जहर

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जुबा चुप क्यो?

जुबा चुप क्यो?आपकी खामोश जुबा ने ,महफ़िल की नज़रों में चोर बना दिया|ताकते रहे आपकी नज़रों को, कभी तो इधर उठेगी, कुछ कहेंगी|ता उम्र साथ देने का वादा करती रही, खुशियों के फूल भरती रही|खुशियों के फूलो को संभाला बहुत, आपकी एक मुस्कान के लिए|साथ जीने मरने के वादे करते रहे तुमसे, रोज प्यार पाने के लिए |लड़ते



ऐसा पदार्थ जिसे खाएं-पिएं बगैर ही हो जाए मौत

एकदम सही पढ़ा आपने एक ऐसा पदार्थ भी है जिसका स्वाद चखे बिना ही और उसका स्वाद बताए बिना ही उसको जीभ पर रखने मात्र से हो मौत हो जाती है। चलिए अब आपके आपके मन में उमड़ रहे इस सवाल का जबाव दे देते है आपने सायनाइड का नाम तो सुना ही होगा, अगर नहीं चलिए आज हम इस लेख के माध्यम से आपको इससे जुड़े तथ्यों और म



क्या सुरक्षा परिषद में चीन का वीटो भारत की कूटनीतिक हार थी ?

क्या चीन का वीटो भारत की कूटनीतिक हार थी डॉ शोभा भारद्वाज फ़्रांस अमेरिका एवं ब्रिटेन ने 27 फरवरी को सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने वीटो के अधिकार का प्रयोग किया | अमेरिका फ्रांस एवं ब्रिटेन द्वारा क्षुब्ध होकर जैश के प्रमुख मसूद अजहर को फिर से अंतर्राष्



"मुनाफे के स्वाद में मानव परास्त और खाद्यान जहरीला"

"मुनाफे के स्वाद में मानव परास्त और खाद्यान जहरीला" डूबते उतिराते धान की फसल खेत से खलिहान को तिरछे ताकते हुए, मुँह छुपाते हुए किसान के घर में ऐसे आई मानों खेत और खलिहान का कभी कोई नाता ही नहीं रहा है। अगर कभी कोई नाता था भी तो वह पराली देवी के तलाक के बाद खत्म हो गया ह



देखिए टेक्नोलोजी के नाम पर विदेशी से क्या आ रहा है और उसके क्या परिणाम सामने आ रहे है

कोई विदेशी कंपनी हमको टेक्नोलॉजी देने नहीं आ रही है और वह कभी आएंगे भी नहीं क्योंकि जो उनके पास लेटेस्ट टेक्नो



Sketches from Life: जहर

जबलपुर कैंट में हमें तीन कमरे का क्वार्टर मिला हुआ था. जैसा की आम तौर पर छावनी में होता है ऐसे चार क्वार्टरों की एक लम्बी सी बैरक थी. इस बैरक का लम्बा कॉमन बरांडा था जो बच्चों के खेल ने के काम आता था. बरांडे के आगे चार बगीचे थे जिनमें सब्ज



अभिव्यक्ति मेरी: वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।

जो इंसानियत को मारे, घर-घर लहू बहाये। वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।। ये आतिश नवा से लोग ही, मातम फ़रोश हैं, चैन-ओ-अमन का ये वतन, फिर से न डगमगाये। घोला ज़हर किसी ने या, गलती निज़ाम की, गुनहगार इस वतन के, यूँ ही न पूजे जायें। उन्हें खून की हर बूंद का, कैसे हिसाब दें, जो आँसुऔ की कीमत, अबत





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