान के खुर्दिस्तान प्रांत की राजधानी सन्नंदाज के आखिरी छोर के अस्पताल में मेरे पति डाक्टर एवं इंचार्ज थे बेहद ख़ूबसूरत घाटी थी .उन दिनों वहाँ ईरान इराक में युद्ध चलता रहता था ,कभी रुक जाता फि



कवींन बी मेरी माँ

क्वीन बी मेरी माँ ( आज मेरी माँ का जन्म दिन है वह कितने वर्ष की हो गयी हैं हम जानना नहीं चाहते ) डॉ शोभा भारद्वाज मेरी माँ के पिता अर्थात मेरे जागीरदार नाना कालेज मेंप्रिंसिपल और जाने माने अंकगणित के माहिर थे . मेरी नानी अंग्रेजों के समय में विदेशीवस्तुओं का बहिष्कार ( पिकेटिंग



माँ के आशीष बिना जीत कहाँ होती है,I

माँजिस्म से रूह तक ,एक-एक रुआँ होती है,वो तो माँ है सारी, दुनियाँ से जुदा होती है, उसकी प्यारी सी, थपक आँख सुला देतीहै,माँ तो पलकों से, भर- भर के दुआ देती है ये जो दौलत है, बेखोफ़ जिगर, शौहरत, हैमाँ के आँचल की, हल्की सी हवा होतीहै I चाहे दुनियाँ ही, रुके, सांस भले थम जाये,माँ की मम



वैक्सीन पर सियासत क्यों ?

वैक्सीनपर सियासत क्यों?डॉशोभा भारद्वाज ईरानमें चाय पीने का अलग ढंग है घर में हर वक्त चाय हाजिर रहती है .वहाँ की चाय औरकहवा खाने मशहूर हैं शाम को कहवा खानों में किस्सा गोई चलती है घरों में भी ठंड केदिनों में अलादीन मिट्टी के तेल का स्टॉप जलता रहता है घर भी गर्म करता है उस परउबलने के लिए पानी रख देते



पीड़ा में गुजरा वर्ष 2020 , विश्व के लिए 2021 शुभ हो

पीड़ा में गुजरा वर्ष 2020 , विश्व के लिए 2021 अति शुभ हो डॉ शोभा भारद्वाजभारत में ग्यारह बजे थे सिंगापुर टाईम डेढ़ बजे मोबाईलकी घंटी बजी , देखा मेरी बेटी, अमेरिका की बेस्ट यूनिवर्सिटी में पढ़ी सिंगापूर में उच्च पदाधकारी ,मोटे –मोटे आंसू बहाती हुई सुबक रही थी . उसने सिंगापुर टाईम्स , गार्जियन, न्यूयार्क



देश में ‘‘लोकतंत्र‘‘ ‘‘खत्म’’ हो गया है! राहुल गांधी! सही!/?

महामहिम राष्ट्रपति को किसानों के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसदों द्वारा अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च कर ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने के बजाए धारा 144 लागू किये जाने पर राहुल गांधी को यह कहना पड़ गया कि देश में ‘‘लोकतंत्र समाप्त‘‘ हो गया है। रात्रि की अंधकार की गहरा



किसान आंदोलन! उत्पन्न ‘‘आशंका के परसेप्शन‘‘ को दूर करने के लिए सरकार को ‘‘कदम उठाने‘‘ ही होंगे।

अभी हाल में ही मैंने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और मध्य प्रदेश के उपचुनावों के संबंध में यह लिखा था कि ‘‘अंकगणित की जीत‘‘ के साथ ही उससे उत्पन्न ‘‘परसेप्शन‘‘ को जीतने पर ही ‘‘जीत पूर्ण‘‘ कहलाती है। किसान आंदोलन को देखते हुए परसेप्शन का उक्त सिद्धांत संसद एवं सरकार द्वारा लागू अधिनियम एवं लि



सब्‍जी का आधार मूल्‍य तय करने की होड !

सब्‍जी का आधार मूल्य तय करने की होड !केरल में सब्‍जीउत्‍पादन बढकर चौदह दशमलव बहत्‍तर लाख टन हो गया है: यह वह राज्‍य है जहां प्राय: हरघर के आंगन में किसी न किसी सब्‍जीफल फूल की खेती होती हैं: मसालों की खेती भी वे घरों में करते हैं अब केरल के मुख्‍यमंत्रीपी विजयन ने इस



अहोई अष्टमी

अहोईअष्टमी व्रतआश्विन शुक्लपक्ष आरम्भ होते ही पर्वों की धूम आरम्भ हो जाती है | पहले शारदीय नवरात्र, बुराई और असत्य परअच्छाई तथा सत्य की विजय का प्रतीक पर्व विजया दशमी उसके बाद शरद पूर्णिमा औरआदिकवि वाल्मीकि की जयन्ती, फिर कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा सेकार्तिक स्नान आरम्भ हो जाता है | कल कार्तिक कृष्ण प्र



तुम्हारी याद

कवितातुम्हारी याद तुम यादों से विस्मृत हो जाओ सम्भव नहीं है ये ,तुम पटल से उतर जाओ स्वीकृत नहीं है ये । न करो याद तुमफ़र्क पड़ता है क्या ?न करो विश्वास तुमसमय रुकता है क्या ?श्वास तो चलते हैंहृदय भी धड़कता है दोनों ही के स्पंदन मेंध्वनि हो या प्रतिध्वनि तुमसे ही होकर आती



तुम हो

तुम हो और हम हो और ये वक्त ही ठहर जाएअगर तुम कह दो बस इतना ही की तेरे साथ जीना अभी बाकि है.....-अश्विनी कुमार मिश्रा



पथिक

(1)वो घर से निकला पीने को, मानो अंतिम पल जीने को।उसे अंतिम सत्य का बोध हुआ। मानो अंतिम घर से मोह हुआ।सोते बच्चों को जी भर देखा, सोती बीबी के गालों को चूमा,माँ-बाप को छूपकर देखा, चुपके सोते चरणों को पूजा।कुछ पैसे



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x