कबूल

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श्री गुरु गोविन्द सिंह जी प्रकाश पर्व

श्री गुरु गोविन्द सिंह जी प्रकाश पर्व डॉ शोभा भारद्वाज पहले मरन कबूल कर जीवनदी छड़ आस श्री गुरु गोविंद सिंह जी का मूल मंत्र था यह तरक्की का मूल मंत्र हैउन्होंने वीरों की वीरता का आह्वान करते हुए निराश देश में ऐसी हुंकार भरी हर बाजूफड़क उठीचिड़ियाँ तो मैं बाज लड़ाऊँ ,सवा लख से एक लड़ाऊँ ,ताँ गोविन्दसिं



तुझे कबूल इस समय

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियपरिस्थितियाँ नही है मेरी माकूल इस समयतू ही बता कैसे करूँ तुझे कबूल इस समय ||इशारो मे बोलकर कुछ गुनहगार बन गये हैलब्जो से कुछ भी बोलना फ़िज़ूल इस समय ||परिवार मे भी जिसकी बनती थी नही कभीक्यो खुद को समझता है मक़बूल इस समय ||इंसान से इंसान की इंसानियत है लापतादिखता नही खुदा मुझे





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