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कभी न भूलने वाली रेल यात्रा

कभी न भूलने वाली रेलयात्रा डॉ शोभा भारद्वाज कपूरथला ,पंजाब मेंमामा जी के बेटे की बहू मेरी भाभी की मृत्यू हो गयी उनकी तेरही में हमे जाना थाअपने घर से मैं .माँ के घर मेरी छोटी बहन का प्रोग्राम बना . हमें सुबह शाने पंजाबगाड़ीकी टिकट मिल गयीं आराम से सफर कटा इस गाड़ी में एक परेशानी है रास्ते मेंकिन्नर चढ़त



माँ के आशीष बिना जीत कहाँ होती है,I

माँजिस्म से रूह तक ,एक-एक रुआँ होती है,वो तो माँ है सारी, दुनियाँ से जुदा होती है, उसकी प्यारी सी, थपक आँख सुला देतीहै,माँ तो पलकों से, भर- भर के दुआ देती है ये जो दौलत है, बेखोफ़ जिगर, शौहरत, हैमाँ के आँचल की, हल्की सी हवा होतीहै I चाहे दुनियाँ ही, रुके, सांस भले थम जाये,माँ की मम



वैक्सीन पर सियासत क्यों ?

वैक्सीनपर सियासत क्यों?डॉशोभा भारद्वाज ईरानमें चाय पीने का अलग ढंग है घर में हर वक्त चाय हाजिर रहती है .वहाँ की चाय औरकहवा खाने मशहूर हैं शाम को कहवा खानों में किस्सा गोई चलती है घरों में भी ठंड केदिनों में अलादीन मिट्टी के तेल का स्टॉप जलता रहता है घर भी गर्म करता है उस परउबलने के लिए पानी रख देते



किसान आंदोलन! उत्पन्न ‘‘आशंका के परसेप्शन‘‘ को दूर करने के लिए सरकार को ‘‘कदम उठाने‘‘ ही होंगे।

अभी हाल में ही मैंने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और मध्य प्रदेश के उपचुनावों के संबंध में यह लिखा था कि ‘‘अंकगणित की जीत‘‘ के साथ ही उससे उत्पन्न ‘‘परसेप्शन‘‘ को जीतने पर ही ‘‘जीत पूर्ण‘‘ कहलाती है। किसान आंदोलन को देखते हुए परसेप्शन का उक्त सिद्धांत संसद एवं सरकार द्वारा लागू अधिनियम एवं लि



अंधी ममता दिल की सुनती है दिमाग की नहीं

अंधी ममता दिल की सुनती है दिमाग की नहीं डॉ शोभा भारद्वाज इंडोनेशिया एवं सिंगापुर की पृष्ट भूमि में लिखी कहानी यूनी 22 वर्षों से सिंगापुर में मेड का काम कर रही थी यहाँ इन्हें नैनी कहा जाता वह सिंगापूर की नागरिकता लेना चाहती है नहीं मिली वहाँ केवल पढ़े लिखे प्रतिभावान लोगों को नागरिकता दी जाती है



परदेस ( ईरान के खुर्दिस्तान ) में करवाचौथ व्रत संसमरण

परदेस ईरान के “खुर्दिस्तान” मेंकरवाचौथ व्रत संसमरण डॉ शोभा भारद्वाज खुर्दिस्तान की राजधानी सननदाज से आठ किलोमीटरदूर सलवताबाद के अस्पताल में डाक्टर पति के साथ रही हूँ वर्षों रही हूँ | करवाचौथ केअवसर पर वहाँ की याद आते ही आँखें भीगजाती हैं लगभग दस करवाचौथ के व्रत मैनेयहीं रखे थे | बड़ी ही ख़ूबसूरत



अभिनेता नसीरूद्दीन शाह अपने देश में डरे हुये हैं

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने देश में डरे हुए हैं ?डॉ शोभा भारद्वाज वह आज के भारत में अपने बच्चों को लेकर बहुत डरे हुए हैं. ''मुझे इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरेबच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. क्योंकि मैंने मेरेअनुसार अ



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)प्रस्तुत ब्लॉग में मैनें उन ग़ज़लों और रचनाओं को एक जगह संकलित करने का प्रयास किया है , जिन्हें किसी पत्रिका ,मैग्जीन ,अखबार,संस्करण या किसी वेव साइट में शामिल किया गया है। आशा ही नहीं बल्कि पूरा बिश्वास





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