जिससे

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पिता हमारे वट वृक्ष समान........

“पिता हमारे वट वृक्ष समान” किसी ने सही ही कहा हैं कि ‘पिता न तो वह लंगर होता हैं जो तट पर बांधे रखे, न तो लहर जो दूर तक ले जाएँ. पिता तो प्यार भरी रौशनी होते हैं,जो जहाँ तक जाना चाहों,वहां तक राह दिखाते हैं.’ऐसे ही मेरे पिता हैं,जो चट्टान की तरह दिखने वाले पर एहसास माँ की तरह.घर-परिवार का बोझ



शिक्षित होने का अर्थ, नहीं होने का अनर्थ

गिरिजा नंद झाहम नाहक ही इस बात को ले कर हकलान होते रहे हैं कि यह देश निरक्षरों का देश है। अनपढ़ और गंवारों का देश है। देश को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि यहां के ‘उच्चतम’ शिक्षा प्राप्त नौजवानों में किसी काम के छोटे या बड़े होने में भेद नहीं करते। शिक्षा अपनी जगह और काम अपनी जगह। शिक्षा इंसान को समझ





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