जज

सुमन पवन बोदानी बनी पाकिस्तान की पहली हिन्दू महिला जज, रचा इतिहास

पाकिस्तान में लड़कियों के लिए कई कड़े नियम होते हैं। वहां रहने वाले लोगों को इन नियमों को मानना भी होता है, लेकिन कहते हैं ना कि जहां चाह वहां राह। एक ऐसा ही वाक्या पाकिस्तान में घटा है जिसके चलते वहां पर पहली बार कोई हिंदू महिला जज बनी हैं। बता दें सुमन पवन बोदानी नाम की ये महिला पहली महिला सिविल ज



स्वाति बरूआ : असम की पहली और देश की तीसरी जज जिन्होंने LGBT समुदाय को……

न्यायपालिका प्रजातंत्र के चार स्तम्भों में से एक है। न्यायपालिका ही वो जगह है जहाँ हर किसी को इंसाफ मिलता है और अपने हक़ मिलते है। आज उसी न्यायपालिका में अपने हक़ की लड़ाई हमेशा लड़ती आ रहीं ट्रांसजेंडर स्वाति बरूआ न्याय की कुर्सी पर बैठ के न्याय करेंगी।बता दें कि 26 वर्षीय स्वाति अब असम की पहली और देश



जस्टिस रंजन गोगोई की कुल संपत्ति जानकर आपके होश उड़ जायेंगे !

आम धारणा है कि सुप्रीम कोर्ट के सफल वरिष्‍ठ वकील एक दिन में 50 लाख रुपये से भी ज्‍यादा कमा लेते हैं. उनकी तुलना में सुप्रीम कोर्ट के एक जज को मोटेतौर पर एक लाख रुपये महीना वेतन मिलता है. हालांकि ये भी सही है कि भत्‍तों और आवास की सुविधा के साथ-साथ उनको कई सहूलियतें मिलती हैं. संभवतया इसी कड़ी में अट



गोपालदास नीरज जी - श्रद्धांजलि

काव्य मंचों के अपरिहार्य ,नैसर्गिक प्रतिभा के धनी,प्रख्यात गीतकार ,पद्मभूषण से सम्मानित,जीवन दर्शन के रचनाकार,साहित्य की लम्बी यात्रा के पथिक रहे,नीरज जी का जन्म उत्तर प्रदेश के जिला इटावा के पुरावली गांव में श्री ब्रज किशोर सक्सेना जी के घर ४ जनवरी,१९२५ को हुआ था.गरीब परिवार में जन्मे नीरज जी की ज



जज नियुक्ति -सरकार का दखल बंद हो

जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार व् सुप्रीम कोर्ट में विवाद फिर से गहरा गया है ,जहाँ सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम जजों के नाम की सिफारिश नियुक्ति हेतु कर पहली पसंद जाहिर करता है वहीँ दूसरी व् अंतिम पसंद केंद्र सरकार की होती है जिसके चलते कोलेजियम द्वारा की गयी छंटनी और संक्षिप्त



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को एक देशभक्त महिला अधिवक्ता का खुला पत्र

बहुत सह लिया ,सुन लिया ,सारी परिस्थितियां अपने क्षेत्र के पक्ष में होते हुए मात्र राजनीतिक स्थिति खिलाफ होते हुए कम से कम मेरा मन सब कुछ गंवाने को गंवारा न हुआ क्योंकि न केवल इसमें मात्र मेरे क्षेत्र के आर्थिक हितों की हानि है बल्कि इसमें जनता के न्यायिक हित भी छिन रहे है



खुशियों का फैसला

खुशियों का फैसला जो भावना मानवता के प्रति अपना फर्ज निभाने से रोकती हो क्या वो धार्मिक भावना हो सकती है? जो सोच किसी औरत के संसार की बुनियाद ही हिला दे क्या वो किसी मजहब की सोच हो सकती है? जब निकाह के लिए लड़की का कुबूलनामा जरूरी होता है तो तलाक में उसके कुबूलनामे को अ



दिल्ली हाईकोर्ट की पहली महिला जज लीला सेठ नहीं रहीं

पूर्व न्यायाधीश लीला सेठ का आज निधन हो गया। वे देश में हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला थीं। 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। उन्होंने आज नोएडा में अंतिम सांसें लीं। पिक दि हिन्दू जस्टिस लीला सेठ के बेटे विक्रम सेठ देश के सबसे जाने-माने लेखको





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