कही

‘‘कुंभ’’ ‘‘महाकुंभ’’ और ‘‘अर्धकुंभ’’ में क्या कोई अंतर हैं?

प्रयागराज (इलाहबाद) में मकर संक्र्राति से ‘‘अर्धकुंभ’’ प्रारंभहुआ है। लेकिन इस अर्धकुंभ को केन्द्रीय सरकार से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार व समस्तमीडिया चाहे वह प्रिंट हो या इलेक्ट्रानिक इसे कुंभया महा!कुंभ कहकर महिमा-मंडित कर रहे हैं। इस ‘‘कुंभ’’ के जबरदस्तप्रचार-प्रसार के कारण ही मुझे भी यह शक हु



अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते

अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देतेजहाँ वालों को हम अपने, इशारो पर नचा देते||पहनते पाव मे सेंडल, लगते आँख मे काजलबनाते राहगीरो को, नज़र के तीर से घायल ||मोहल्ले गली वाले, सभी नज़रे गरम करतेहमे कुछ देख कर जीते, हमे कुछ देख कर मरते||हमे जल्दी जगह बस मे, सिनेमा मे टिकट मिलतीकिसी की जान कसम से, हमारी



वो कोई अनकही सी कहानी....

वो कोई अनकही सी कहानी लगती है|उस बागबान कि की हुई बागबानी लगती है|उसे देखते ही मन्त्ऱमुग्ध हो जाये लाखों दिल ,वो जवां रितु राज की जवानी लगती है|





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