हो

बात और थोड़े दिन की।

बात और थोड़े दिन की।चुरा लो और क्या चुराओगे?पूछेगीं नज़रे,तो क्या बताओगे?जुबान चुप होगी, होठ सिल जाएंगे।मयते कब्र मे दफ़न हो जाएंगी।अब वक्त शुरू हुआ हैं, विलय का।बैंक ही नहीं सबकुछ विलय हो जाएगा।चलता रहा यू ही कारवां, आने वाली पीढ़ियाँ भी विलय हो जाएंगी।खोजते रहना जाति, धर्म, जब इंसानियत ही विलय हो जाएग



अब अपने मन से जीव।

अब अपने मनसे जीव।आटा-लाटा ख़ाके, ताजा माठा पीव।देख पराई कमाई, मत ललचाव जीव।हो घर मे जो, उसको खा-पी के जीव।चाईना ने तिब्बतके बॉर्डर मे मिसाईल तान दी।1965 मे सहस्रसिपाहियो ने अपनी बलिदानी दी ।जो घर मे होघीव, देख उसे शकुनसी जीव।देख राजा-नेताओके झगड़े मे, मत जलाओअपना जीव।छोड़-छाड़ जातीधर्म आरक्षण का वहम खुद



अभिनेता नसीरूद्दीन शाह अपने देश में डरे हुये हैं

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने देश में डरे हुए हैं ?डॉ शोभा भारद्वाज वह आज के भारत में अपने बच्चों को लेकर बहुत डरे हुए हैं. ''मुझे इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरेबच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. क्योंकि मैंने मेरेअनुसार अ



"गीतिका" अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जाना घुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जाना

मापनी-1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका"अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको सनम खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया नजर इकरार हो जाना



कसैले पन का कसाव

(कसैलेपन का कसाव) मेड़मफोटो खीचेंगी यह लाईन अभद्रता भरी लाईन या अभद्रता की प्रतीक थी। एक चाटा भरी आवाजके साथ प्रतीक वर्दियों से घिर गया। किसी के कमर मे काली बेल्ट पैरो मे काले जूतेजिसमे चेरी की पोलिस ही चमक रही थी। किसी के कमर मे बंधी लाल बेल्ट पैरो मे लालजूता वह दरोगा या कह लो सब इंस्पेक्टर यह ला



"गज़ल" अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है

वज़्न - 1222 1222 122 , अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़, काफ़िया - डूबता(आ स्वर) रदीफ़- है"गज़ल"अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है कभी खाते कदम बल चल जमीं परहक़ीकत से हुआ जब फासला है।।उठाकर पाँव चलती है गरजबहुत जाना पिछाना फैसला ह



होरोस्कोप २०१९ –



जातियां और आज का भारत

आज के भारत में जातियां अस्तित्वहीन हो चुकी है। परन्तु राजनीति बांटने और वोट बैंक बनाने के लिये आज भी इसका भरपूर प्रचार कर रही हैं। इसे रोका जाना चाहिये। भारत सरकार को अब सरकारी फार्मों आदी से जाति का कॉलम हटा देना चाहिये। इसके स्थान पर केवल वर्ग जैसे - साम



"गीतिका" उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है

, आधार छंद--विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत - आस, पदांत - होता है"गीतिका"उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता हैहवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता हैजहाँ भी आँधियाँ आती उड़ा जाती ठिकाने कोबता दौलत हुई किसकी फकत विश्वास होता है।।बहुत चिंघाड़ता है चमकता है औ गरजता घनबिना मौसम बरसता है छलक चौमास होता



"गज़ल" कहो जी आप से क्या वास्ता है सुनाओ क्या हुआ कुछ हादसा है

वज़्न-- 1222 1222 122 अर्कान-- मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन, क़ाफ़िया— वास्ता (आ स्वर की बंदिश) रदीफ़ - है"गज़ल" कहो जी आप से क्या वास्ता हैसुनाओ क्या हुआ कुछ हादसा हैसमझ लेकर बता देना मुझे भीहुआ क्या बंद प्रचलित रास्ता है।।चले जा चुप भली चलती डगर येमना लेना नयन दिग फरिश्ता है



अहोई अष्टमी

अहोईअष्टमी व्रतकलयानी 31 अक्टूबर को उत्तर भारत में महिलाएँ अहोई अष्टमी के व्रत का पालन करेंगी | अहोईअष्टमी व्रत का पालन मूलतः उत्तर भारत में ही किया जाता है | यह व्रत करवाचौथ केचार दिन बाद यानी कार्तिक कृष्ण अष्टमी को और दीपावली से आठ दिन पूर्व किया जाताहै | प्राय: अहोई अष्टमी उसी वार की होती है जिस



हमारे अपने सफाई कर्मचारी

हमारे अपने सफाई कर्मचारी डॉ शोभा भारद्वाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता अभियान से जोड़नेके लिए जाने माने महानुभावों ,समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 2000 लोगों को पत्र लिख कर सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है इनमें पूर्व न्यायाधीश, अवकाश प्राप्त अधिकारी, वीरता पुरस्कार क



कितनी वांछित है?

कितनी वांछित है?✒️युवा वर्ग जो हीर सर्ग है, मर्म निहित करता संसृति काअकुलाया है अलसाया है, मोह भरा है दुर्व्यसनों कापिता-पौत्र में भेद नहीं है, नैतिकता ना ही कुदरत का;ऐसी बीहड़ कलि लीला में, आग्नेय मैं बाण चलाऊँकहो मुरारे ब्रह्म बाण की, महिमा तब कितनी वांछित है?जो भविष्य को पाने चल दे, वर्तमान का भा



“गीतिका” बनाया सजाया कहोगे नहीं

गीतिका आधार छंद- शक्ति , मापनी 122 122 122 12, समांत-ओगे, पदांत- नहीं “गीतिका”बनाया सजाया कहोगे नहीं गले से लगाया सुनोगे नहीं सुना यह गली अब पराई नहीं बुलाकर बिठाया हँसोगे नहीं॥बनाकर बिगाड़े घरौंदे बहुत महल यह सजाकर फिरोगे नहीं॥बसाये न जाते शहर में शहर नगर आज फिर से घुमोगे नहीं॥चलो शाम आई सुहानी बहु



शिक्षा के आँसू

अपनों से दो शब्द“जब अनैतिक शक्ति संस्था-प्रधान के सिंहासन में पदास्थापित हो जाती है तोव्यवस्थाएँ तो चरमराती ही हैं, नैतिक शक्ति को अवसर भी नहीं मिलता और इसकानंगा-नृत्य स



“छन्द मुक्त काव्य” “शहादत की जयकार हो”

“छन्द मुक्त काव्य”“शहादत की जयकारहो”जब युद्ध की टंकारहो सीमा पर हुंकार हो माँ मत गिराना आँखआँसू माँ मत दुखाना दिलहुलासूजब रणभेरी की पुकारहो शहादत की जयकारहो।। जब गोलियों कीबौछार होजब सीमा पर त्यौहारहो माँ भेज देना बहनकी राखी अपने सीने कीबैसाखी वीरों की कलाईगुलजार हो शहादत की जयकार हो॥जब चलना दुश्वार



“भोजपुरी गीत” कइसे जईबू गोरी छलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइल

“भोजपुरी गीत”कइसे जईबू गोरीछलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइलकहीं बैठल होइहेंछुपि के साँवरिया, नजरिया में चोर हो गइल...... बरसी गजरा तुहार, भीगी अँचरा लिलार मति कर मन शृंगार, रार कजरा के धारपायल खनकी तेहोइहें गुलजार गोरिया मनन कर घर बार, जनि कर तूँ विहार,कइसे विसरी धनापलखत पहरिया, शहरिया अंजोर हो गइ



श्री कृष्ण जन्म महोत्सव

श्री कृष्ण जन्म महोत्सवरविवार 2सितम्बर 2018 को स्मार्तों की श्री कृष्ण जन्माष्टमी है और सोमवार 3 सितम्बर कोवैष्णवों की श्री कृष्ण जयन्ती है | उससे पूर्व कल यानी शनिवार 1 सितम्बर को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयन्ती है | सर्वप्रथम सभी को बलभद्र जयन्ती और श्री कृष



रंग

झूठ पलता हो पालनों में जहाँ, सच की उनसे क्या उम्मीद करे, खेलते होली जो नफ़रत घुले पानी से, रंगो की वहां क्या उम्मीद करे. दिखता है रंग अपना ही खूबसूरत, उनसे दूसरे रंगों की क्या तारीफ़ करे. मज़हब में भी जो ढूंढते नफ़रत, उनसे इश्क ओ म



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