इंसान



राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर)

..... इंसानियत ही सबसे पहले धर्म है, इसके बाद ही पन्ना खोलो गीता और कुरान का......"जय हिन्द"



जान अभी बाकी हैं

जान अभी बाकी हैं | हरि को नहीं देखा इंसान बनाते हुए|इंसान को देख हैं हरि को बनाते हुए |अमीरों की लकड़ियाँ उनकी अस्थिमंजर हैं|उनकी अस्थिमंजर गरीबो की छत्र छाया हैं |गौर से देखा उनको चौक-चौराहो मे बैठे हुए|सवार ट्रक मे ढ़ोल लंगाड़ो मे रंग गुलाल उड़ाते हुए|जल समाधि की वजह से उनकी काया बदल गई|बची अस्थिमंजर



भारत में एक ऐसा भी मंदिर है जहां गजमुख नहीं इंसान रूप में विराज है भगवान गणेश

भारत का एकमात्र मंदिर जहां गजमुख की नहीं इंसान रूप की होती है पूजादेश में गणेश चतुर्थी बड़े धूम धाम से मनाते है. गणेश चतुर्थी का पर्व पुरे देश में मनाया जाता है यह पर्व १० दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. आपने हमेशा गणेश जी को गजराज मुख



कौन बनेगा इंसान (भाग 2 )

कथा वाचन एक बहुत बड़ी कला है और जो इस कला का माहिर है उसी का राज है. आप को अगर कथा वाचन नहीं आता तो आपकी सच्चाई भी झूठ है, और कथा वाचक की कथा में कुछ हो ना या हो पर भक्तों पर उसका असर ज़रूर पढ़ता है. भक्ति में सच्चाई को नहीं ढूंढा जाता यदि सच्चा



कौन बनेगा इंसान?

कुछ सवाल आप के नाम, इन सवालों का जवाब दे कर आप करोड़ पति तो नहीं बनेगे पर इंसान ज़रूर बनेगे. 1. अंगुलिमाल की कहानी के बारे में क्या जानते है? 2. महात्मा बुद्ध की हत्याओं का षड्यंत्र कब कब और किसने रचा था? 3. महाराजा हर्षवर्धन के बौद्ध समांगम पर हमला



कैसे समझाऊ?

कैसे समझाऊ?देश विकास कर रहा है, सोना आसमान छू रहा।किसी का आँख मुँह तिरछा ,यह सेल्फी कह रहा।पानी जमीन का घटा, पानी चाँद की गोद मे दिख रहा।मानव कर प्रकृति को बर्बाद, रहने चाँद में जा रहा।दिल्ली का जाम झेला नही जाता, हैलीकॉप्टर की बात सुन



गुलामी की जंजीर

गुलामी की जंजीरगुलामी की जंजीरों को न तोड़ पाए हैं, न तोड़ पाएंगे।पहले धरती गुलामी की जंजीरों से जकड़ी जा रही थी।और कोई न मिली फसल उगाने को तो नील उगाई जा रही थी।कोई उस वक्त को समझ न पाया, कोई बन्दी बनकर , कारागार की काल कोठरी में रात गुजर कर बहन बेटियों को बन्दी बना लेते, या प्यार के जाल में फसा कर अ



14 जुलाई 2019

अँधेरे में नहीं बल्कि अँधेरे से लड़ें ...

अन्धकार से लड़ना और अंधकार में लड़ना दोनों में ज़मीन आसमान का फ़र्क है. आज लोग अँधेरे से नहीं बल्कि अँधेरे में लड़ रहे है. आफ़ताब की रोशनी और चाँद की चाँदनी भी इस अंधकार को खत्म



मैं

इंसानियत की बस्ती जल रही थी, चारों तरफ आग लगी थी... जहा तक नजर जाती थी, सिर्फ खून में सनी लाशें दिख रही थी, लोग जो जिंदा थे वो खौफ मै यहा से वहां भाग रहे थे, काले रास्तों पर खून की धारे बह रही थी, हर तरफ आग से उठता धुंआ.. चारों और शोर, बच्चे, बूढ़े, औरत... किसी मै फर्क नही किया जा रहा, सबको काट रहे ह



धर्म की सत्यता

जिनका विश्वास ईश्वर में है वो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च में विश्वास नहीं रखते, जो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च में विश्वास रखते है वो ईश्वर में नहीं राजनीती में विश्वास रखते है. ईश्वर के नाम पर दंगे नहीं होते, दंगे धर्म



कुत्ते और इन्सान: अजय अमिताभ सुमन

मैंने ये कविता आदमी और कुत्तों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए लिखी है. मैंने देखा कि ईश्वर कुत्ते को स्वतन्त्र निर्णय लेने की शक्ति से वंचित रखा हुआ है. जबकि आदमी के पास स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता ह



उत्सव..... रिश्ते..... मानवता.

पापा के पाँव में चोट लगी थी.. कुछ दिनों से वे वैसे ही लंगडाकर चल रहे थे.. मैं भी छोटा था और तय समय पर, काफी कोशिशों के बाद भी, हमारे घर के *गणेश विसर्जन* के लिए किसी गाड़ी की व्यवस्था भी न हो सकी.. पापा ने अचानक ही पहली मंजिल पर रहने वाले जावेद भाई को आवाज लगा दी.. *



अगर दिखना चाहते हो हैंडसम, स्मार्ट और कूल, तो अपनी Shoe-Rack में रखो ये 7 टाइप्स के शूज़

"किसी महान इंसान ने कहा है कि आप किसी आदमी को उसके जूते से जज कर सकते हैं"... इसलिए आपकी बाकी चीज़ों की तरह जूते भी परफे़क्ट होने चाहिए. उसके लिए आपको ये पता होना ज़रूरी है कि कौन-से कपड़ों के साथ कैसे जूते पहनने चाहिए. वैसे तो आजकल लड़के भी फ़ैशन के मामले में बहुत आगे हैं



मानवता

मानवता ही नैतिकता का आधार है । सभी नैतिक मूल्य सत्य अहिंसाप्रेम सेवा शांति करुणा इत्यादि गुणों का मूल “मानवता” ही है । ‘मानवता’ हीनैतिकता का आधार है, जैसे कोई निर्धन, असहाय, बीमार व्यक्ति भूखा है; वहां दया सेपूरित होकर कोई सेवा करता है, भूखे को भोजन कराता है; तो



समय बड़ा “बलवान”

इंसान की नजर में, इस दुनिया में व्यवहारिक रूप में, सबसे छोटी उम्र अवधि किसकी है ? आप कहेंगे अमीबा, वाइरस, की... ! जी नहीं, श्रीमानजी !! इस दुनिया में सबसे छोटी उम्र है सुख की । क्योंकि आनंद को मातम में बदलने में कुछ भी समय नहीं लगता है



इसीलिए एक ही गोत्र में नहीं की जानी चाहिए शादी, वर्ना समाज तो क्या विज्ञान की नजरों में भी जाएंगे गिर

शादी-ब्याह को लेकर हर धर्म के अपने कुछ नियम है जिनका वे सदियों से पालन करते आ रहे हैं। हिंदू धर्म में अकसर आपने लोगों को ऐसा कहते हुए देखा होगा कि एक ही गोत्र में शादी करवाना उचित नहीं है। आखिर इस मान्यता के पीछे का असली कारण क्या है? क्यों लोग आज भी इसका पालन करते आ रहे



"दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।

"दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।खिले जहाँ इंसानियत उगता वहीँ विवेक।।जैसी मन की भावना वैसा उभरा चित्र।सुंदर छाया दे गया खिला साहसी मित्र।।अटल दिखी इंसानियत सुंदर मन व्यवहार।जीत लिया कवि ने जगत श्रद्धा सुमन अपार।।महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



जिस देश में गंगा बहती है: शैलेन्द्र

जिस देश में गंगा बहती है: शैलेन्द्रहोठों पे सच्चाई रहती है, जहां दिल में सफ़ाई रहती हैहम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैंजिस देश में गंगा बहती हैमेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता हैज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े मे गुज़ारा होता हैबच्चों के लिये जो धरती माँ, सदियों से सभी कुछ



दौरे इश्क

ना था दौरे इश्क ना है दौरे इश्क, हर दौर में हुक्म नफरत ने किया है. खातिर हुक्म अपना, ले नाम मज़हब का कभी बुतखाना कभी मस्जिद को तोड़ा है, ना बुतखाना, ना मस्जिद खुदा ने बनाई है, शैतान ने ख़ातिर- ए-दहशत इन्हे खुद बनाया है. मिटा इंसानिय



प्रकृति और इंसान

नदी,सागर ,झील या झरने ये सारे जल के स्त्रोत है. यही हमारे जीवन के आधार भी है. ये सब जानते और मानते भी है कि " जल ही जीवन है." जीवन से हमारा तातपर्य सिर्फ मानव जीवन से नहीं है. जीवन अर्थात " प्रकृति " अगर प्रकृति है तो हम है .लेकिन सोचने वाली बात है कि क्या हम है



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