कविता



तेरा जाना

।। कविता ।। ## तेरा जाना ##अब न आओगे कभी तुम लौट करके फिर कभी । चाहने वाले तुम्हारे लौट कर अा जाएंगे ।। याद तेरी तिफ्ल तेरी मौज तेरी तिस्नगी । भस्म कर तेरी चिता पर फूल यों बरसाएंगे ।। चाह कर भी वक़्त गुजरा लौट न पाएगा फिर । अब तुम्हारी इस कमी को खाक क्या भर पाएंगे ।।भूल भी जाएं कभी जो रात कातिल ब



विरह वेदना

.💞 💞💞रात्रि गायन💞 💞💞विरह के अगन अब बुझ नहींपाएगी।नींद उड़ किसी विराने में खोजाएगीअश्रुधारा बहाकर कहीँ और ले जाएगी।बिसरे स्वप्न की याद प्रतिपल दिलाएगी॥चुभती सेज का दर्द, वह सह नहीं पाएगी।विरह के गीत हर शाम वह गुनगुनाएगी॥याद तेरी जब-तब आकर बहुत सताएगी।अँधेरों में सुगंध उनकी जब-तब आएगी॥हृद-गति



ईश्वर की बेटी का आँचल (संशोधित)

प्रतियोगिता हेतु चयनित एवम्पुरुस्कृत रचनाविषय:"ईश्वर की बेटी का आँचल"प्रतियोगिता आयोजक:साहित्यिक मित्र मण्डल,जबलपुर, मध्य प्रदेशफेस बुक एवम् व्हाट्स एप्प (१-८ भाग)चयनकर्ताओं और मण्डलके सुधिजनों को सहृदय साधुवाद्★★★★★★★★★★★★🏵️🏵️ईश्वर की बेटी का आँचल🏵️🏵️ईश्वर की बेटी का गुणगानआज हम करते हैंउसे हीं



अनन्त के साथ मिलन की यात्रा

प्रस्तुत है एक रचना - अनन्त की यात्रा | योग और ध्यान के अभ्यास में हम बात करते हैं सात चक्रों की... कोषो की...उन्हीं सबसे प्रेरित होकर कुछ लिखा गया, जो प्रस्तुत है सुधीश्रोताओं और पाठकों के लिए...https://youtu.be/Am8VnQlAElM



ईश्वर की बेटी का आँचल

🏵️ईश्वर की बेटी का आँचल🏵️ईश्वर की बेटी का गुणगान आज हम सब करते हैंउसे हम माँ, बेटी, बहन एवं अर्धांगिनी भी कहते हैंशिव ने किया प्रथम विवाह, यही शास्त्रों में पाते हैंतिरिस्कार-आत्मदाह लख अश्रुप्लावित होते हैंचीर हरण शर्मनाक, भहाभारत कृष्ण रचते हैंमीरा की भक्ति नमन्य है- हम सब भजन उचरते हैंजातिमुक्त



दलहीज

"छल कपट प्रपंच की दलहीज""जीवन का जटिल समीकरण"आज हल करने कामन मैंने बनाया है!माँ की कोख के ९ महिनों का,मोटा-मोटी हिसाब लगाया है!!जन्म के समय की चिल्लाहट,पॉटी- सुसू की यादें- मजा बहुत आया है!माँ की गोद जाते हीं चुप होने का,होठों पे स्वाद ताजा हो आया है!!बहुत खुश हुआ जब पहली बार,सहारा दे कर माँ ने चलाय



सिप्पी के मोती

सिप्पी में मोतीकुछ भी समझोबँधु प्रिय मेरे,गीत त्राहिमाम्!कह गुनगुनाता हूँ।सिप्पी के मोती बटोर सारे- सागर से,आलोकित पथ पर चलता जाता हूँ।।धरा-धाम पर आतंकी कोरोना है फैल रहा,मास्क लगा, ग्लब्स पहन हीं कहीं भी मैं जाता हूँ।घोर तमसा फैल रही है चहुदिशी इस धरातल पर,सात्विकता का आह्वान कर- मृदंग बजाता हूँ।।



Hindi poetry on childhood life - अजूबी  बचपन ; अर्चना की रचना

बचपन की यादों आधारित हिंदी कविता अजूबी बचपन आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था,उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता हैमोगली जो जंगल में बघ



सोंच

चार दिवारी में बैठ यु ही सोचते रहेउम्र की कलम से ज़िन्दगी के पन्ने भरते रहेजब पलट कर देखा तुझे ऐ- ज़िंदगीकुछ किस्से आंखो में ढेर सी खुशियां लाएऔर कुछ लम्हे आंखो को नम कर बोले बायचार दिवारी में बैठ यु ही सोचते रहेउम्र की कलम से ज़िन्दगी के पन्ने भरते रहेज़िन्दगी के जीना का सरीखा कुछ यू रहेसाथ रहे लेक



लक्ष्य

एक लक्ष्य अधूरा है बाकीजो आश लगाए बैठे हैउस पार निकलना है मंजिलइस तरह इरादे ऐठें हैराह में चाहे हो मुश्किलसफर अभी भी है करना एक पल चैन मंजूर नहींउस लक्ष्य को पूरा है करना अगर कदम हो साथ तेरेवक़्त के संग होंगे सपनेवो लक्ष्य भी ज्यादा दूर नहींजब ख़्वाबों को पा लेंगे अपनेपास हमारे वो हिम्मत हैहार से डट



जहाज़ की छोटी सी कहानी

एक बार फिर से तेज उड़ान भरनी हैउन समंदर पर अपनी सांसे ना थमनी हैउजली रातो को आसमान का क्या खूब नजारा हैसुबह हुई तो जान गया की दूर अभी किनारा हैगर्मी होती सर्दी होती और कभी हो जाती बरसातलहरों को ये काट निकलता और मचाता है उत्पात‌एक बार फिर से तेज उड़ान भरनी हैउन समंदर पर अपनी सांसे ना थमनी हैरुक जाना



Lockdown में जहाजी कि कलम से

हम है जहाजी जहाज पेकट रही है जिन्दगी ऐसे तैसे, जी रहे वनवास में जैसे , घर जाना है साहबनहीं चाहिए इतने पैसे। हम हैं जहाजी जहाज पेपरिवार है चितिंत गांव में,लग गई है बेडिया पांव मेंजिंदगी ठहर सी गई नाव में, इस बंद कमरे कि छाव में,हम है जहाजी जहाज पे सब विभागों की हो गई छुट्टी, सरकार पिलाती है हमें घुट्



मेरी वेलेंटाइन

ख़ाली टेबल और एक बोतल wine हैआंखो पर मेरे एक गजब सी shine हैघड़ी में बज रहा अभी तो सिर्फ nine हैप्लान किया तेरे संग करना मैंने dine हैकरूंगा इंतजार तू ही मेरी valentine हैख़ाली टेबल और एक बोतल wine हैपास नहीं शब्द मेरे जो करते तुझे define हैतुझे चाहने वालो की लग सकती



Lockdown में जहाजी कि कलम से

हम है जहाजी जहाज पेकट रही है जिन्दगी ऐसे तैसे, जी रहे वनवास में जैसे , घर जाना है साहबनहीं चाहिए इतने पैसे। हम हैं जहाजी जहाज पेपरिवार है चितिंत गांव में,लग गई है बेडिया पांव मेंजिंदगी ठहर सी गई नाव में, इस बंद कमरे कि छाव में,हम है जहाजी जहाज पे सब विभागों की हो गई छुट्टी, सरकार पिलाती है हमें घुट्



मेरी वैलेंटाइन

ख़ाली टेबल और एक बोतल wine हैआंखो पर मेरे एक गजब सी shine हैघड़ी में बज रहा अभी तो सिर्फ nine हैप्लान किया तेरे संग करना मैंने dine हैकरूंगा इंतजार तू ही मेरी valentine हैख़ाली टेबल और एक बोतल wine हैपास नहीं शब्द मेरे जो करते तुझे define हैतुझे चाहने वालो की लग सकती



एक जहाज़ की छोटी सी कहानी

एक बार फिर से तेज उड़ान भरनी हैउन समंदर पर अपनी सांसे ना थमनी हैउजली रातो को आसमान का क्या खूब नजारा हैसुबह हुई तो जान गया की दूर अभी किनारा हैगर्मी होती सर्दी होती और कभी हो जाती बरसातलहरों को ये काट निकलता और मचाता है उत्पात‌एक बार फिर से तेज उड़ान भरनी हैउन समंदर पर अपनी सांसे ना थमनी हैरुक जाना



सोच

चार दिवारी में बैठ यु ही सोचते रहेउम्र की कलम से ज़िन्दगी के पन्ने भरते रहेजब पलट कर देखा तुझे ऐ- ज़िंदगीकुछ किस्से आंखो में ढेर सी खुशियां लाएऔर कुछ लम्हे आंखो को नम कर बोले बायचार दिवारी में बैठ यु ही सोचते रहेउम्र की कलम से ज़िन्दगी के पन्ने भरते रहेज़िन्दगी के जीना का सरीखा कुछ यू रहेसाथ रहे लेक



लक्ष्य

एक लक्ष्य अधूरा है बाकीजो आश लगाए बैठे हैउस पार निकलना है मंजिलइस तरह इरादे ऐठें हैराह में चाहे हो मुश्किलसफर अभी भी है करना एक पल चैन मंजूर नहींउस लक्ष्य को पूरा है करना अगर कदम हो साथ तेरेवक़्त के संग होंगे सपनेवो लक्ष्य भी ज्यादा दूर नहींजब ख़्वाबों को पा लेंगे अपनेपास हमारे वो हिम्मत हैहार से डट



लॉकड़ाउन में जहाजी की कहानी

Lockdown में जहाजी कि कलम सेहम है जहाजी जहाज पेकट रही है जिन्दगी ऐसे तैसे, जी रहे वनवास में जैसे , घर जाना है साहबनहीं चाहिए इतने पैसे। हम हैं जहाजी जहाज पेपरिवार है चितिंत गांव में,लग गई है बेडिया पांव मेंजिंदगी ठहर सी गई नाव में, इस बंद कमरे कि छाव में,हम है जहाजी ज



संबंध

"संबंधों" की महिमा- न्यारीबात मगर लगेगी यह खारीमहाभारत में देखी पटिदारीभारत में भी छाई पटिदारीपटिदारी मानवता की परम शत्रु,उजड़ी बागीचे की हर सुन्दर क्यारीसीमाओं का यह व्यर्थ जाल बहुत दुखदाईमानवीय मुल्यों की अब कैसे होगी भरपाईयुग पुरुष का अवतरण हो तो पट पाए खाईमानो बँधु- सबका मालिक वही है एक साईं



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