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कार्डो के अधीन जिंदगी

कार्डो के अधीन जिंदगी मानव जीवन जीने के लिए मेहनत करता था| अपना पेटभरने के साथ और दो चार लोगो का पेट भर लेता था| वह अपनी पहचान के लिए कभी सरकार केअधीन नही होता था| नेक ईमानदारी से जीने के लिए किसी प्रमाणपत्र की जरुरत नहीं थी|जब शासन और शासक का दबदबा बना तब से मानव जीवन बदहाल होता जा रहा हैं| लोगो का



बात और थोड़े दिन की।

बात और थोड़े दिन की।चुरा लो और क्या चुराओगे?पूछेगीं नज़रे,तो क्या बताओगे?जुबान चुप होगी, होठ सिल जाएंगे।मयते कब्र मे दफ़न हो जाएंगी।अब वक्त शुरू हुआ हैं, विलय का।बैंक ही नहीं सबकुछ विलय हो जाएगा।चलता रहा यू ही कारवां, आने वाली पीढ़ियाँ भी विलय हो जाएंगी।खोजते रहना जाति, धर्म, जब इंसानियत ही विलय हो जाएग



लाल गुलाब कब्र में सोई अनजान लड़की के नाम

लाल गुलाब कब्र में सोयी अनजान लड़की के नाम डॉ शोभा भारद्वाज “यह प्यार था या खुदगर्जी जिसमें माँ बाबा का प्यार गौण हो गया |हर वैलेंटाइ





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