हुआ

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वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीर पराई जान रे ( स्वच्छता अभियान )

वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीरपराई जान रे (स्वच्छता अभियान ) डॉ शोभा भारद्वाज महात्मा गाँधी जी की 150 वींजयंती के अवसर पर सूर्या संस्थान नोएडा में आयोजित सर्वधर्म समभाव गोष्ठी के अवसरपर विभिन्न धर्म गुरु के भाव पूर्ण प्रवचनों को सुनने का अवसर मिला | सफाईकर्मचारियों द्वारा तैयार जलपान सबने गृहण किया



"छंद मदिरा सवैया" वाद हुआ न विवाद हुआ, सखि गाल फुला फिरती अँगना। मादक नैन चुराय रहीं, दिखलावत तैं हँसती कँगना।।

छंद - " मदिरा सवैया " (वर्णिक ) *शिल्प विधान सात भगण+एक गुरु 211 211 211 211 211 211 211 2 भानस भानस भानस भानस भानस भानस भानस भा"छंद मदिरा सवैया" वाद हुआ न विवाद हुआ, सखि गाल फुला फिरती अँगना।मादक नैन चुराय रहीं, दिखलावत तैं हँसती कँगना।।नाचत गावत लाल लली, छुपि पाँव महावर का रँगना।भूलत भान बुझावत हौ



"गज़ल" कहो जी आप से क्या वास्ता है सुनाओ क्या हुआ कुछ हादसा है

वज़्न-- 1222 1222 122 अर्कान-- मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन, क़ाफ़िया— वास्ता (आ स्वर की बंदिश) रदीफ़ - है"गज़ल" कहो जी आप से क्या वास्ता हैसुनाओ क्या हुआ कुछ हादसा हैसमझ लेकर बता देना मुझे भीहुआ क्या बंद प्रचलित रास्ता है।।चले जा चुप भली चलती डगर येमना लेना नयन दिग फरिश्ता है



मोहे बिकता सज्जन मिल जाये (Mohe Bikta Sajan Mil Jaye )- महुआ

महुआ से मोहे बिकता साजन मिल जय के गीत: यह आशा भोसले और उषा तीमुथियुस द्वारा सोनिक ओमी द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ एक बहुत अच्छा गीत है। मोहे बिकता साजन मिल जय गीत खूबसूरती से कमर जलालाबाद द्वारा लिखे गए हैं।महुआ (Mahua )मोहे बिकता सज्जन मिल जाये (Mohe Bikta Sajan Mil Jaye ) की लिरिक्स (



मैं हूँ तेरा गीत गोरी (Main Hoon Tera Geet Gori )- महुआ

फिल्म महुआ से मुख्य हुन तेरा गीत गोरी गीत मोहम्मद रफी और आशा भोसले द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत सोनिक ओमी द्वारा रचित है और गीत कमर जलालाबाद द्वारा लिखे गए हैं।महुआ (Mahua )मैं हूँ तेरा गीत गोरी (Main Hoon Tera Geet Gori ) की लिरिक्स (Lyrics Of Main Hoon Tera Geet Gori )मैं हूँ तेरा गीत गोरीबा



जब जब अपना मेल हुआ (Jab Jab Apna Mel Hua )- महुआ

जबु जब अपना मेल हुआ माहुआ (1 9 6 9) का गीत कमर जलालाबाद द्वारा लिखा गया है, यह सोनिक ओमी द्वारा रचित है और मोहम्मद रफी और सुलाक्षना पंडित द्वारा गाया गया है।महुआ (Mahua )जब जब अपना मेल हुआ (Jab Jab Apna Mel Hua ) की लिरिक्स (Lyrics Of Jab Jab Apna Mel Hua )जब जब अपना मेल हुआ तो दिल यह ही पुकाराजब



दोनों ने किया था प्यार मगर (Dono Ne Kiya Tha Pyar Magar )- महुआ टाइटल सांग

Dono Ne Kiya Tha Pyar Magar song belongs to the B Mitra's film Mahua starring Shiv Kumar, Anjana, Murad and Farah. Dono Ne Kiya Tha Pyar Magar Lyrics are penned by Qamar Jalalabadi while this track is sung by Mohammad Rafi.महुआ (Mahua )दोनों ने किया था प्यार मगर (Dono Ne Kiya Tha Pyar Magar ) टाइ



महुआ (Mahua )

'महुआ' 1 9 6 9 की हिंदी फिल्म है जिसमें शिव कुमार, अंजना, मुराद, फराह, प्रेमनाथ, असित सेन, अरुणा ईरानी, ​​जानकीदास, उल्हास और बद्री प्रसाद प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास 4 गाने के गीत और माहुआ के 4 वीडियो गाने हैं। सोनिक ओमी ने अपना संगीत बना लिया है। मोहम्मद रफी, सुलाक्षाना पंडित, आशा भोसले और



“मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए।

“मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए। उड़ता हुआ बादल ठहर कुछ बात हो जाए। क्यों जा रहे चंदा गगन पर किस लिए बोलो- कर दो खबर सबको पहर दिन रात हो जाए॥-१ अच्छी नहीं दूरी डगर यदि प्रात हो जाए। नैना लगाए बिन गर मुलाक़ात हो जाए। ले हवा चिलमन उडी कुछ तो शरम करो-सूखी जमी बौंछार



अमेज़ॅन प्राइम : नवीनतम हुआवेई फोन पर कैसे प्राप्त करें बेस्ट डील

प्राइम डे, गरमियों में खरीदारी करने के लिए एक बड़ा दिन है , जिसमे ऑनलाइन बहुत ही अच्छी डील्स मिलेगी | टीवी, कैमरा और ग्रोसरिएस कम दाम में मिलेंगे लेकिन ये ऑफर एक निश्चित समय के लिए ही है| प्राइम डे लगभग ३६ घंटे की सेल है ,इसलिए खरीदारों को



क्षण क्या है ??????

एक बार पलक झपकने भर का समय ..... , पल - प्रति पल घटते क्षण मे, क्षणिक पल अद्वितीय अद्भुत बेशुमार होते, स्मृति बन जेहन मे उभर आआए वो बीते पल, बचपन का गलियारा, बेसिर पैर भागते जाते थे, ऐसा लगता था , जैसे समय हमारा गुलाम हो, उधेड़बुन की दु



‘गज़ल” भीड़ का मजमा हुआ क्या कारवां हो जाएगा।।

‘गज़ल” वक्त को मिलने गया शय आसमां हो जाएगा छल गया उस जगह जाकर क्या खुदा हो जाएगाआप की नाराजगी है जो शहर भाती नहींफेर कर भागे नयन क्या आईना हो जाएगा॥ भूल थी अपनी जगह राहें गईं अपनी जगहआदमी है आदमी क्या हौसला हो जाएगा।।छल कपट अपना नहीं तो हम भला करते ही क्यूँदुख रहा है दिल



माँ-बाप के पैर छुए हुआ एक जमाना

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियछोड़ा घर सोच कर, किस्मत आजमाना पर क्यों ना लौट मैं, कोई करके बहाना जन्नत ढूंढता था, जन्नत से दूर होकर माँ-बाप के पैर छुए हुआ एक जमाना ॥



ग़ज़ल गंगा: ( ग़ज़ल ) हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत

( ग़ज़ल ) हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरतसजा  क्या खूब मिलती है किसी   से   दिल  लगाने  की तन्हाई  की  महफ़िल  में  आदत  हो  गयी   गाने  की  हर  पल  याद  रहती  है  निगाहों  में  बसी  सूरत  तमन्ना  अपनी  रहती  है  खुद  को  भूल  जाने  की  उम्मीदों   का  काजल   





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