हूँ

‘‘पर्रिकर’’ ‘‘वाद’’ को ढूँढता मेरा देश। ‘व’’ ‘‘गांधीवाद’’ से चलकर ‘‘पर्रिकरवाद’’ तक पहुंचने का सुखद अहसास!

देश के प्रथम आई.आईटी शिक्षा प्राप्त (गोवा के) मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षामंत्री डॉ. मनोहर गोपाल कृष्ण प्रभु पर्रिकर लम्बी बीमारी से अदम्य आत्मबल के साथ लड़ते हुये अब इस दुनिया में नहीं रहे और ‘‘स्वर्गवासी’’ हो गये। याद कीजिये! विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते समय उनका वह चेहरा, जो चिकित्सकीय उप



तीर्थ राज प्रयाग राज में महापर्व अर्द्ध कुम्भ स्नान

तीर्थ राज प्रयाग राज में महा पर्व अर्द्ध कुम्भ स्नान डॉ शोभा भारद्वाज पुराणों में वर्णित पोराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं एवं दानवों ने मिल के समुद्र मंथन किया था तय था समुद्र मंथन से जो रत्न निकलेंगे दोनों पक्ष मिल कर बाँट लेंगे मन्दराचल पर्वत को मथनी बनाया भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार धारण कर समुद्र



“छंद मुक्त काव्य“ (मैं इक किसान हूँ)

“छंद मुक्त काव्य“(मैं इक किसान हूँ) किस बिना पै कह दूँकि मैं इक किसान हूँजोतता हूँ खेत, पलीत करता हूँ मिट्टी छिड़कता हूँ जहरीलेरसायन घास पर जीव-जंतुओं का जीनाहराम करता हूँ गाय का दूध पीताहूँ गोबर से परहेज है गैस को जलाता हूँपर ईधन बचाता हूँ अन्न उपजाता हूँगीत नया गाता हूँ आत्महत्या के लिएहैवान बन जा



माँ कहाँ गई

माँ कहाँ गई आज माँ को गुज़रे हुए साल होने को आया। धीरे-धीरे सबनॉर्मल होने लगा था।सब काम धंधे पहले की ही तरह चलने लगे थे। एक दिन गीता (मेरी पत्नी) सफाई करते समय माँ की अलमारीको भी जो अस्त व्यस्त पड़ी थी, ठीक करने लगी जिसमे माँके पुराने कपड़े रखे थे।मैं उस समय वहीं खड़ा था। गीता मां का वह पीला सूट तहाने ल



नालायक

शादी करके, घर में कलह करके, अलग होकर, मुझे रुलाकर आज चार साल बादघर से अलग होने के बाद बड़े बेटे का फ़ोन आया वह कुछ कहना ही चाहता था कि मैं आदतनशुरू हो गया, नालायक तेरी हिम्मत कैसेहुई, फ़ोन करने की तू तो उसी दिनही मर गया था हमारे लिए, जिस दिन ये घर छोड़ कर गयाथा, वो कुछ कहना ही चाहता था किमैंने फ़ोन पटक द



दिल का टुकड़ा

नाम : आलोक फोगाट जन्म स्थान : मेहरौली (दिल्ली)फ़ोन : 9953986953, 9958003160 दिल का टुकड़ा आज शादी को 23सालहो गए। याद आता है---शादी में पहली बार जब उससे परिचय हुआ ससुर जी ने बताया येमेरे भाई, जो गांव में रहते हैं, उनका बेटा राहुल, हमा



“गज़ल”क्या बताऊँ क्यों नहीं सुनता हूँ मैं

क़ाफ़िया ज़िंदा आ स्वर रदीफ़ हूँ मैं वज़्न -२१२२ २१२२ २१२अरकान-फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन“गज़ल”क्या बताऊँ क्यों नहीं सुनता हूँ मैंहर घड़ी हैवान से लड़ता हूँ मैंदेख वह ले जा रहा है आदमीदौड़ कर रोको उसे कहता हूँ मैं।।फूलकर कुप्पा हुआ सहकार पाकब उठेंगे हाथ बस तकता हूँ मैं।।राम आए थे ब



और मोहब्बत है (Aur Mohabbat Hai )- मैं प्रेम की दीवानी हूँ

Aur Mohabbat Hai song belongs to the Sooraj Barjatya's film Main Prem Ki Diwani Hoon starring Hrithik Roshan, Kareena Kapoor, Abhishek Bachchan and Pankaj Kapoor. Aur Mohabbat Hai Lyrics are penned by Dev Kohli while this track is sung by Shaan. शब्दनगरी पर हो रही चर्चाएं



तुमसे मिल के दिल का है जो हाल (Tumse Mil Ke Dil Ka Hai Jo Haal )- मैं हूँ न

फिल्म मुख्य हुन ना - 2004 से तुम्से मिल के दिल का है जो हल गीतों के साथ पढ़ें और गाएं, जिसे सोनू निगम, आफताब सबरी और हाशिम सबरी द्वारा गाया जाता है। आप मुख्य हुन ना से अन्य गाने और गीत भी प्राप्त कर सकते हैं।मैं हूँ न (Main Hoon Na )तुमसे मिल के दिल का है जो हाल (Tumse Mil Ke Dil Ka Hai Jo Haal )



किसका है ये तुमको इंतज़ार (Kiska Hai Ye Tumko Intezar )- मैं हूँ न (टाइटल सांग)

मुख्य हुन ना शीर्षक गीत का किस्का है ये तुम्को इंटेज़र गीत: यह मुख्य हुन ना से शाहरुख खान, सुष्मिता सेन, जयद खान और अमृता राव अभिनीत एक सुंदर गीत है। यह सोनू निगम और श्रेया घोषाल द्वारा गाया जाता है और अनु मलिक द्वारा रचित किया जाता है।मैं हूँ न (Main Hoon Na )किसका है ये तुमको इंतज़ार (Kiska Hai Ye



मैं हूँ न (Main Hoon Na )

"Main Hoon Na" is a 2004 hindi film which has Shahrukh Khan, Sushmita Sen, Zayed Khan, Amrita Rao, Suniel Shetty, Kirron Kher, Bindu, Satish Shah, Boman Irani, Rakhi Sawant, Kabir Bedi, Sajid Khan, Naseeruddin Shah, Murli Sharma, Nassar Abdulla, Subhan Nadiadwala, Kunal Kumar and Mushtaq Shiekh in



ी ऍम इन लव - कोई है आशिक कोई मेह्बूब है - आशिक़ हूँ बहारों का

I Am In Love - Koi Hai Aashiq Koi Mehboob Hai Lyrics of Aashiq Hoon Bahaaron Ka (1977): This is a lovely song from Aashiq Hoon Bahaaron Ka starring Rajesh Khanna, Zeenat Aman, Danny Denzongpa and Asrani. It is sung by Lata Mangeshkar and Kishore Kumar and composed by Laxmikant and Pyarelal.आशिक़ हूँ



आशिक़ हूँ बहारों का (Aashiq Hoon Bahaaron Ka )

"Aashiq Hoon Bahaaron Ka" is a 1977 hindi film which has Rajesh Khanna, Zeenat Aman, Danny Denzongpa, Asrani, Om Parkesh, Nadira, Preeti Ganguli, Rehman, Sulochana, Julie Ames and Pinchoo Kapoor in lead roles. We have and one song lyrics of Aashiq Hoon Bahaaron Ka. Laxmikant and Pyarelal have comp



“मुक्तक”

मापनी-२१२२ २१२२ २१२२ २१२“मुक्तक”समांत- आने पदांत – के लिएघिर गए जलती शमा में मन मनाने के लिए। उड़ सके क्या पर बिना फिर दिल लगाने के लिए। राख़ कहती जल बनी हूँ ख्वाइसें इम्तहान में- देख लो बिखरी पड़ी हूँ पथ बताने के लिए॥-१ समांत- आम पदांत – अबकौन किसका मानता है देखते अंजाम सब



मेहनत का ईनाम

" मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे | " ये लाइन उन पे बहुत सही लगती हैं जो मेहनत करना जानते है ना की उन पे जो मेहनत न करके v सिर्फ बातें बनाना जानते हैं | हमारे घर काकी आती थी खाना



जब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैं

जब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैंकितना कुछ बदल जाता हैसारी दुनिया एक बंद कमरे में सिमिट जाता हैसारी संसार कितना छोटा हो जाता हैमैं देख पता हूँ, धरती के सभी छोरदेख पाता हूँ , आसमान के पारछू पाता हूँ, चाँद तारों को मैंमहसूस करता हूँ बादलो की नमीनहीं बाकी कुछ अब जिसकी हो कमीजब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैं



शहीद भगत सिंह हम तुम्हे याद करते हैं

"ओ शहीद भगत सिंह हम---यह भी एक कविता है क्रांतिकारियों को याद करते करते ------कोई गुनगुनाए और गीत बनाए तो जानूँ---------------"ओ शहीद भगत सिंह हम तुम्हे याद करते हैंजो भुलाए तुम्हे, उनपर हम एतराज़ करते हैं ---------------------------------शहादत की एक परख अनोखी रच गया कुर्बानी के ज़ज़्बे को सबसे ऊँचा कर



कभी सोचता हूँ कि

कभी सोचता हूँ किकभी सोचता हूँ किजिंदगी की हर साँस जिसके नाम लिख दूँवो नाम इतना गुमनाम सा क्यों है ?कभी सोचता हूँ किहर दर्द हर शिकन में, हर ख़ुशी हर जलन मेंहर वादे-ए-जिंदगी में, हर हिज्र-ए -वहन मेंजोड़ दूँ जिसका नाम, इतना गुमनाम सा क्यों है ?कभी सोचता हूँ किसुबह है, खुली है अभी शायद आँखें मेरीलगता ह



ढिश्कयाऊँ.... ढिश्कयाऊँ.... !! (माप में रहना, हमारा साहब विदेश से आने के बाद, ‘हूँकारेंगे’ तो तुम्हारे ड्रेगन की हवा निकल जाएगी !!!)

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पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैंअनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैंकितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने कीसच ही तो है, पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं ||



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