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जानिए कैसे बना आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, पूरी कहानी…...

साल 1989. हिंदू कुश की पहाड़ियों में दस साल अटके रहने के बाद आखिरकार सोवियत यूनियन को अपने पैर पीछे खींचने पड़े. सोवियत यूनियन की इस हार को चार दशक लंबे चले शीत युद्ध का अंत माना गया. अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन से लड़ने के लिए अमेरिका ने इस्लामिक चरमपंथी समूहों को बड़ी मात्रा में आर्थिक और सैनिक मदद



फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या के पिता राज कुमार बड़जात्या का निधन

मुम्बई में राजश्री प्रोडक्शन के राजकुमार बड़जात्या का देहांत हो गयाअधिक जानकारी के लिए: https://hindi.iwmbuzz.com/television/news/filmmaker-sooraj-barjatyas-father-raj-kumar-barjatya-passes-away-2/2019/02/21



वीरों का बसंत

वीरों का कैसा हो बसंत, कभी किसी ने बतलाया था।पर ऐसा भी बसंत क्या कभी सामने आया था?फूली सरसों मुरझाई है, मौन हुआ हिमाचल है।धरा-व्योम सब पूछ रहे, ये कैसी हलचल है?माँ भारती हुई आतंकित, कुत्सित कुटिल प्रहारो से।स्वर्ग भूमि है नर्क बनी अब, विस्फोटों से अंगारों से।।युद्ध भूमि में नहीं थे वे, जब मौत सामने



पुलवामा में CRPF जवानों पर हमले को लेकर गुस्से में देश “निंदा नहीं चाहिए अब एक भी आतंकी ज़िंदा नहीं चाहिए” की मांग

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को CRPF जवानों पर हुए हमले पर पूरा देश आक्रोश में है। देशभर में बदले की आग धधक रही है। हर हिंदुस्तानी की यही मांग है कि अब वक़्त है जवानों की शाहदर का बदला लेने का, नए भारत का निर्माण करने का जिसमें ये घर में घुसेगा भी और मरेगा भी। ये मांग सोशल मीडिया के के द्वारा



बसों, ट्रेनों, बाज़ारों में क्यों बजाते हैं किन्नर अजीब ढंग से ताली ? जाने वजह

किन्नरों को ही हमेशा समाज में अलग ही नज़रों से देखा जाता है समाज में इतने बदलाव होने के बावजूद इन लोगों को वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए। आपने किन्नरों को कई जगह देखा होगा. कभी चौराहों पर तो कभी किसी ट्रेन में. तो कभी यूं ही बाज़ार में. पर शायद कभी इन्हें आम नज़रों



ओला बौछार

ओला बौछार काले घने बादल जब अपनी जवानी मे आते हैं आसमान मे।जमीन मे मोर पपीहा खूब इतराते हैं, नृत्य करते हैं आसमान को निहार कर, कल वह भी बौरा गए ओला वृष्टि को देख कर। कल शहरी लोग पहले खूब इतराए ओलो को देख कर फिर पछते सड़क मे जब निकले ऑफिस से कार पर। किसान खुश था पानी की धार को देखकर वह भी पछताया गेंहू



"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिन नहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिन

मापनी- 1222 1222 1222 1222, समांत- आर, पदांत- के वो दिन"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिननहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिनलिखा था खत तुम्हारे नाम का वो खो गया शायदकहीं पर शब्द बिखरे हैं कहीं मनुहार के वो दिन।।उठाती हूँ उन्हें जब भी फिसल कर दूर हो जातेबहारों को हँसा कर छुप गए



इस लेख को पढ़ते ही आप नहीं रह जाएंगे सामान्य व्यक्ति

अगर हम किताबें पढ़ना शुरू करें तो पाएंगे कि इस दुनिया में जो कुछ भी नया हो रहा है वो नया नहीं है। तमाम नए विचारों को सदियों पहले से ही सोचा जा रहा है और उस पर काम भी किया जा रहा है।गौरतलब है कि हम अपने सभी विचारों को अपना मानते हैं और नया भी पाते हैं उसके बाद भी हम सा



कुछ कुछ - किस्त तीसरी ( व्याकरण - भाषा की, जीवन की : मैं और हम )

***** कुछ कुछ - किस्त तीसरी ***** *** व्याकरण - भाषा की, जीवन की *** ** मैं और हम *



"गीतिका" छा रही कितनी बलाएँ क्या बताएँ साथियों द्वंद के बाजार में क्या क्या सुनाएँ साथियों

छन्द- सीता (मापनीयुक्त वर्णिक) वर्णिक मापनी - 2122 2122 2122 212 अथवा लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा गालगा पारंपरिक सूत्र - राजभा ताराज मातारा यमाता राजभा (अर्थात र त म य र)"गीतिका" छा रही कैसी बलाएँ क्या बताएँ साथियोंद्वंद के बाजार मे



मुक्तक

वो हमारे पास जब भी आते हैं हमारे खास हैं अहसास ये करते हैसौ -सौ दुआएं सामने सलामती की,पीछें बर्बादी की योजना बनाते हैं



प्रकृति और हम - ( वयस्कों केलिए )

* प्रकृति और हम *(( वयस्कों केलिए गहरा सन्देश लिए ))जब एक पेड़ बीमार होता है, तो क्या करते हैं ??यदि पेड़ प्रिय है, तो उपाय करते हैं;क्या फिर, उसके तने, डालियों, पत्तों का इलाज करते हैं ??या, उसकी जड़ों पर काम करते हैं;चलो इसकी बात करते हैं, इस दिशा में कार्य करते



"पद" उद्धव मानों बात हमारी

"पद" वियोग श्रृंगार रस ऊधौ मानों बात हमारीहम कान्हा की राह निहारे, तुमने बात बिगारी।आय गयौ लै अपनी लकुटी, पढ़ते निर्गुन चारी।।जा कहना बंसी वाले से, यमुना जल बीमारी।हे साँवरिया कृष्ण मुरारी, पनघट पड़ी उघारी।।ज्ञान सिखाकर अयन चुराते, कैसे



जीवन जीना आता ही नहीं

जीवन जीना आता ही नहीं हम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ; हम को जीना आता ही नहीं। कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं। और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं। दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है,



Faiz Ahmad Faiz Shayri in Hindi - फैज़ अहमद फैज़ शायरी - गर मुझे इस का यक़ीं हो मेरे हमदम मेरे दोस्त

फैज़ अहमद फैज़ (Faiz Ahmad Faiz) उर्दू भाषा के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक थे। फैज़ की शायरी (Shayri) को न केवल उर्दू बल्कि हिंदी (Hindi) भाषी लोग भी बहुत पसंद करते है| गर मुझे इस का यक़ीं हो मेरे हमदम मेरे दोस्त, फैज़ अहमद फैज़ की सर्वा



फैज़ अहमद फैज़ की दिल-छूती 15 शायरियां - 15 Best soulful Shayri of Faiz Ahmed Faiz in Hindi

फैज़ अहमद फैज़ (Faiz Ahmed Faiz) की शायरी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया | आज उनकी मौत को तीन दशक से अधिक हो चूका है पर लोगों के दिल में वो ज़िन्दा है | "बोल, कि लब आजाद हैं तेरे बोल, जबां अब तक है तेरी" - फैज़ के कलम से निकली ऐसी ना जाने कितनी ही शायरी लोगों को जीवन



हमारे त्यौहार और हमारी मानसिकता

रहम करे अपनी प्रकृति और अपने बच्चो पर , आप से बिनम्र निवेदन है ना मनाया ऐसी दिवाली गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली को क्या कोई सरकार ,कानून या धर्म बताएगा कि " हमे पटाखे जलने चाहिए या नहीं?" क्या हमारी बुद्धि और विवेक बिलकुल मर चुकी है ? क्या हममे सोचने- समझने की शक्ति ही नहीं बची जो हम सम



हमारे अपने सफाई कर्मचारी

हमारे अपने सफाई कर्मचारी डॉ शोभा भारद्वाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता अभियान से जोड़नेके लिए जाने माने महानुभावों ,समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 2000 लोगों को पत्र लिख कर सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है इनमें पूर्व न्यायाधीश, अवकाश प्राप्त अधिकारी, वीरता पुरस्कार क



हमारी प्यारी बेटियाँ

"बेटियाँ "कहते है बेटियाँ लक्ष्मी का रूप होती है ,घर की रौनक होती है। ये बात सतप्रतिस्त सही है। इसमें कोई दो मत नहीं हो सकता कि बेटियाँ ही इस संसार का मूल स्त



श्रीनगर : एनआईए ने सैयद सलाहुद्दीन के दूसरे बेटे को गिरफ्तार किया

सूत्रों के अनुसार गुरुवारको एनआईएने श्रीनगरमें सैयदसलाहुद्दीन के दूसरे बेटे कोगिरफ्तार किया है। राष्ट्रीयजांच एजेंसी(एनआईए) ने सीआरपीएफऔर स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन में सैयदशकील अहमदके निवासपर छापामारा औरउन्हें श्रीनगरके रामब



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