जाग

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मुक्तकाव्य, वो जाग रहा है

"मुक्तकाव्य"वो जाग रहा हैहमारी सुखनिद्रा के लिएअमन चैन के लिएसीमा की चौहद्दी के लिएऔर आप! अपनी ही जुगलबंदी अलाप रहें हैंनिकलिए बाहर और देखिए सूरज अपनी जगह पर हैचाँद! अपनी रोशनी से नहला रहा हैबर्फ की चादरों पर वीर सैनिक गुनगुना रहा हैकश्मीर से कन्याकुमारी तक आवाज जा रही हैजय हिंद की हुंकार से पड़ोसी ब



एक शाम के लिए|

एक शाम के लिए|हसती मुस्कराती दिन को गुजारती|कर काम घर पर, बिस्तर सवांरती|दिन भर की आवाजे तंग करती उसे|दिन में तरह-तरह के ब्यंग भरती वह|लौटती दोपहरी, जीवन के नएपन में|हसता खिलखिलाता बचपन लौट आता|बदल कपडे, दे कटोरा, दूधभात भरा हाथ में|चौखट की माथे पर बैठ, मै कई निवाले खाती|माँ अक्सर बैठ आँगन में, पूस



पेड़-पौधे प्रकृति की आत्मा और प्राकृतिक सुंदरता के घर होते हैं

हमारा घर चार मंजिला इमारत के भूतल पर स्थित है। प्रायः भूतल पर स्थित सरकारी मकानों की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वालों के जब-तब घर भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते किसी कूड़ेदान से कम नहीं रहती है, फिर भी एक अच्छी बात यह रहती है कि यहां थोड़ी-बहुत मेहनत मशक्कत कर पेड़-पौधे लगाने के लिए जगह न



'दादी' के आते ही घर-आंगन से रूठा वसंत लौट आया ...

हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बागवानी के लिए पर्याप्त जगह न



विश्व एड्स दिवस 2018 - Essay on World Aids Day in Hindi

विश्व एड्स दिवस 2018 - Essay on World Aids Day in Hindi , world aids day 2018 theme..1 दिसम्बर विश्व एड्स दिवस (World Aids Day) के रूप मनाया जाता है | एड्स दिवस मानाने का मूल कारण लोगों को AIDS (एक्वायर्ड



जागरुकता

मैनै देखा जागरुकता ! आज की शाकाहार प्रभात फेरी मेंआपने भी कहीं देखा होगा होगा पर मैंने जो देखा अविश्वसनीय था ! लोग तमाशा देखते हैं खड़े होकर पर कोई कुछ नहीं करता शायद इस डर से कि उनका समय बर्बाद न हो जाए वे भी कहीं फस न जाए पर मैंने देखा उस अधेड उम्र की महिला को जिसकी



हमारे अपने सफाई कर्मचारी

हमारे अपने सफाई कर्मचारी डॉ शोभा भारद्वाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता अभियान से जोड़नेके लिए जाने माने महानुभावों ,समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 2000 लोगों को पत्र लिख कर सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है इनमें पूर्व न्यायाधीश, अवकाश प्राप्त अधिकारी, वीरता पुरस्कार क



भविष्य के जनक....

जल्दी चलो माँ,जल्दी चलो बावा,देर होती हैं,चलो ना,बुआ-चाचा,बन ठनकर हंसते-मुस्कराते जाते,परीक्षा फल सुनने को अकुलाते,मैदान में परिजन संग बच्चों का तांता कतार बद्ध थे,विराजमान शिक्षकों के माथे पर बल पड़े हुए थे,पत्रकफल पा,हंसते-रोते ,मात-पिता पास दौड़ लगते, भीड़ छट गई,शिक्षकों के सर से बोझ उतर गये,तभी,ती



“ अंतर्राष्ट्रीय दिवस ‘आक्रमक दुर्व्यवहार के शिकार, मासूम बच्चे ” (International Day of Innocent Children Victims of Aggression) 4 जून

....खिलने से पहले ही मुरझाता बचपन,येशोषित ये कुंठित ये अभिशप्त बचपन....आजके समाज मे बच्चों की स्थिति का अनुमान लगाने के लिए उपरोक्त दो लाइनें ही काफी है। हो सकता है कि बड़े या मध्यम वर्गीय परिवार में रहने वाले बच्चों की स्थिति आपकोसही लग



सौभाग्य से यह जीवन मिला

प्रिय मित्रों, बड़े ही सौभग्य की बात है की हमें यह जन्म एक मानव के रूप में मिला है, पृथ्वी पर निवास करने वाले पच्चासी करोड़ देवी देवताओं को भी यह सौभग्य नहीं प्राप्त होता है , गोस्वामी जी ने कहा है - बड़े भग्य मानुष तन



अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितम्बर)

आज अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस है । यूनेस्को ने पहली बार सात नवम्बर, 1965 को यह फैसला लिया था कि प्रत्येक वर्ष 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन किया जायेग



“अंतर्राष्‍ट्रीय लेवल क्रासिंग जागरूकता दिवस (ILCAD)” (धैर्य रखें..., सुरक्षित यात्रा करें...)

रेलवे समपार फाटक (लेवल-क्रॉसिंग) रेलपथ का अभिन्नभाग है । भारतीय रेल में लगभग 2 से 3 किलोमीटर के बीच एक समपार फाटक (मानवयुक्तअथवा मानवरहित) उपलब्ध है । इन फाटको पर आए दिन अनेक दुर्घटनाओ के किस्से भी समाचारपत्रों में देखने को मिलते है और इन दुर्घटनाओं के लिए हम लोग अक्सर रेलवे को हीजिम्मेदार



#जागो रे अाम आदमी

किसी शायर ने कहा है - ''कौन कहता है आसमाँ में सुराख़ हो नहीं सकता , एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .'' भारतवर्ष सर्वदा से ऐसी क्रांतियों की भूमि रहा है जिन्होंने हमेशा ''असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मृत्योर्मामृतं गम



आज हकीकत के लिए जागना होगा

शून्य में कौन मुझसे कह रहा क्या कह रहा ...कुछ सुनाई नहीं देता !सन्नाटों की अभेद दीवारें पारदर्शी तो है इक साया सा दिखता भी है कभी कुछ कहता कभी चीखता सा ...पर क्या कह रहा है कैसे जानूँ !सुनने से पहले देखना चाहती हूँ साया है किसका चेहरे की असलियत मिल जाए तो जानूँ यह विश्वास दे रहा है या चेतावनी !समय क



स्त्री शक्ति का जीता जागता रूप

( जब तक मानसिकता नहीं बदलती कोई भी परिवर्तन असंभव है .... अब आप अपने आस-पास दृष्टि डालिए, खुद को तौलिये और सच कहने का साहस कीजिये। पहले तो आप इस बात का जवाब दीजिये कि समानता से आपका क्या तात्पर्य है ? ) मैं स्त्री स्वतंत्रता की हिमायती नहीं पर स्त्री शक्ति का जीता ज



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

 मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)





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