कविता



सामयिक आह्वान

★☆सामयिक आह्वान☆★विकल्प नहीं है कोईइस भयावह विषाणु से बचने कासात्विक आहार-विचार-व्यवहार दुनिया को गहने का'भैक्सिन' वा 'दवा' का प्रलाप हैमात्र कहने- .सुनने काआई सी यू - भेंटिलेटर मेंरह बच निकलना- कहने कामाया द्विप चल रहा १नंबर पर-भ्रामक समाचार है पढ़ने कासारे भारत को जाँचें-१०करोड़ पोजिटिव निश्चय मिलने



कहानी दिवस और निशा की

जीवन में सुख और दुःख ये दोनोंचक्रनेमि क्रम से आते जाते ही रहते हैं... उसी प्रकार जैसे दिवस के बाद सन्ध्या काआगमन होता है... उसके बाद निशा का... और पुनः दिवस का... चलता रहता है यही क्रम...तो क्यों किसी भी कष्ट की अथवा विपरीत घड़ी में चिन्तित होकर बैठा जाए...? क्यों नप्रयास किया जाए पुनः आगे बढ़ने का...



"सामान"

मेरी एकादशोत्तरशत काव्य रचना (My One Hundred eleventh Poem)"सामान"“घर-घर सामान भरा पड़ा हैहद से ज्यादा भरा पड़ा हैखरीद-खरीद के बटुआ खालीखाली दिमाग में सामान भरा पड़ा है -१हर दूसरे दिन बाहर जाना हैनयी-नयी चीजें लाना हैजरूरत है एक सामान कीढोकर हजार सामान लाना है-२अपने घर में जो रखा हैउसकी खुशी न करना



श्री राम चरित मानस पाठ

‼️ भगवत्कृपा हि केवलं‼️ओम् नमो भगवते वासुदेवाय श्री राम चरित मानस 🌻अयोध्याकाँड🌻गतांक से आगे... चौपाई-एक कलस भरि आनहिं पानी।अँचइअ नाथ कहहिं मृदु बानी।।सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी।राम कृपाल सुसील बिसेषी।।जानी श्रमित सीय मन माहीं।घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।मुदित नारि नर दे



अनमोल वचन ➖ 5

अनमोल वचन ➖ 5दीप से दीप की ज्योति जलाई, दिवाली की ये रीति निभाईएक कतार में रखि के सजाई, फिर सब कुशल क्षेम मनाई।पाँच दिनों का त्योहार अनोखा, भाऊबीज तक सजे झरोखापकवानों का खुशबू हो चोखा, हर कोई रखता है लेखा-जोखा।धनतेरस की बात निराली, करते हैं सब अपनी जेबें खालीकोई खरीदे सोना-चाँदी तो, कोई बर्तन शुभ दि



रौशनी का त्योहार

साहित्य मित्र मंडल, जबलपुर(व्हाट्सऐप्प्स् समुह संख्या: १ - ८)रविवासरीय प्रतियोगिता में ''श्रेष्ठ सृजन सम्मान ''हेतु चयनित मेरी रचनादिनांक: १५.११. २०२०विषय: रोशनी का त्योहार🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔रौशनी का त्योहार दीपावाली- सबको है भाता।।कोई लक्ष्मी पूजन करता, कोई बड़ा



मेरी जलती हुई कहानी

आज दीपोत्सव की सभी को अनेकशःहार्दिक शुभकामनाएँ...माटी के ये दीप जलानेसे क्या होगा, जला सको तो स्नेह भरे कुछ दीप जलाओ |दीन हीन और निर्बल सबहीके जीवन में स्नेहपगी बाती की उस लौ को उकसाओ ||दीपमालिका मेंप्रज्वलित प्रत्येक दीप की प्रत्येक किरण हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि,स्नेह और सौभाग्य की स्वर्णिम



आओ हम सब मिलकर ऐसा दीप जलाएँ

आओ हम सब मिलकर ऐसा दीप जलाएँआओ हम सब मिलकर ऐसा दीप जलाएँदीप बनाने वालों के घर में भी दीये जलाएँचीनी हो या विदेशी हो सबको ढेंगा दिखाएँअपनों के घर में बुझे हुए चूल्हे फिर जलाएँअपनें जो रूठे हैं उन्हें हम फिर से गले लगाएँ।आओ हम सब मिलकर ऐसा दीप जलाएँजो इस जग में जगमग-जगमग जलता जाएजो अपनी आभा को इस जग म



गरीब की दीवाली

गरीब की दीवाली दीवाली के दिए जले हैं घर-घर में खुशहाली है।पर इस गरीब की दीवाली लगती खाली खाली है।पैसा वालों के घर देखोअच्छी लगे सजावट है।इस गरीब के घर को देखोटूटी- फूटी हालत है।हाय-हाय बेदर्द विधातागला गरीबी घोट रही।बच्चों के अब ख्वाब घरौंदेलाचारी में टूट रही।जेब पड़ी है खाली मेरीकैसे पर्व मनाऊं म



दीप जलाएँ

आज धन्वन्तरी त्रयोदशी –जिसे धनतेरस भी कहा जाता है – का पर्व है, और कल दीपमालिका के साथ धन की दात्रीमाँ लक्ष्मी का आह्वाहन किया जाएगा... धन, जो है उत्तमस्वास्थ्य का उल्लास… धन, जो है ज्ञान विज्ञान का आलोक… धन,जो है स्नेह-प्रेम-दया आदि सद्भावों का प्रकाश… सभी का जीवन इससमस्त प्रकार के वैभव से समृद्ध र



भावना का दीप

कल हमारी प्यारी बिटिया स्वस्ति ने बहुत हीनयनाभिराम पुष्प “प्रवीर शर्मा जीतसिंह” को जन्म दिया... नानी बनने पर कैसे आनन्दका अनुभव होता है इसका कल पता चला... अचानक ही “पदोन्नति” का आभास होने लगा... आनन्दके आवेग में कुछ पंक्तियाँ मन में उपजीं... जो आपके साथ साँझा करने का मन हुआ...कात्यायनी... भावना के द



लड़की बोझ!

••••●ऐसा क्यों होता है?●•••मैं जब आई माँ की गोदी में बहुत हाथ-पैर चलाईथक -थका कर मुझे गहरी नींद जब थी आईचट-पट पलने में सुला मुझसे माँ पिण्ड छुड़ाईपापा-चाचा-ताऊ ने जी भर खिलाया-हुई संग बाजार धुमाईचलना सिखी तब छत पर नीली-पीली पतंग बहुत उड़ाईभाई बहनों संघ जब-तब झड़प औरप्यार भरी लड़ाईसखियाँ बनी कई तो को



अनमोल वचन ➖ 4

अनमोल वचन ➖ 4दाता इतना रहमिए, कि पालन-पोषण होयपेट नित भरता रहे, अतिथि सेवा भी होय।दीनानाथ हैं अंतर्यामी, सहज करें व्यापारबिना तराजू के स्वामी, करें हैं सम व्यवहार।सबकुछ तेरा नाम प्रभु, इंसा की नहीं औकातपल में राजा तू बनाए, पल में रंक बनि जात।नाथ की लीला निराली,क्या स्वामी क्या मालीबाग की रक्षा माली



धूप शरद की

शरद ऋतु की कोमल मुलायम सी धूप... ध्यान से देखेंगे तो अनगिनतीरूप... रंग और भाव दीख पड़ेंगे... कभी किसी नायिका सी... तो कभी श्वेत कपोत सी...तो कभी रेगिस्तान की मृगमरीचिका सी... कुछ इसी प्रकार के उलझे सुलझे से भावों केसाथ प्रस्तुत है हमारी आज की रचना... धूप शरद की... कात्यायनी...https://youtu.be/hVjKTmk



अनमोल वचन ➖ 3

अनमोल वचन ➖ 3सद्गुरु हम पर प्रसन्न भयो, राख्यो अपने संगप्रेम - वर्षा ऐसे कियो, सराबोर भयो सब अंग।सद्गुरु साईं स्वरूप दिखे, दिल के पूरे साँचजब दुःख का पहाड़ पड़े, राह दिखायें साँच।सद्गुरु की जो न सुने, आपुनो समझे सुजानतीनों लोक में भटके, तबतक गुरु न मिले महान।सद्गुरु की महिमा अनंत है, अहे गुणन की खानभव



किसी

🌿🎶🙏जय माँ वीणा वादिनी 🙏 आपकी सेवा में प्रस्तुत है -एक नयी आतुकांत रचना- 🍁" *किसी* "🍁आज सुबह "किसी" ने भाव जगा दिए,मैं समझ नहीं पाया उस किरण को,कैसे आई- फिर ''किसी'' बन गई,ये "किसी" शायद एक स्थान है,कोई पदवी है ,उच्च वरीयता प्राप्त कोई ओहदा है,जो हर आदमी इससे बंधा हुआ है,एक संगीत सा बजता



कविता : ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना

आज ,अखण्ड सौभाग्यवती कामाँ उमा से है वर पाना ऐ चाँद, तुम जल्दी आ जाना || आज पिया के लिये है सजना संवरना अमर रहे सदा मेरा सजना ऐसा वर तुम देते जाना ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना || अहसानों के बोझ तले मुझे मत दबाना आज आरजू है यही इबादत में मोहब्बत का विस्तार कराना रहे सदा साथ सजना का ऐसा वर तुम देते जाना



कविता क्या है?

कविता क्या है?सुबह के सूर्य से लेकर, निशा का चाँद है कविताभरे रस छन्द हो जिसमें, वही इक स्वाद है कविताविरह की वेदना संवेदना श्रंगार है कविताभरी जो भावना उर में, वही उद्गार है कवितालिखी जो पन्त दिनकर ने, ह्रदय का प्यार है कविताभरे जो दर्द घावों को, वही उपचार है कविताकड़ी सी धूप में मिलती, वही इक छांव



आकर तनिक मुझको सुलाओ

जीवन की भाग दौड़ में उलझा मन... न जाने कितने उतारों चढ़ावों से थकित मन कभीन कभी ऐसी कामना अवश्य करता है कि कोई उसका अपना उसे मीठी तान सुनाकर ऐसी नींदसुला दे कि थकित मन को कुछ पलों के लिए विश्राम प्राप्त हो जाए... कुछ ऐसे ही उलझेसुलझे से भाव हैं हमारी आज की रचना में... जिसका शीर्षक है “आकर तनिक मुझको स



दूर ना जाना , पास आना विचारों के सागर में संग ग़ोता लगाना मनमोहक सपने दिखाना सपनों में मंजिल को खोजते हुए रास्तों से इश्क हो जाना मंजिल के मिल ज

दूर ना जाना ,पास आनाविचारों के सागर में संग ग़ोता लगाना मनमोहक सपने दिखाना सपनों में मंजिल को खोजते हुए रास्तों से इश्क हो जाना मंजिल के मिल जाने पर भी रास्तों से मोह न जाना यह कुछ वैसा ही है जैसे मृत्यु रुपी मंजिल तक जानाऔर पथ रूपी जिंदगी से लगन लग जाना।



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