गरीबी के आलम में,

गरीबी के आलम में,सेवा में,सौ बीगा जमीन के बाद हम गरीब थे| आज सौ गज जमीनमें बनी कोठी, अमीर होने का न्यौता देती हैं|जब पैसो की तंगी थी तब गहनों मालाओ से औरत सजी थी, आज रोल गोल्ड कोअमीरी कहते हैं| जब पीतल की थाली में खाना खाते थे तो गरीब कहे जाते थे| आजप्लास्टिक के बर्तन में खाकर अपने आप को धनी समझ रह



एलिएंट कैप्सूल - बच्चों की स्किन एलर्जी और उसका समाधान

बच्चों में स्किनएलर्जी की समस्याकाफी जल्दी होजाती है। असल में उनकीस्किन काफी नाजुकतथा कोमल होतीहै इसलिए बच्चोंकी स्किन कीदेखभाल करना बहुतआवश्यक होता है।किसी भी बच्चेमें स्किन एलर्जीके कई कारण हो सकतेहैं। कई बार यह एलर्जीकाफी दिन तक सही नहींहोती है। धूल,धूप तथा मिट्टीमें खेलने केकारण बच्चों मेंस्किन



पूजा बनर्जी नच बलिए 9 से हुई एलिमिनेट | आई डब्लयू एम बज

स्टार प्लस के लोकप्रिय शो नच बलिए 9 के निर्माता दर्शकों के स्क्रीन पर नज़र रख रहे हैं। सीज़न में एक नया मोड़ जोड़ते हुए, निर्माता ने चार वाइल्ड कार्ड को प्रवेश किया। हाल ही में, अपने पति संदीप सेजवाल के साथ भाग लेने वाली कसौटी ज़िन्दगी की 2 फेम पूजा बनर्जी घायल हो गईं। उ



दूसरी पारी

पचास साल की उम्र पूरी होने के बाद शुरू होती है दूसरी पारी।भागदौड़ भरी जिन्दगी को अलविदा कहकर पूरे करने होगे अधूरे रह गये सपने।अपनी रुचि के काम जैसे बागवानी,जरूरतमंद की मदद के लिए नरसेवा-नारायण सेवा ओ मूर्तरूप देना,सूखते रिश्तो को समय के जल से सीचना,सामाजिक सरोकार विषय पर लेखन के साथ प्रेरणादायक प्रस



अनुशासन :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन ही नहीं सृष्टि के सभी अंग - उपांगों मे अनुशासन का विशेष महत्व है | समस्त प्रकृति एक अनुशासन में बंधकर चलती है इसलिए उसके किसी भी क्रियाकलापों में बाधा नहीं आती है | दिन – रात नियमित रूप से आते रहते हैं इससे स्पष्ट है कि अनुशासन के द्वारा ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है | विचार कीजिए कि



पिंजरे का पंछी

मैं जीना चाहूं बचपन अपना,पर कैसे उसको फिर जी पाऊं!मैं उड़ना चाहूं ऊंचे आकाश,पर कैसे उड़ान मैं भर पाऊं!मैं चाहूं दिल से हंसना,पर जख्म न दिल के छिपा पाऊं।मैं चाहूं सबको खुश रखना,पर खुद को खुश न रख पाऊं।न जाने कैसी प्यास है जीवन में,कोशिश करके भी न बुझा पाऊं।इस चक्रव्यूह से जीवन में,मैं उलझी और उलझती ह



समय को पहचानें :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर मनुष्य को अनेक मूल्यवान संपदायें प्राप्त हुई हैं | किसी को पैतृक तो किसी ने अपने बाहुबल से यह अमूल्य संपदायें अपने नाम की हैं | संसार में एक से बढ़कर एक मूल्यवान वस्तुएं विद्यमान हैं परंतु इन सबसे ऊपर यदि देखा जाए तो सबसे मूल्यवान समय ही होता है | समय ही मानव जीवन का पर्याय है , मनुष्य क



समय की प्रबलता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि में ईश्वर का विधान इतना सुंदर एवं निर्णायक है कि यहां हर चीज का समय निश्चित होता है | इस धरा धाम पर सृष्टि के आदिकाल से लेकर के अब तक अनेकों बलवान , धनवान तथा सम्पत्तिवान हुए परंतु इन सब से भी अधिक बलवान यदि किसी को माना जाता है तो वह है इस समय | समय के आगे किसी की नहीं चलती है | इस सृष्ट



अधम शरीरा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस समस्त सृष्टि में जहां अनेकों प्रकार के जीव भ्रमण करते हैं जलचर , थलचर , नभचर मिला करके चौरासी लाख योनियाँ बनती है | इन चौरासी लाख योनियों में मानव योनि को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए हमारे धर्मग्रंथ इस पर अनेकों अध्यात्म वर्णन करते हुए दृष्टिगत होते हैं | प्रायः सभी धर्मग्रंथों में इस मानव शरीर को द



नर समान नहिं कवनिउ देही :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*यह संसार बड़ा ही विचित्र है | इस पृथ्वी पर रहने वाले अनेक जीव है जो कि एक से बढ़कर एक विचित्रताओं से भरे हुए हैं | इन सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य सबसे ज्यादा विचित्र है | मनुष्य की विचित्रता का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि यदि मनुष्य से यह प्रश्न कर दिया जाय कि इस संसार में सबसे दुर



दुनिया के इस मुस्लिम देश के नोट पर क्यों छपी गणपति की तस्वीर? जानिए रहस्य

देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम है और ज्यादातर घरों में बप्पा को स्थापित कर दिया गया है। हर कोई खुश है और हर किसी के मन में एक ही आस्था है कि गणेश जी घर आए हैं तो कुछ अच्छा ही करते हुए जाएंगे। कुछ लोग 3 दिन, कुछ 5, कुछ 7 तो कुछ लोग 10 दिनों के लिए घर में मूर्ति स्थापित



श्री गणेश चतुर्थी



साधना एक संग्राम है :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में आध्यात्म का बहुत बड़ा महत्व है | अध्यात्म की पहली सीढ़ी साधना को बताया गया है | किसी भी लक्ष्य की साधना करना बहुत ही दुष्कर कार्य है , जिस प्रकार कोई पर्वतारोही नीचे से ऊपर की ओर चढ़ने का प्रयास करता है उसी प्रकार साधना आध्यात्मिक सुमेरु की ओर चढ़ने का प्रयास है | साधना करना सरल नही



मृगतृष्णा :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि में जीव चौरासी लाख योनियों की यात्रा किया करता है | इन चौरासी लाख योनियों के चक्रानुक्रम में समस्त कलुषित कषाय को धोने के उद्देश्य जीव को मानव योनि प्राप्त होती है | इसी योनि में पहुंचकर जीव पूर्व जन्मों के किए गए कर्म - अकर्म को अपने सत्कर्म के द्वारा धोने का प्रयास करता है | मानव योनि म



माँ के दूध का महत्त्व :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में वैसे तो मनुष्य से भी अधिक बलवान जीव पाये जाते हैं परंतु मनुष्य ने अपने बुद्धि - विवेक , बल - कौशल से सब पर ही विजय प्राप्त की है | मनुष्य जन्म लेने के बाद इस धराधाम पर जो पहला आहार लेता है वह है "माँ का दूध" | जिस प्रकार संसार में जल के अनेक स्रोत होने के बाद भी गंगाजल को ही सर्वश्रेष्



कल्पनाशक्ति :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में एक से बढ़कर एक बलवान होते रहे हैं जिनकी तुलना नहीं की जा सकती है | यदि कोई भी बलवान हुआ है तो उसका आधार उस मनुष्य का मन ही कहा जा सकता है , क्योंकि संसार में सबसे बलवान मनुष्य का मन की कहा जाता है | सबसे बड़ी शक्ति कल्पना शक्ति के बल पर मनुष्य पृथ्वी पर रहते हुए तीनों लोगों का भ्रमण कि



जगायें आत्मविश्वास :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है | हमारा आत्मविश्वास ही हमारा मार्गदर्शन करते हुए सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देता है | जीवन के रहस्य को समझने के लिए मनुष्य को आत्मविश्वास का सहारा लेना ही पड़ता है क्योंकि जी



वैचारिक दरिद्रता :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में राजा - रंक , धनी - निर्धन सब एक साथ रहते हैं | इन सबके बीच दरिद्र व्यक्ति भी जीवन यापन करते हैं | दरिद्र का आशय धनहीन से लगाया जाता है जबकि धन से हीन व्यक्ति को दरिद्र कहा जाना उचित नहीं प्रतीत होता क्योंकि धन से दरिद्र व्यक्ति भी यदि विचारों का धनी होते हुए सकारात्मकता से जीवन यापन कर



सकारात्मक दृष्टिकोण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य में बुद्धि - विवेक विशेष रूप से परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है | मनुष्य अपने विवेक के द्वारा अनेकों कार्य सम्पन्न करता रहता है | इन सबमें सबसे महत्त्वपूर्ण है मनुष्य का दृष्टिकोण , क्योंकि मनुष्य का दृष्टिकोण ही उसके जीवन की दिशाधारा को तय करता है | एक ही घटना को अनेक मनुष्य



शिक्षा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है | शिक्षा प्राप्त किए बिना मनुष्य जीवन के अंधेरों में भटकता रहता है | मानव जीवन की नींव विद्यार्थी जीवन को कहा जा सकता है | यदि उचित शिक्षा ना प्राप्त हो तो मनुष्य को समाज में पिछड़ कर रहना और उपहास , तिरस्कार आदि का भाजन बनना पड़ता है | यदि शिक्षा समय रहत



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