कविता



काव्य संध्या

प्रिय सदस्यों, WOW India आठ मार्च को डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म Zoom पर AwardCeremony और रंगारंग कार्यक्रम के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस का आयोजन करने जा रहा है | इसी उपलक्ष्य में आज यानी शुक्रवार 5 मार्च को सायं तीन बजे से एक काव्य सन्ध्या का आयोजन हम लोगों ने किया...जिसकी अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्य



बसंतागमन

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 वसंत ऋतु की पहली कोपल 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱नैसर्गिक बीज एक नील गगन से-पहला जब वसुन्धरा पर आ टपका।मिट्टी की नमी से सिंचित हो वह-ध्रुतगति से पनप खिल कर महका।।🌾🌾🌾🌾🌾🌱🌾🌾🌾🌾🌾सूर्य उर्जा से अवशोषित उष्णतामिट्टी से अंत-शोषण- पोषण- संचय।प्रथम अंकुरण पा कर बड़भागीकोपल फुटी



आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है

सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शां



जीवन की रामकहानी

जीवन और मरण निरन्तर चलती रहने वाली प्रक्रियाएँ हैं... मरण के बाद भी जीवनकी रामकहानी समाप्त नहीं होने पाती... किसी नवीन रूप में फिर से आगे बढ़ चलती है...यही है संहार और निर्माण की सतत चलती रहने वाली प्रक्रिया... इसी प्रकार के उलझेसुलझे से विचारों से युक्त है हमारी आज की रचना... अभी शेष है... कितने ही



पथ मंज़िल का

मंज़िल की तलाश में जब व्यक्तिनिकलता है तो आवश्यक नहीं कि उसका लक्ष्य उसे सरलता से प्राप्त हो जाए... कभी कभीतो बहुत अधिक प्रयास करना पड़ता है... कई बार यही नहीं मालूम होता कि किस मार्ग सेआगे बढ़ा जाए... लेकिन एक सत्य यह भी है कि मार्ग में यदि बाधाएँ होती हैं... आड़ेतिरछे मोड़ होते हैं... तो वहीं कुछ न कुछ



प्रेम सुधा

हम सभी प्रायःअनन्त की बातें करते हैं,असम की बातें करते हैं, नवग्रहों और नवधा भक्ति आदि की बहुतसी दार्शनिक बातें करते हैं... मोक्ष की बातें करते हैं... लेकिन हम समझते हैं जिसदिन हमने समस्त चराचर में अपने दर्शन कर लिए... सबके साथ समभाव हो गए... उस दिनहमें कुछ भी बाहर खोजना नहीं पड़ेगा... उस दिन हम स्वय



मंजिल का अवसान नहीं

एक व्यक्ति के जीवन में उसकी ईक्क्षानुसार घटनाएँ प्रतिफलित नहीं होती , बल्कि घटनाओं को प्रतिफलित करने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। समयानुसार झुकना पड़ता है । परिस्थिति के अनुसार ढ़लना पड़ता है । उपाय के रास्ते अक्सर दृष्टिकोण के परिवर्तित होने पर दृष्टिगोचित होने लगते हैं।



ईश्वर का प्रमाण

मानव ईश्वर को पूरी दुनिया में ढूँढता फिरता है । ईश्वर का प्रमाण चाहता है, पर प्रमाण मिल नहीं पाता। ये ठीक वैसे हीं है जैसे कि मछली सागर का प्रमाण मांगे, पंछी आकाश का और दिया रोशनी का प्रकाश का। दरअसल मछली के लिए सागर का प्रमाण पाना बड़ा मुश्



आ गयी है ज़िंदगी

आ गयी है ज़िंदगीआ गयी है ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर कहना है अलविदा अपने आप से रिश्तों के तानेबानेलगने लगे हैं बेज़ार से मिलना है जिनसे आख़िरी बार हैं कुछ पास तो कुछ हैं, दूर होगी उनसे बातया मुलाक़ात मालूम नहीं थमने को हैं साँसेबस इंतेज़ार में आ गयी है ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर २८ नवंबर २०२०दिल्ली



काश तुम होते पास

काश तुम होते पास काश तुम होते पास पहलू में रख कर सिरदिल का ग़ुबारहल्का कर लेते काश तुम पास होते पहलू में रख कर सिर आँखों के सैलाब में मन के मलाल को बहा देतेकाश तुम पास होते पहलू में रख कर सिर इजहार दिल का हाल कररंजीदगी, कुछ कम कर लेते काश तुम होते पास १ दिसंबर २०२०दिल्ली



पालक झपकते ही

पलक झपकते ही पलक झपकते ही ओझल हो गया था जो हक़ीक़त अब सपना बन गया रहता था साथ जोअब याद बन गया होती थी रोज़ गुफ़्तगू अब ख़्याल बन गया था हो बशरअब रूह बन गया पलक झपकते ही ओझल हो गया १ दिसंबर २०२०दिल्ली



दिल में अपने

दिल में अपने झाँक कर देखा तो तेरा चेहरा नज़र आता हैनिगाहों में मेरी तेरा ही अक्स उभर आता है बातों में मेरी तेरा ही ज़िक्र सुनाई आता है अजनबी है तूफिर भी ना जाने क्यों जाना पहचाना सा नज़र आता है ३ दिसंबर २०२०दिल्ली



नज़र आया

नज़र आया इश्क़ के आइने में देखा चेहरा तेरा नज़र आया दिल के दर्पण में देखा अक्स तेरा नज़र आया नज़रों के झरोख़े में देखा रूप तेरा नज़र आया बस गए हो तुम इस तरह ज़ेहन में खुद में भी बस तसव्वुर तेरा नज़र आया ५ दिसंबर २०२०दिल्ली



जानता हूँ मैं

जानता हूँ मैं चिल्ला देता हूँ तुम पर कभी जानता हूँ कि तुम समझ जाओगी मेरी दशा और नहीं करोगी मुझे खुद से दूर रो लेता हूँ तुम्हारे सामने जानता हूँ कि तुम दोगी मुझे तसल्ली नहीं समझोगी कमजोरहँस लेता हूँ तुम्हारे साथ जानता हूँ कि तुम बाँटोगी मेरी ख़ुशी नहीं करोगी रश्क़दर्द अपना कर लेता हूँ तुम से साँझाजान



अनकही बातों को

अनकही बातों को अनकही रहने दो जीने दो इसी भ्रम मेंप्यार ना किया ज़ाहिर तुमने भी और मैंने भी के तेरे भी वो ही हालात हैं जो मेरे हैंअनकही बातों कोअनकही ही रहने दो जीने दो इसी भ्रम मेंधड़क रहा है मेरा दिल तेरे सीने मेंतेरा दिल मेरे पास है अनकही बातों को अनकही ही रहने दो र



तू मिल कर भी ना मिला मुझसे

तू मिल कर भी ना मिला मुझे मैं मिले बिना भी तेरा हो गया तू ना समझा कोई बात मेरी मैं तेरे एक इशारे को दिल से लगा बैठा तू दिल्लगी करता रहा मैं दिल लगा बैठा तुझसे तू अपनी मंज़िल की तरफ़ बढ़ गया मैं उसी राह मेंतेरे इंतज़ार में बैठा रहा तू मिल कर भी ना मिला मुझसे २२ दिसंबर २०२०दिल्ली



कोशिशें

कोशिशें हज़ार क़ींदर्द अपना छुपाने कीज़ख़्म इतना गहरा थाकि, मुस्कुराहट के पीछे भीरंजीदगी छुप ना सकी कोशिशें हज़ार क़ींआंसुओं के सैलाब को रोकने कीभरा था दिल इतना मगर आँखों के बाँध भी उसे बहने से रोक ना सके कोशिशें हज़ार क़ींयादों को दफ़नाने की प्यार बेंतिहा था मगर कब्र से भी लौट आयी यादें मुझे सताने



चक्रव्यूह

सवालों और जवाबों के चक्रव्यूह में फँस गयी है ज़िंदगी कल क्या हुआ कल क्या होगा यह मेरा है, वो तेरा इन्ही, सवालों और जवाबों के चक्रव्यूह में फँस गयी है ज़िंदगी दुनिया क्या कहेगी यह सही वो ग़लत यह अच्छा वो बुरा इन्ही, सवालों और जवाबों के चक्रव्यूह में फँस गयी है ज़िंदगी २३ जनवरी २०२१जिनेवा



ठिठुराती भीषण ठण्ड में

ठिठुराती भीषणठण्ड में जब प्रकृति नटी नेछिपा लिया हो स्वयं को चमकीली बर्फ कीघनी चादर में छाई हो चारों ओरघरों की छत पर और आँगन में खामोशी के साथ “टपटप” बरसती धुँध नहीं दीख पड़ता किचादर के उस पार दूसरा कौन है और फिर इसीद्विविधा को दूर करने धीरे धीरे मीठीमुस्कान के सूर्यदेव का ऊपर उठना जो कर देता हैखिलखि



जात आदमी के

आसाँ नहीं समझना हर बात आदमी के,कि हँसने पे हो जाते वारदात आदमी के।सीने में जल रहे है अगन दफ़न दफ़न से ,बुझे हैं ना कफ़न से अलात आदमी के?ईमां नहीं है जग पे ना खुद पे है भरोसा,रुके कहाँ रुके हैं सवालात आदमी के?दिन में हैं बेचैनी और रातों को उलझन,संभले नहीं संभलते हयात आदमी के।दो गज



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