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दो सोने की दीनारें

दो सोने की दीनारें डॉ शोभा भारद्वाज सोमदत्त जी के मित्र अखबार में उनकी शादी केविज्ञापन के लिए उचित शब्द ढूंढ रहे थे लेकिन सोमदत्त जी की शर्त थी महिला ज़िंदादिल एवं हंस मुख होनी चाहिए, कई महिलाओं ने सम्पर्क किया सोमदत्त जी मिलने भी गयेसभी ब



अन्नदाता ,पेशा खेती अन्न उगाता

अन्न दाता,पेशा – खेती ,अन्न उगाताडॉ शोभा भारद्वाज एक हिस्से में महिलाएं लाल झंडा लेकर बैठी थी किसान आन्दोलन मेंमाओवादियों का प्रदर्शन क्यों ? एकमहिला स्टेज पर रूदाली बनी मातम जिसे पंजाब में स्यापा कहते हैं करती हुई बैन भररही थी ‘ह्य - ह्य मोदी मर जा तू’ मौलिक अधिकार में अभिव्यक्ति कीस्वतन्त्रता के अ



भगवान

होड़ लगी है भगवान तेरे दर पर सीष झुकाने की माँ बाप से लड़कर ही सही जल्दी है तेरे दर पर आने की होड़ लगी है भगवन..... भूके को एक रोटी न दे पर जल्दी है तेरा भोग लगाने की होड़ लगी है भगवन ........ प्या



‘विकसित’’ यूपी में ‘‘विकास‘‘ ‘‘राज‘‘ के साथ ‘‘ अराजकता राज‘‘ भी चल रहा है!

जिस बात की आशंका ‘‘गैंगस्टर’’ विकास दुबे की गिरफ्तारी के समय उत्पन्न हो रही थी व कतिपय क्षेत्रों में व्यक्ति भी की गई थी, वह अंततः चरितार्थ सही सिद्ध हुई। मुठभेड़ की घटना के पूर्व ही माननीय उच्चतम न्यायालय में एक वकील द्वारा दायर याचिका में भी उक्त आंशका व्यक्त की गई थी। यह आशंका भी व्यक्त की जा रही



अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ( संस्मरण )

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (संसमरण )डॉ शोभा भारद्वाजसिंगापूर के बाशिंदों को फिटनेस का बहुत शौक है वह हर वक्त लम्बी सैर करते या साईकिल चलाते नजर आते | कोरोना काल में भी उनका साइकिल चलता रहा मैं कुछ दिन सिंगा



वर्क-फ्रॉम-होम

वेबसाइट- jobsforher.comयह जॉब पोर्टल खासतौर से उन महिलाओं के लिए डिजाइन किया गया है, जो अपने कॅरियर से कुछ समय ब्रेक लेने के बाद दोबारा जॉब की तलाश में हैं। आपको इस पोर्टल पर ज



वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीर पराई जान रे ( स्वच्छता अभियान )

वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीरपराई जान रे (स्वच्छता अभियान ) डॉ शोभा भारद्वाज महात्मा गाँधी जी की 150 वींजयंती के अवसर पर सूर्या संस्थान नोएडा में आयोजित सर्वधर्म समभाव गोष्ठी के अवसरपर विभिन्न धर्म गुरु के भाव पूर्ण प्रवचनों को सुनने का अवसर मिला | सफाईकर्मचारियों द्वारा तैयार जलपान सबने गृहण किया



मैं तेरे साथ जी न सका ,अकेला मर तो सकता हूँ

मैं तेरे साथ जी नहीं सका, अकेलामर तो सकता हूँ डॉ शोभा भारद्वाज रिसेटेलमेंट कालोनी के छोटेप्लाट में बने चार मंजिला घर में हा –हाकार मचा था उस घर के जवान बेटे ने फांसीलगा ली थी घर का कमाऊ बेटा तीन भाई पाँच बहनों का भाई अंधे पिता ,बीमार माँ कासहारा जिसने भी सुना हैरान रह गया फांसी के बाद लम्बी गर्दन



"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहे चाहतों के लिए शोर करते रहे

वज़्न--212 212 212 212, अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— करते, (अते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहेचाहतों के लिए शोर करते रहेकारवाँ अपनी मंजिल गया की रुकाकुछ सरकते रहे कुछ फिसलते रहे।।चंद लम्हों की खातिर मिले थे कभीकुछ भटकते रहे कु



"गीतिका" याद कर सब पुकार करते हैं जान कर कह दुलार करते है

मापनी, 2122 1212 22/112, समान्त- आर, पदांत- करते हैं"गीतिका" याद कर सब पुकार करते हैंजान कर कह दुलार करते है देखकर याद फ़िकर को आयीदूर रहकर फुहार करते है ।।गैर होकर दरद दिया होगा ख़ास बनकर सवार करते हैं।।मानते भी रहे जिगर अपनाधैर्य निस्बत निहार करते है।।लौट आने लगी हँसी मुँहपरमौन महफ़िल शुमार करते हैं।



"गज़ल" चलो जी कुछ ख़ता करते हैं इशारों में

वज़्न- 1222 12222122 2, काफ़िया-आ, रदीफ़ - " करते हैं इशारोमें""गज़ल"चलो जी कुछ ख़ताकरते हैं इशारों मेंबवंडर ही खड़ा करतेहै इशारों मेंकहाँ तक चल सकेंगेदिनमान चुप होकरजलाते है अगन दीयाहै इशारों में।।नयी जब रोशनी होगीतम फ़ना होगाउड़ाते हैं वोफतिंगा हैं इशारों में।।भरा पानी शहर मेंले आग मत जानाबुझे मन का ठिकान



दोस्त इतने जरुरी क्यों होते हैं |

इंसान इस दुनिया में ईश्वर का बनाया बहुत खूबसूरत तोहफा हैं जो की अपने माता पिता की बदौलत इस दुनिया में कदम रखता हैं | माता पिता अपनी ख़ुशियों को भूला कर अपनी औलाद को सब खुशियाँ प्रदान करता हैं | लेकिन इतना करने के बाद भी उस इंसान को कोई ऐसा चाहिये होता हैं इस से वह इंसान वो हर बात बता सके जो



उत्तम क्षमा, सबको क्षमा, सबसे क्षमा

उत्तम क्षमा, सबको क्षमा, सबसे क्षमाक्षमावाणी पर्व का अपना एक अलग ही महत्व होता है। क्षमा पर्व हमें सहनशीलता से रहने की प्रेरणा देता है।अपने मन में क्रोध को पैदा न होने देना और अगर हो भी जाए तो अपने विवेक से, नम्रता से उसे विफल कर देना। अपने भीतर आने वाले क्रोध के कारण को



03 सितम्बर 2015


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