कविता

वीरों का बसंत

वीरों का कैसा हो बसंत, कभी किसी ने बतलाया था।पर ऐसा भी बसंत क्या कभी सामने आया था?फूली सरसों मुरझाई है, मौन हुआ हिमाचल है।धरा-व्योम सब पूछ रहे, ये कैसी हलचल है?माँ भारती हुई आतंकित, कुत्सित कुटिल प्रहारो से।स्वर्ग भूमि है नर्क बनी अब, विस्फोटों से अंगारों से।।युद्ध भूमि में नहीं थे वे, जब मौत सामने



मुझसे ही मुझको ढूँढ़कर मुझसे मिला रहा है वो

स्याही में कोई बेजुवान साया घुला है जैसे , एक मासूम चेहरा अक्षरों से तक रहा है मुझको ,मेरे बंद मुट्ठी में तस्वीर जिसका भी हो ,अपने नाम में मेरा नाम ढूँढ रहा है वो ा इश्क का हमसफ़र कभी बदलता नहीं ,धडकनों पर लिखा चेहरा कभी मिटता नहीं ,



सुगंध

मुहब्बत जिससे होती है सुगंध एक उसमें आती हैउसे पाने की चाहत फिर जो बस मन में जगाती हैये चेहरा कुछ नहीं दिल से जुड़ा एक आईना समझोजो मन में चल रहा है बस वो ही सूरत दिखाती हैचाह जिसकी करी वो ही तो देखो ना मिला मुझकोज़िन्दगी की ये सच्चाई तन्हा मेरे दिल को दुखाती हैछवि महबूब की जिसने बसाई हो फ़कत दिल में



लौटा माटी का लाल

गूंजी मातमी धुन लुटा यौवन तन सजा तिरंगा लौटा माटी का लाल माटी में मिल जाने को ! इतराया था एक दिन तन पहन के खाकी चला वतन की राह ना कोई चाह थी बाकी चुकाने दूध का कर्ज़ पिताका मान बढाने को ! लौटा माटी का लाल माटी में मिल जाने को !!रचा चक्रव्यूह शिखंडी शत्रु ने छुपके घात लगाई कु



कन्धों पर सरहद के जाँबाज़ प्रहरी आ गये

मातम का माहौल है कन्धों पर सरहद केजाँबाज़ प्रहरी आ गये देश में शब्दाडम्बर के उन्मादी बादल छा गये रणबाँकुरों का रक्त सड़कों पर बहा भारत ने आतंक का ख़ूनी ज़ख़्म सहा बदला! बदला!!आज पुकारे देश हमारागूँज रहा है गली-चौराहे पर बस यही नारा बदला हम लेंगे फिर वे लेंगे.... बदला हम लेंगे फिर वे लेंगे....हम.... फिर



पीड़ा की लहरें

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे हैसोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगाजेहादी बुद्ध बन सबके दिलों के पास आएगाअरे कश्मीर में गर तुमने बाकी देश ना भेजाकभी भूभाग तुमसे जाएगा न ये फिर तो सहेजाकत्ल तुम लाखों द्रोहियों का यूँ ही कर नहीं सकतेये अलगाव के नारे



वीर सिपाही

हो वीरता का संचार तुम , इस मातृभूमि का लाल तुम ,तुम गूंजते हो खुले आसमान में ,तुम दहाड़ते हो युद्ध के मैदान में ,कभी रुकते नहीं कदम तुम्हारे ,थकते नहीं बदन तुम्हारे ,हो क्रांति का एक मिशाल तुम ,शेरनी माँ का शेर औलाद तुम ,जो सर कटाए दे



दर्द

दर्द जाने क्या दर्द से मेरा रिश्ता है!?!जब भी मिलता है बड़ी फ़ुर्सत से मिलता है||



दूसरा तो दूसरा ही होता है

।। दूसरा तो दूसरा ही होता है।। संबंध तो वही है;जिसमें तोड़ने का विकल्प होता ही नहीं। रिश्ता तो वही है; जिसमें छोड़ने का विकल्प होता ही नहीं।।चलो बात करें, चलो कुछ बात करें;एकदम ही निजी रिश्ते की;एकदम ही अंतरंग रिश्ते की;एकदम ही पूरे पूरे व्यक्तिगत संबंध कीचलो बात करें, चलो कुछ बात करें।।( दूसरा से य



इबादत सी मुहब्बत

चाह तुझसे मिलन की जब तलक सीने में जिंदा हैबड़ा बेचैन सा रहता मेरे मन का परिंदा हैमुहब्बत को बनाया पर सही ना साथ मिल पायापरेशां इस जमीं पर देख लो हर इक बाशिंदा हैचोट सीने पे लग जाए बिखर जाती हैं खुशियां भी कोई बनता है फिर साधू कोई बनता दरिंदा हैप्रेम होता नहीं सबको प्रेम की बातें हैं सारी हर इक रिश्त



पुलवामा के अमर शहीदों को शत शत नमन

आज चाहूँ देखनापुलवामा की घटना वास्तव में मन को क्षुब्ध करतीहै… सच में बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ है ये... और हमारे ये शहीद किसीप्रत्यक्ष युद्ध की भेंट नहीं चढ़े हैं, आतंकवादियों ने बड़े कायरतापूर्ण तरीक़े से इन पर हमला किया है... हमारे इन वीरशहीदों को वास्तव में गर्व के साथ शत शत नमन... ये सिर्फ अपने



जीवन ऊर्जा

जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो।या जीवन में अर्थ भरो या,यूँ हीं इसको व्यर्थ करो।तुम मन में रखो हीन भाव,और ईक्क्षित औरों पे प्रभाव,भागो बंगला गाड़ी पीछे ,कभी ओहदा कुर्सी के नीचे,जीवन को खाली व्यर्थ करो, जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,ये तुमपे कैसे खर्च करो।या म



हश्र

नज़रें चुरा ली आपने देख कर ना जाने क्योंमन में हम बसते हैं तेरे बात अब ये माने क्यों जानते थे जब ज़माना ख़ुदगर्ज होता है बहुत चल पड़े तेरी मुहब्बत फिर यहाँ हम पाने क्यों कुछ हश्र देखा है बुरा चाहत का इतना दोस्तोंसोचते हैं ये ह



ज़िंदगी की राह

था मुकद्दर सामने पर भूल हम से हो गईज़िंदगी की राह भटके मुस्कुराहट खो गई झूठ का पहने लबादा साथ में वो आ गया मन में मेरे बात उसकी बस ज़हर सा बो गई रोशन करेंगे रास्ता सोचा जली मशाल सेइस शमा की रोशनी भी ज़िंदगी से लो गई साथ आएगा कोई तो कुछ नया होगा



पास हो तुम

पास हो तुम दिल के इतने कैसे मैं तुमको छोड़ दूँजिसमें हैं बस छवियां तेरी वो आईना क्यों तोड़ दूँअविरल धार स्नेह की जो बहती है जानिब तेरेइसका रुख क्यों गैरों के मैं कहने भर से मोड़ दूँ प्रेम का रिश्ता ये हरगिज़ ख़त्म हो ना पाएगातू कहे तो एक नाम देकर सम्बन्ध अपना जोड़ दूँहाथ कोई गर तुझे छूने की हिम्मत भ



प्रीत के बिन

तुम्हारी प्रीत के बिन तो बड़ा मुश्किल ये जीना हैमुझे तो ज़िन्दगी का जाम नज़र से तेरी पीना हैना मेरे मर्ज को समझा ना मेरे दर्द को समझाबड़ी बेरहमी से तुमको उन्होंने मुझसे छीना हैदिन भी लम्बे हुए हैं कुछ और तू पास ना आए मेरे किस काम का खिलता बसन्ती ये महीना हैमेरी उजड़ी सी दुनिया देख वो ही मुस्कुराएगापतंग



जन्मों का नाता

कोई तो बात है तुझ में तू इतना याद आता है इक तेरा प्यार ही मुझ में उमंगों को जगाता है कई जन्मों का नाता है सदा मुझको लगे ऐसामुहब्बत वरना कोई इस तरह थोड़ी लुटाता हैमुझे महसूस होता है कोई ना झूठ है इस मेंअपनी पलकों पे तू ही फ़कत मुझको बिठाता हैमुहब्बत के सिवा मैं तो तुझे कुछ दे नहीं पाईमेरे नखरों को



रोज़ डे पर अपने साथी को तोहफे में भेजें ये बेहतरीन कविता होगी कबूल

रोज़ डे पर हम अपने पार्टनर को गुलाब देकर अपने रिश्तों में ताज़गी भरते हैं और अपने प्यार का इज़हार करते हैं। लेकिन एक कशमकश ये ज़रूर रहती है कि हम अपने पार्टनर को गिफ्ट में क्या दें जिससे वो ख़ुश हो जाए। वैसे तो आजकल कई तरह के तोहफे चलन मेें है लेकिन अगर आप कोई ख़ूबसूरत संदेश भेजते या सुनाते हैं तो य



दीवारें

दर्द ए दिल का मज़ा लेना है थोड़ी चोट तुम खा लो पास हो के भी जो बस दूर हो इक ऐसा सनम पा लोमुकद्दर साथ ना दे गर मुहब्बत मिल ना पाएगीप्रेम गीतों को अपने दिल से चाहे लाख तुम गा लोदीवारें मन में खिंच जाएं तो वो गिरती नहीं पल मेंलाख कोशिश करोगे चाहे तुम कि उनको अब ढा लोअगर खुल के ना बरसोगे बहारें कैसे आएंगी



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x