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महिला होने का महत्व : Value of being a woman

महिला होने का महत्व : Value of being a woman स्त्री महिला अर्थार्थ दादी , माँ , पत्नि , बहन , बेटी, बुआ , मासी ,............आदि ..... आदि| इनके बिना घर केवल मकान होता है, घर नहीं। इनकी कमी का अहसास तब होता है, जब वे घर में नहीं होतीं या आपके साथ किसी स्त्री का सम्बंध



टिक टॉक स्टार जन्नत ज़ुबैर का गाना ज़िंदगी दी पौदी के 100 मिलियन व्यूज पार हुए | आई डब्लयू एम बज

सुंदर युवा लड़की और टिक टॉक स्टार जन्नत ज़ुबैर, जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में काफी कुछ हासिल कर लिया वो बहुत ही मेहनत करती है और इसी के प्रमाण स्वरूप वो काफी प्रसिद्ध और सफल है।जन्नत सोशल मीडिया पर भी सबकी पसंदीदा है, उनके सभी सोशल मीडिया पर मिलियन फॉलोअर्स है। उनकी इंस्ट



ये उन दिनों की बात है: नैना समीर के साथ अहमदाबाद वापस लौटने का फैसला करती है | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी के लोकप्रिय शो ” ये उन दिनों की बात है ” प्रोडक्शन शशि सुमीत ने हाल ही के एपिसोड में ड्रामा और सस्पेंस का सही मिश्रण पेश किया है।कथानक के अनुसार, समीर और नैना ने अद्भुत अभिनेत्री अरुणा ईरानी से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें प्रोत्साहित किया और उन्हें खुद की स्क्र



कहा हम कहा तुम के डॉक्टर रोहित सिप्पी प्यार के मामले में काफी पुराने विचारों के है: करण वी ग्रोवर | आई डब्लयू एम बज

करण वी ग्रोवर काफी अच्छे अभिनेता है जो सभी भावनाओं को बड़े अच्छे तरह से संभाल लेते है।करण का अभिनय करियर काफी बड़ा रहा है जिसमें उन्होंने ऐसे किरदारों को निभाया है जो चुनौतीपूर्ण रहे हैं। उनके सहज लुक और प्रदर्शन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होने अपने हर किरदार अपनी प



बॉम्बर्स मेरे जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण काम है: गौरव शर्मा | आई डब्लयू एम बज

गौरव शर्मा जिन्होंने टेलीविज़न पर चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं, अब उन भूमिकाओं और सफलता से खुश हैं जो उन्हें अपने पहले दो वेब आउटिंग के लिए मिली हैं। गौरव जिन्होंने दीया और बाती हम में एक नकारात्मक व्यक्तित्व वाले किरदार को सहजता से निभाया है, शो टोटल नादानियां में अपनी



अमन वर्मा स्टार प्लस के पौराणिक शो नमह में प्रवेश करने वाले है | आई डब्लयू एम बज

स्टार प्लस की पौराणिक शो नमह वेद राज की शून्य स्क्वेयर द्वारा प्रोड्यूस जल्द ही शुरू होने वाला है।यह मैग्नम-ओपस शो स्टार प्लस पर लॉन्च होने वाला अगला बड़ा वीकेंड कार्यक्रम है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि नमह बाईवीकली शो होगा जो शनिवार और रविवार को प्रसारित होगा।आई डब्लू एम बु



ग्राम देवता :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के प्रारम्भ में जब ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की तो अनेकों औषधियों , वनस्पतियों के साथ अनेकानेक जीव सृजित किये इन्हीं जीवों में मनुष्य भी था | देवता की कृपा से मनुष्य धरती पर आया | आदिकाल से ही देवता और मनुष्य का अटूट सम्बन्ध रहा है | पहले देवता ने मनुष्य की रचना की बाद में मनुष्य ने द



देश हमारा



जानिए कैसे बना आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, पूरी कहानी…...

साल 1989. हिंदू कुश की पहाड़ियों में दस साल अटके रहने के बाद आखिरकार सोवियत यूनियन को अपने पैर पीछे खींचने पड़े. सोवियत यूनियन की इस हार को चार दशक लंबे चले शीत युद्ध का अंत माना गया. अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन से लड़ने के लिए अमेरिका ने इस्लामिक चरमपंथी समूहों को बड़ी मात्रा में आर्थिक और सैनिक मदद



फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या के पिता राज कुमार बड़जात्या का निधन

मुम्बई में राजश्री प्रोडक्शन के राजकुमार बड़जात्या का देहांत हो गयाअधिक जानकारी के लिए: https://hindi.iwmbuzz.com/television/news/filmmaker-sooraj-barjatyas-father-raj-kumar-barjatya-passes-away-2/2019/02/21



वीरों का बसंत

वीरों का कैसा हो बसंत, कभी किसी ने बतलाया था।पर ऐसा भी बसंत क्या कभी सामने आया था?फूली सरसों मुरझाई है, मौन हुआ हिमाचल है।धरा-व्योम सब पूछ रहे, ये कैसी हलचल है?माँ भारती हुई आतंकित, कुत्सित कुटिल प्रहारो से।स्वर्ग भूमि है नर्क बनी अब, विस्फोटों से अंगारों से।।युद्ध भूमि में नहीं थे वे, जब मौत सामने



पुलवामा में CRPF जवानों पर हमले को लेकर गुस्से में देश “निंदा नहीं चाहिए अब एक भी आतंकी ज़िंदा नहीं चाहिए” की मांग

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को CRPF जवानों पर हुए हमले पर पूरा देश आक्रोश में है। देशभर में बदले की आग धधक रही है। हर हिंदुस्तानी की यही मांग है कि अब वक़्त है जवानों की शाहदर का बदला लेने का, नए भारत का निर्माण करने का जिसमें ये घर में घुसेगा भी और मरेगा भी। ये मांग सोशल मीडिया के के द्वारा



बसों, ट्रेनों, बाज़ारों में क्यों बजाते हैं किन्नर अजीब ढंग से ताली ? जाने वजह

किन्नरों को ही हमेशा समाज में अलग ही नज़रों से देखा जाता है समाज में इतने बदलाव होने के बावजूद इन लोगों को वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए। आपने किन्नरों को कई जगह देखा होगा. कभी चौराहों पर तो कभी किसी ट्रेन में. तो कभी यूं ही बाज़ार में. पर शायद कभी इन्हें आम नज़रों



ओला बौछार

ओला बौछार काले घने बादल जब अपनी जवानी मे आते हैं आसमान मे।जमीन मे मोर पपीहा खूब इतराते हैं, नृत्य करते हैं आसमान को निहार कर, कल वह भी बौरा गए ओला वृष्टि को देख कर। कल शहरी लोग पहले खूब इतराए ओलो को देख कर फिर पछते सड़क मे जब निकले ऑफिस से कार पर। किसान खुश था पानी की धार को देखकर वह भी पछताया गेंहू



"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिन नहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिन

मापनी- 1222 1222 1222 1222, समांत- आर, पदांत- के वो दिन"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिननहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिनलिखा था खत तुम्हारे नाम का वो खो गया शायदकहीं पर शब्द बिखरे हैं कहीं मनुहार के वो दिन।।उठाती हूँ उन्हें जब भी फिसल कर दूर हो जातेबहारों को हँसा कर छुप गए



इस लेख को पढ़ते ही आप नहीं रह जाएंगे सामान्य व्यक्ति

अगर हम किताबें पढ़ना शुरू करें तो पाएंगे कि इस दुनिया में जो कुछ भी नया हो रहा है वो नया नहीं है। तमाम नए विचारों को सदियों पहले से ही सोचा जा रहा है और उस पर काम भी किया जा रहा है।गौरतलब है कि हम अपने सभी विचारों को अपना मानते हैं और नया भी पाते हैं उसके बाद भी हम सा



कुछ कुछ - किस्त तीसरी ( व्याकरण - भाषा की, जीवन की : मैं और हम )

***** कुछ कुछ - किस्त तीसरी ***** *** व्याकरण - भाषा की, जीवन की *** ** मैं और हम *



"गीतिका" छा रही कितनी बलाएँ क्या बताएँ साथियों द्वंद के बाजार में क्या क्या सुनाएँ साथियों

छन्द- सीता (मापनीयुक्त वर्णिक) वर्णिक मापनी - 2122 2122 2122 212 अथवा लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा गालगा पारंपरिक सूत्र - राजभा ताराज मातारा यमाता राजभा (अर्थात र त म य र)"गीतिका" छा रही कैसी बलाएँ क्या बताएँ साथियोंद्वंद के बाजार मे



मुक्तक

वो हमारे पास जब भी आते हैं हमारे खास हैं अहसास ये करते हैसौ -सौ दुआएं सामने सलामती की,पीछें बर्बादी की योजना बनाते हैं



प्रकृति और हम - ( वयस्कों केलिए )

* प्रकृति और हम *(( वयस्कों केलिए गहरा सन्देश लिए ))जब एक पेड़ बीमार होता है, तो क्या करते हैं ??यदि पेड़ प्रिय है, तो उपाय करते हैं;क्या फिर, उसके तने, डालियों, पत्तों का इलाज करते हैं ??या, उसकी जड़ों पर काम करते हैं;चलो इसकी बात करते हैं, इस दिशा में कार्य करते



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