मेरे लिए पर्याप्त है ( लघु )

मेरे लिए पर्याप्त है ( लघु ) पूरा रास्ता,नहीं मालूम;वांछनीय गंतव्य, जहां जाना है, नहीं मालूम; एक बार में,



"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरण है अटल सच दिनकर किरण

शीर्षक- जीवन, मरण ,मोक्ष ,अटल और सत्य"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरणहै अटल सच दिनकर किरणमाया भरम तारक मरणवन घूमता स्वर्णिम हिरणमातु सीता का हरणक्या देख पाया राम नेजिसके लिए जीवन लियादर-बदर नित भ्रमणन कियाचोला बदलता रह गयाक्या रोक पाया चाँद नेउस चाँदनी का पथ छरणऋतु साथ आती पतझड़ीफिर शाख पर किसकी कड़ी



जीवन यात्रा

जीवन यात्रा कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापे की ओर।. . . . जवानी से बुढ़ापे की ओर।। जीवन में आते हैं, कुछ ऐसे क्षण;शादी, सेवनिवृत्ती हैं, कुछ ऐसे ही क्षण। जब बदल जाती है जिंदगी, एकदम से;. . . . एकदम से;सिर्फ एक कदम च



नजरिया और जीवन

भूमिका : हम देखते हैं, पाते हैं कि अलग अलग व्यक्ति अलग अलग ढ़ंग से, अपने अपने ढ़ंग से ही जीवन जी रहे हैं। बहुत मौटे तौर पर, हम इसको 3 श्रेणी में रख सकते हैं या 3 संभावनाओं के रूप में देख सकते हैं। हरेक के जीवन में हर प्रकार के क्षण आते हैं, उतार चढ़ाव आते हैं, पर कुल मि



मैं भटकता रहा

*गहराई की छिपी वर्जनाओं के स्वर*( "स्वयं पर स्वयं" से )मैं भटकता रहामैं भटकता रहा; समय, यूं ही निकलता रहा;मैं भटकता रहा। उथला जीवन जीता रहा;तंग हाथ किये, जीवन जीता रहा।न किसी को, दिल खोल कर अपना सका;न किसी का, खुला दिल स्वीकार कर सका;न आपस की, दूरी मिटा सका;न सब कुछ दे सक



क्या चाहिए जीवन केलिए

क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में



जीवन जीना आता ही नहीं

जीवन जीना आता ही नहींहम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ;हम को जीना आता ही नहीं।कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं।और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं।दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है, पर स



जीवन जीना आता ही नहीं

जीवन जीना आता ही नहीं हम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ; हम को जीना आता ही नहीं। कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं। और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं। दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है,



यह मेरा जीवन कितना मेरा है ?

** यह मेरा जीवन कितना मेरा है ? ** यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, वो किस का है? वो किस किस का है? हम में से प्रत्येक यह प्रश्न, इस तरह के प्रश्न स्वयं से कर सकता है। यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, मैं उसको मेरा कहता हूं, समझता हूं। परयह मेरा जीवन कितना मेरा है?हम कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन है;कौन नहीं कहता



यह मेरा जीवन कितना मेरा है ?

** यह मेरा जीवन कितना मेरा है ? ** यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, वो किस का है? वो किस किस का है? हम में से प्रत्येक यह प्रश्न, इस तरह के प्रश्न स्वयं से कर सकता है। यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, मैं उसको मेरा कहता हूं, समझता हूं। पर यह मेरा जीवन कितना मेरा है? हम कह



19 नवम्बर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस और भारत

19 नवम्बर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस ‘भारत में’ ? डॉ शोभा भारद्वाज 19 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने का चलन 1960 से चल रहा है | पुरूष दिवस की विशेष रूप से शुरुआत त्रिनिदाद एवं टोबागो में की गयी थी अब यह 70 देशों में मनाया जाता है भारत में भी 19 नवम्बर 2007 के दिन सेव इंडियन



जीवन और परम्परा

जीवन और परम्परा परम्परा होती है परम्परा, जीवन नहीं; परम्परा होती है जीवन केलिए, परम्परा केलिए जीवन नहीं; जीवन प्रथम है परम्परा नहीं; जो परम्परा जीवन विरोधी हो जाए उसको कभी मानना नहीं; समय में पीछे झांक



मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जीवनी

जन्म: 11 नवम्बर, 1888निधन: 22 फरवरी, 1958उपलब्धियां: 1923 और 1940 में कांग्रेस के अध्यक्ष, स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्रीमौलाना अबुल कलाम आज़ाद का असली नाम अबुल कलाम ग़ुलाम मुहियुद्दीन था। वह मौलाना आज़ाद के नाम से प्रख्यात थे। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के प्रमुख स्वत



जीवन एक यात्रा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*जीवन एक यात्रा है | इस संसार में मानव - पशु यहाँ तक कि सभी जड़ चेतन इस जीवन यात्रा के यात्री भर हैं | जिसने अपने कर्मों के अनुसार जितनी पूंजी इकट्ठा की है उसको उसी पूंजी के अनुरूप ही दूरी तय करने भर को टिकट प्राप्त होता है | इस जीवन यात्रा में हम खूब आनंद लेते हैं | हमें इस यात्रा में कहीं नदियां घ



दिल तो बच्चा है जी

ज़िंदगी हर पल एक चलचित्र की तरह अपना रंग रूप बदलती रहती है।है न , जैसे चलचित्र में एक पल सुख का होता है तो दुसरा पल दुःख का ,फिर अगले ही पल कुछ ऐसा जो हमे अचम्भित कर जाता है और एक पल के लिए हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि "क्या



जीवन में नैतिकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जीवन जीने के लिए हमारे महापुरुषों ने मनुष्य के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं | इन नियमों के बिना कोई भी मनुष्य परिवार , समाज व राष्ट्र का सहभागी नहीं कहा जा सकता | जीवन में नियमों का होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि बिना नियम के कोई भी परिवार , समाज , संस्था , या देश को नहीं चलाया जा सक



विश्वास एवं विश्वासघात :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के अखिलनियंता देवों के देव महादेव को शिव कहा जाता है | शिव का अर्थ होता है कल्याणकारी | मानव जीवन में सबकुछ कल्याणमय हो इसके लिए शिवतत्व का होना परम आवश्यक है | शिवतत्व के बिना जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता | शिव क्या हैं ?? मानस में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान शिव को विश्वास का स्



सनातन धर्म का दर्शन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के आर्षग्रंथों (गीतादि) में मनुष्य के कल्याण के लिए तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है :- ज्ञानयोग , कर्मयोग एवं भक्तियोग | मनुष्य के लिए कल्याणकारक इन तीनों के अतिरिक्त चौथा कोई मार्ग ही नहीं है | प्रत्येक मनुष्य को अपने कल्याण के लिए इन्हीं तीनों में से किसी एक को चुनना ही पड़ेगा |



वो लडकी

क्या दोष था मेरा बस मैं एक लडकी थी अपना बोझ हल्का करने का जिसे बालविवाह की बलि चढा दिया मैं लिख पढकर समाज का दस्तूर मिटा एक नई राह बनाना चाहती थी मजबूर, बेवश,मंडप की वेदी पर बिठा दिया दुगुनी उम्र के वर से सात फेरे पडवा दिए वक्त की मार बिन बुलाए चली आई छीट की चुनरिया के सब रंग धुल गए कल की शुभ लक्ष



भुलकर भी ना दान करें ये 7 चीज़े, वरना जीवन में आ जाएंगी हर तरह की परेशानियां

आप तो ये सभी जानते ही होंगे की दान पुराणों और शास्त्रों में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है फिर किसी चीज का दान हो. दान करने से मनुष्य को अनचाही समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है चाहे वो कन्या का दान क्यों न हो लेकिन अगर आपसे कही अनजाने में किसी गलत चीज का दान हो गया तो उसका अ



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