इजहार

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"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिन नहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिन

मापनी- 1222 1222 1222 1222, समांत- आर, पदांत- के वो दिन"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिननहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिनलिखा था खत तुम्हारे नाम का वो खो गया शायदकहीं पर शब्द बिखरे हैं कहीं मनुहार के वो दिन।।उठाती हूँ उन्हें जब भी फिसल कर दूर हो जातेबहारों को हँसा कर छुप गए



वो पहला खत मेरा "तेरे नाम का"..........

वो पहला खत मेरा "तेरे नाम का"..........वो पहला खत मेरा “तेरे नाम का”……….मेरी प्यारी (******)हर वक़्त हमें तेरी मौजूदगी का एहसास क्यूँ है,जब याद करता दिल तुझे, तूँ पास क्यूँ है…ये क्या है क्यूँ है,कुछ समझ नहीं आता,तेरे न होने से आज दिल उदास क्यूँ है…कल तेरे न आने से,मैं सा



इजहार

 मैंने भूल कीमुहब्बत में,इजहार न करने की ।  वो जानती थी उससे बावस्ता हूँ नहीं जानती थी किस तरह । सोचती थी कौन है मेरी माशूक ?मैंने उसको  उससे ही छुपाकर रखा मुझे डर था मुझे झूठा न जाने !मेरी शरीके हयात तू ही मेरी महबूब है जब बतलाया तो वो शर्म से गुलाब हो गयी । फिर बोली ,’झूठ ‘पर अब वो नयी सी लगती है





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