जिंदगी

जब सवाल को मिल जाए मोक्ष

जब हंगामे में सवालों का वजूद तक ख़त्म हो जाता हो, तब जवाब कहां से मिलेगा. सवालों के चक्रव्यूह में घिरी जिंदगी, महाभारत के अभिमन्यु सरीखी हो गई है. न तो अभिमन्यु चक्रव्यूह तोड़ पाया और न ही जिंदगी को सवालों के जवाब मिलने वाले है. बात सीधी सी है सवाल होते ही जब हंगामा हो जाता है, तब जवाब से पहले सवाल



जिंदगी के १० ऐसे सच जिसका साइंस के पास नहीं कोई जवाब

जिंदगी के १० ऐसे सच जिसका साइंस के पास नहीं कोई जवाब



कविता

जिंदगी का कर सुक्रिया, मानव का जन्म लिया .जिंदगी मिली बड़े भाग्य से, इसको ना काट दुर्भाग्य से .करना है तो कर समाज सेवा, तभी तुझे मिलेगा मेवा,डर तू ऊपर वाले से , जिंदगी देने वाले से .जिंदगी का कर सुक्रिया, मानव का जन्म लिया.......लोगो से प्यार कर , जिंदगी सवार कर



नशा

बवाना जे जे कालोनी की नशे के खिलाफ उठिते आवाज के साथ अगर आप हे तो लाइक देकर हमारा साथ दे. अब नही रहिगा नशा कर देगे नशे को दफा नशे से मरते लोगो को बचना हे



बिछुडन ा

मिलकर बिछुड़ना लोगों का जिदंगी का दस्तूर बन गया , जिंदगी का वो हर एक पल जीवन का इतिहास बन गया , कारवां गुजर गया पढते पढ़ते इस इतिहास को , मालूम हु यी ना राज बिछुड़ने का , सिर्फ ये प्रकृति के बदलाव का बहाना बन गया ।। धन्यवाद



मालूम नहीं

जब दर्द न था,जिंदगी का पता न था । अब लंबी उम्र की दुआ ,ख़ौफ़ज़दा करती है । अपनी मर्ज़ी से मैं, न आया, न जाऊँगा । होगी विदाई बिना मर्जी । पुकारता हूँ तो वो नहीं सुनता ,क्यों आवाज़ दूं उसे ,ए जिंदगी । दिखलाके आइना ,चेहरा उसे दिखाए कोई । सुनते है बड़ा मोम है । मैं बेतजुर्बा हूँ । मुझे मालूम नहीं ।



ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

Hindi Sahitya | Hindi Poems | Hindi Kavitaकल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान हैबीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सकेजिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अनजान हैगर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाहअब आज के इस दौर में दीखते कहा



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट " जिंदगी जिंदगी" ओपन बुक्स ऑनलाइन वेव साईट में

मेरी पोस्ट " जिंदगी जिंदगी" ओपन बुक्स ऑनलाइन वेव साईट मेंप्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि मेरी पोस्ट  " जिंदगी जिंदगी " ओपन बुक्स ऑनलाइन    वेव साईट में शामिल की गयी है।  आप सब अपनी प्रतिक्रिया से अबगत कराएं करायें। लिंक नीचे दिया गया है।Your blog po



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (सांसों के जनाजें को तो सब ने जिंदगी जाना ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

मेरी पोस्ट (सांसों के जनाजें को तो सब ने जिंदगी जाना ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी पोस्ट , (सांसों के जनाजें को तो सब  ने जिंदगी जाना) जागरण जंक्शन में प्रकाशित हुयी है , बहुत बहुत आभार जागरण जंक्शन टीम। आप भी अपन



ग़ज़ल (जिंदगी का ये सफ़र ) - Sahityapedia

ग़ज़ल (जिंदगी का ये सफ़र )कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक शक्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान हैबीती उम्र कुछ इस तरह की खुद से हम न मिल सकेजिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अनजान हैगर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाहअब आज के इस दौर में दीखते नहीं इन्सान हैइक दर्द का



जिंदगी के उस मोड़ पर

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रियजिंदगी के उस मोड़ पर(यह कविता एक प्रेमी और प्रेमिका के विचारो की अभिव्यक्ति करती है जो आज एक दूसरे से बुढ़ापे मे मिलते है ३० साल के लंबे अरसे बाद)जिंदगी के उस मोड़ पर आकर मिली हो तुमकी अब मिल भी जाओ तो मिलने का गम होगा|माना मेरा जीवन एक प्यार का सागरकितना भी निकालो कहा इससे कु



जि

जिंदगी कभी रूकती नहीं हालत गंभीर होते है





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