मुक्तक

जाने कैसा घुटन भरा अँधेरा है , सकल कारवां विपदाओं ने घेरा है | पथ दर्शक सब दरबारी चारण हुये , किससे पूछें कितनी दूर सवेरा है | 2 मैंने उगता छिपता सूरज देखा है ,क्षितिज नहीं कुछ भी बस भ्रम की रेखा है | तुम शासन के प्रगति आंकड़े



कविता खुशबू का झोंका

कविता खुशबू का झोंका---------------------------- कविता खुशबू का झोंका, कविता है रिमझिम सावन कविता है प्रेम की खुशबू, कविता है रण में गर्जन कविता श्वासों की गति है, कविता है दिल की धड़कन हॅंसना रोना मुस्काना, कवितामय सबका जीवन कविता प्रेयसी से मिलन है, कविता अधरों पर चुंबन कविता महकाती सबको, कविता



समंदर के उस पार

ये वही जगह है जहाँ पहली दफा मैं उससे मिली थी , हर शाम की तरह उस शाम भी मैं अपनी तन्हाई यहाँ काटने आई थी ,मुझे समंदर से बातें करने की आदत थी ,और मैं अपनी हर एक बात लहरों को बताया करती थी ,अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे समंदर के उस पा



शायरी

लोगों ने कहा , बहुत किताबी बनती हो , हकीकत में जीना क्यों नहीं सीखती है ? उन्हें क्या पता , मुझ जैसों की कहानी से ही तो किताबें बनती है ा



विज्ञापन

कविताविज्ञापनविजय कुमार तिवारीजागते ही खोजती है अखबार,झुँझलाती है-कि जल्दी क्यों नहीं दे जाता अखबार। अखबार में खोजती है-नौकरियों के विज्ञापन। पतली-पतली अंगुलियों से,एक -एक शब्द को छूती हुई,हर पंक्ति पर दृष्टि जमाये,पहुँच जाती है अंतिम शब्द तक। गहरा निःश्वांस छोड़ती है



हर एक साँस मैं तुम्हे लौटा दूँगी

सबकी नज़रों में सबकुछ था मेरे पास , लेकिन सच कहूँ तो खोने को कुछ भी नहीं था मेरे पास ,एक रेगिस्तान सी जमीन थी ,जिसपर पौधा तो था लेकिन सब काँटेदार ,धूप की गर्दिश में मुझे मेरी ही जमीन तपती थी ,कुछ छाले थे ह्रदय पर ,जो रेत की छुअन



नन्ही परी

जिंदगी की खिड़की पे सुबह हुई,खुशियों की एक किरण हमें जगाने आई है।ख्वाबों के फूल खिलते हैं यहां,इस बागबान को मोहब्बत से सजाने आई है।यादों को भुला देते हैं हम वक्त के साथ चलते हुएअब हर लम्हें को यादगार बनाने आई है।जिंदगी में कोई कमीं महसूस ना हुई हमें,अब सच्ची खुशियों का राज बताने आई है।हारी-थकी हुई थी



शुक्रिया

ऐ ! मेरे मधुमेह !तुमने दी मेरी ज़िन्दगी बदल, खाने, पीने और रहने में जब दी तुमने दख़ल । मैं जी रही थी बेख़बर ,स्वास्थ्य की थी न कदर। जब तुमने ताकीद दी, शुरू अपनी परवाह की ।जीने का आया कुछ सलीका, अपनाया योग का भी तरीका। अब खुद को भी देती समय, जीवन



चलता रहा मैं

उम्मीदों के साए में पलता रहा मैं,अपने जख्मों पर मरहम मलता रहा मैं,जिंदगी गोल राहों पर घुमाती रही मुझे,और चाहत का हाथ थामकर चलता रहा मैं।हर चाहत के लिए पतंगे सा जलता रहा मैं,मुट्ठी भर जीत के लिए मचलता रहा मैं,हीरे-सी तेज चमक लेकर भी आंखों में ,हर श्याम को सूरज सा ढलता रहा मैं।दर्द को खामोशी से कुचलता



सच कहूँ तो आज बाबा की मजबूरी सी हूँ

आज फिर मैं बोझ सी लगी हूँ , यूँ तो मैं बाबा की गुड़िया रानी हूँ ,पर सच कहाँ बदलता है झूठे दिल्लासों से ,सच कहूँ तो आज बाबा की मजबूरी सी हूँ ा उनके माथे की सिलवटें बता रही है ,कितने चिंतित है मगर जताते नहीं है वो ,अपनी गुड़िया को ए



मैं करती हूँ नृत्य

मैं करती हूँनृत्यदोनों हाथ ऊपरउठाकर, आकाश की ओरभर लेने कोसारा आकाश अपने हाथों में |चक्राकार घूमतीहूँ कई आवर्तनघूमती हूँ गतों और परनोंके, तोड़ों और तिहाइयों के |घूमते घूमते बनजाती हूँ बिन्दु हो जाने को एक ब्रह्माण्ड केउस चक्र के साथ |खोलती हूँ अपनीहथेलियों को ऊपर की ओर बनाती हूँनृत्य की एक मुद्रादेने



जिंदगी

जिंदगी एक मौका है कुछ कर दिखाने का,एक बढ़िया रास्ता है खुद को आजमाने का,मत डरना कभी सामने आई मुसीबत से,कुदरत का इंसान पर किया एहसान जिंदगी है।धर्म-जात में बाँट दिया संसार को कुछ शैतानों ने,दिलों को बाँट दिया नफरत की हदों से,सहुलियत के लिए बनाई थी ये सरहदें हमने,मगर इंसान को मिली असली पहचान जिंदगी है।



चुनावी मौसम में

चुनावी मौसम में झूठ पर झूठ बोली जाएगी,खाई जाएगी,परोसी जाएगी,झूठ चासनी में डुबायी जाएगी। बड़े प्यार से खिलायी जाएगी। उसकी बन्दिशें हटायी जाएंगी। चुनाव की होली है। कई हफ्तों खेली जायेगी। कीचड़ उछाल खेली जायेगी। झूठ को मौका है अभी जी भर के इतराएगी । आखिर में उसकी असली जगह जनमत द्वारा दिखा दी जायेगी।



मेरे देश का किसान

किसी ने उसे हिंदु बताया,किसी ने कहा वो मुसलमान था,खुद को मौत की सजा सुनाई जिसने,वो मेरे देश का किसान था।जिसकी उम्मीदाें से कहीं नीचा आसमान था,मुरझाकर भी उसका हौंसला बलवान था,जब वक्त ने भी हिम्मत और आस छोड़ दी,उस वक्त भी वो अपने हालातों का सुल्तान था।किस्मत उसकी हारी हुई बाजी का फरमान था,बिना मांस की



उस फागुन की होली में

जीना चाहूं वो लम्हे बार बार जब तुमसे जुड़े थे मन के तारजाने उसमें क्या जादू था ? ना रहा जो खुद पे काबू था कभी गीत बन कर हुआ मुखर हंसी में घुल कभी गया बिखर प्राणों में मकरंद घोल गया बिन कहे ही सब कुछ बोल गया इस धूल को बना गय



नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले

#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#नारी के हालात नहीं बदले,हालात अभी, जैसे थे पहले,द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने वाले,अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,कलयुग में अपनी रूप बदल ले।लक्ष्य कठिन है, फिर भी



35+ बेस्ट लाइन फॉर लाइफ इन हिंदी (best line for life in hindi)

दोस्तों हम आपके लिए बेस्ट लाइन फॉर लाइफ इन हिंदी (best line for life in hindi) में लाए है और ये उम्मीद करते है कि ये कोट्स आपके जीवन में किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए प्रेरक के तौर पर काम करेगा। अक्सर कई



कोई उसकी फिक्र क्यों नहीं करता ?

आजकल वो लड़की बड़ी गुमसुम सी रहती है , हमेशा बेफिक्र रहने वाली ,आजकल कुछ तो फिक्र में रहती है ा अल्हड़ सी वो लड़की ,हर बात पर बेबाक हंसने वाली ,आजकल चुप-चुप सी रहती है ा आँखों में मस्ती , चेहरे पर नादानी ,खुद में ही अलमस्त रहने वाली ,हमेश



अभिनंदन

ओ अभिनंदन है अभिनंदनआज महके हैं माटी और चंदन पराक्रम की लिख इबारत लौट आये अपने भारत राजा पौरुष की तरह याद किये जाओगे भावी पीढ़ियों को सैनिक पर गर्व कराओगेमिले कामयाबी की मंज़िल-दर-मंज़िल सजती रहेगी अब आपकी शौर्य-गाथा से महफ़िल भारत की मा



हार्दिक अभिनन्दन !

वीर अभिनन्दन ! हार्दिक अभिनन्दन ! तुम्हारे शौर्य को कोटि वन्दन ! पुलकित , गर्वित माँ भारती - तुम्हारे निर्भीक पराक्रम से , मृत्यु - भय से हुए ना विचलित - ना चूके संयम से ;सिंह पुत्र तुम जननी के सहमा शत्रु नराधम !! श



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