कविफ़ा

कर्मों के फल

किसी के प्रेम की देखो राह अब भी मैं तकता हूँमेरी उम्मीदें टूटी हैं मगर फिर भी ना थकता हूँमेरे दिल में ज़रा झांको जख्म अब ही हरे होंगे बड़ी शिद्दत से मैं उनको गैर लोगों से ढकता हूँमुहब्बत की प्यास मेरी ना मिटने पाई है अब तकएक दो जाम पीने से फ़कत मैं तो ना छकता हूँमेरे दिल का दर्द देखो यूँ ही कम हो ना पा





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