कविता



सच्चा मित्र

असली मित्रजिंदगी से मुलाक़ातएक बार गोष्टियों में यह बात हुई।असली मित्र कौन? बहस बेबात हुई।।धमासान चला वर्षों वाक् युद्ध।अंत में निष्कर्ष यही निकला शुद्ध।।मित्रता की सोंचे वो है पगला।हम हैं तो कोई मित्र बने हमारा।।हम न रहे लो श्मशानधाट हमारा।।साँसों के तार का ताना-बाना,जीवन हीं परम मित्र हमारा।।।मुला



अयोध्या में राम !

अयोध्या में राम !भगवान राम तुलसी हृदय में बसते राम , तुलसी हृदय में राम।सब में रमते हैं श्री राम, जो हैं तुलसी के राम।तुलसी ने काशी रहकर रामायण रचते ।रामचरित्र मानस को भजते श्री राम राम तुलसी जपते ।तुलसी के थे राम और,राम जी के तुलसी।श्री राम के साथ राम, भक्त हनुमान नेगुणगान गाया ! कहते हैं संकटम



अपना ख्याल रखना

अपना ख्याल रखना कि तुम्हे पता भी नहीकितने बेपरवाह हो तुमदिन को रात ,रात को दिन बना रखते हो दुर हु तुमसे... पर फिर भी मेरी बात का मान ऱखना ....मेरी खुशी के लिए...अपना ख्याल रखना... माना कि अब मे पास नही तुम्हे डाटँने का बहाना भी कुछ खास नही मेरी हर झल्लाहट का एहसास रखना अपनी मसरुफ जिंदगी को थोड



बप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है

बप्पा को लाना हमारी जिम्मेदारी है...अबकी बरस तो कोरोना महामारी हैउत्सव मनाना तो हमारी लाचारी हैरस्में निभाना तो हमारी वफादारी हैबप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है।अबकी बरस हम बप्पा को भी लायेंगेंसादगी से हम सब उत्सव भी मनायेंगेंसामाजिक दूरियाँ हम सब अपनायेंगेंमास्क सेनिटाइजर प्रयोग में लायेंगें।दू



ऐसे याद तुम्हारी आए

यादो के अनेकरूप होते हैं, अनेकों भाव और अनेकों रंग होते हैं...अपनी पिछली रचना "तुम्हारी याद यों आए" में यादों को इसी प्रकार के कुछउपमानों के साथ चित्रित करने प्रयास था, आज की रचना "ऐसे यादतुम्हारी आए, सूर्य डूब जाने पर जैसे अलबेली संध्या अलसाए..." में भी इसी प्रकार का प्रयास किया गया है... सुधी श्रो



कोरोना देव की कृपा

कोरोना देव की कृपाजीवन का नाहीं कौनों ठिकानामरै के चाहिय बस कौनों बहाना बुढ़न ठेलन का बाटै आना जानाजवनकेउ का नाहीं बाटै ठिकानारोग ब्याधि का बाटै ताना बानाफैलल बा भाई वायरस कोरोनाझटके पटके में होला रोना धोनाकितना मरि गयेन बिना कोरोनामेहर माई बाप के बाटै भाई रोनाअस्पताल वाले पैसा लूटत बानाभागल भागल बीर



आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू

साप्ताहिक प्रतियोगिता में "प्रथम" सर्वोतकृष्ठ चयनित रचनासमुह का नाम:- साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर ( एम. पी.)पटल संख्या: १-२-३-४-५-६-७ एवम् ८संपर्क:- 9708055684 / 7209833141शीर्षक: आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧आँखों के किनारे ठहरा एक आंसूभक्तों का सर्वश्रेष्ठ धन है गिरते आंसू🌹🌹🌹



तुम्हारी याद यों आए

तुम्हारी याद यों आए... यादों के कितने हीरूप हो सकते हैं – कितने ही रंग हो सकते हैं... और आवश्यक नहीं कि हर पल किसीव्यक्ति या वस्तु या जीव की याद ही व्यक्ति को आती रहती हो... व्यक्ति का मन इतनाचंचल होता है कि सभी अपनों के मध्य रहते हुए भी न जाने किस अनजान अदेखे की याद उसेउद्वेलित कर जाती है... इन्हीं



जिंदगी

हालात ए जिंदगी , संघर्षरत् हैं इस रुट की सभी लाईने अ़यस्त व्यस्त हैं माना किस्मत का सितारा, अभी ध्वस्त हैं पर हम भी , अपने प्रयासो मे ,निरंतर अभ्यस्त हैं



पुरुषत्व

छोटी को दुर्गा मानकर पुजते हो ,बड़ी को रंभा की दृष्टि से देखते हो | समाज मे रहकर ही समाज की ,मर्यादा को लुटते हो | .... अगर भाई पुरुष ही हो ????? तो फिर क्यो पुरुषत्व पर थुकते हो |....



अरमान

बिखरे अरमानो को छोड, देना सही हैं क्या ??एक बार हारे हैं बस. दुसरा मौका नही हैं क्या ?? क्यो बोझ ढो रहे हो असफलता का . मन में हौसलो की कमी हैं क्या ?? ठान लो तो जीत हैं .. मान लो तो हार... जिंदगी का सफर ही हैं रुमानी तुम्हारे लिए जीतने से ज्यादा सीखना नही हैं क्या ? ? ?



यात्री मार्ग और लक्ष्य

यात्री मार्ग और लक्ष्ययदि मैं देखतीरही बाहरतलाशती रही यहाँ वहाँ येन केन प्रकारेणमन की शान्ति और आनन्द कोतो होना पड़ेगा निराशक्योंकि कोई बाहरी वस्तु, सम्बन्ध, या कुछभी औरनहीं दे सकता आनन्द के वो क्षण / शान्तिके वो पलजो मिलेंगे मुझे केवल अपने ही भीतरइसीलिए तो करती हूँ प्रयास झाँकने का अपनेभीतर...डूब जा



मुझको तेरी तलाश क्यो है



अजी ये क्या हुआ....?

अजी ये क्या हुआ…?होली रास नहीं आयाकोरोना काल जो आयामहामारी साथ वो लायाअपना भी हुआ परायाबीपी धक धक धड़कायाछींक जो जोर से आया…तापमान तन का बढ़ायाऐंठन बदन में लायाथरथर काँपे पूरी कायाछूटे लोभ मोह मायादुश्मन लागे पूरा भायापूरा विश्व थरथराया……नाम दिया महामारीजिससे डरे दुनिया सारीचीन की चाल सभी पे भारीबौखला



सावन के झूले

सावन के झूले कल हरियाली तीज – जिसे मधुश्रवा तीज भी कहा जाताहै – का उमंगपूर्ण त्यौहार है, जिसे उत्तर भारत में सभी महिलाएँ बड़े उत्साह सेमनाती हैं और आम या नीम की डालियों पर पड़े झूलों में पेंग बढ़ाती अपनीमहत्त्वकांक्षाओं की ऊँचाईयों का स्पर्श करने का प्रयास करती हैं |सर्वप्रथम, सभीको सावन की मस्ती में



मेहनत की कमाई

मेहनत की कमाईएक सेठ थे। उनकी कोठी के बाहर सड़क के किनारे एक मोची बैठता था जो जूते मरम्मत करने के दौरान बीच -बीच में भजन या कोई गीत गुनगुनाता रहता था, लेकिन सेठ जी का ध्यान कभी मोची के गानों पर नहीं गया। एक बार सेठ जी बीमार पड़ गए। बिस्तर पकड़ लिया । घर में अकेले पड़े थे तो उन्हें मोची के भजन सुनाई



सुखसिंधु

चाहे लुट जाए धन-धरती,मिट जाए विभव- स्वप्न सारा।चहुँओर जलें अंगार तप्त,या बहे शीत जल की धारा।जग प्रेम करे या घृणा करे,मन दोनों में सुख पाता है।सुखसिंधु यहाँ लहराता है।भवसागर में नित उठती हैं,द्वंद्वों की बहु भ्रामक लहरें।कुछ हर्षित करती हैं मन को,कुछ घाव बनाती हैं गहरे।ये हैं क्षणभंगुर- नाशवान,इनसे झ



आधुनिकरण

आधुनिकरण (Modernisation)स्नान घर के दरवाजे,अब,स्विमिंगपूल पर जाकर ,खुलते हैं !मारे शर्म के घुघट ,उतर गई है ------स्विमिंग ड्रेस के सामने !अब उन्हें इतना पर्याप्त ,नहीं लगा !!!स्नान के लिए अब पहनना ..कुछ भी जरूरी नहीं ,मीटिंग में .मांग रखा गया !!शायद वे ठीक हैं !कपडे के नी



गोप और राधा भाव

बाल गीत कान्हा का आज मैं गाऊँ। प्रियतम् गोप उनका बन मैं जाऊँ।।🙏🙏🌸🌸🌹🌸🌸🙏🙏🙏 🙏 "नंद गोपाला" 🙏 🙏हर कवि कृष्ण भक्त होता है'नंद' वही जो आनंद देता हैनंदन तो आनंद पाता - देता है'गोप् सदा हीं आनंद देता हैगोपालक कृष्ण कहलाते हैसूर के कृष्ण ग्वाले कहलाते हैंरागानूगा भक्ति कही गई हैप्रथम चरण रागा



मुक्तक

मुक्तक भाग्य में अपने क्या बस काली रात है , नयन ने पाई आंसू की सौगात है |बस ऊंचे पेड़ों तक आता उजियारा , गाँव में अपने उगता अजब प्रभात है



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