कविता



वृत्तियों से मुक्ति

🕸️🕸️🕸️वृत्तियों से मुक्ति🕸️🕸️🕸️मानव के अंदर पनपता पाप,अमन चैन मानव समाज से जाता है।जीवन बालक का हीं अच्छा,छल, कपट, द्वेष भावना से मुक्त रहता है।बाल सुलभ मन- दिल का सच्चा,तृष्णा, दंभ और लालच से दूर रहता है।तरुणाई संग जुटता चिट्ठा कच्चा,घृणा, दुश्मनी एवं प्रतिशोध सर चढ़ता है।मानव विकारयुक्त हो पश



चराग़ जले

चराग़ जलेएक पीली शाम नईआज चराग़ जलाएगी।बुझ जाएगा वो मगरसुहानी भोर तो आएगी।क़ायानात दहल जाती है,फ़कीरों के अश्क देख कर।ख़ुदा भी पिघल जाता है,रहमत का करिश्मा खेल कर।नेह का करिश्मा ओ' जलवा,देखा है जिस दीवाने ने।हैवान की क्या? वक़त, मिटा के दिखा-तूफ़ान झेले बहुतनेह करने वालों ने।गुनाह कर दोज़ख का शहर,ग़रचे म



हर घर में खटते बच्चे

■★हर घर में बच्चे खटते★■कुटीर-उद्योग के नाँवे,गाँव-शहर में बच्चें खटते यहाँ।बड़े-बुड़ों से अधिक काम करते,छुटभैये बच्चे यहाँ।।बाल अपराध न्यायाधीशमौज-मस्ती करते हैं यहाँ।श्रम मंत्रि की कोठी परनाबालिक बच्चे खटते यहाँ।।बच्चे बंधुआ मजदूर बनदिन-रात काम करते यहाँ।ठकुराईन स्लेट की जगह-जूठे बर्तन थमाती यहाँ।।



शर्मनाक! क्यों सुरक्षित नहीं बेटियां ??

शर्मनाक! क्यों सुरक्षित नहीं बेटियां ??मूर्ख! पत्थर की मूरत की रोज उतारते हो आरती पर देश में अपनी बेटी की हालत देख रो रही माँ भारती!!रोज कोई न कोई देवी स्वरूपा जंग जिंदगी की हारती...द्रौपदी की खिंच रही है अब भी साड़ी वो कृष्ण को पुकारती.



कुछ तो कहती हैं आंखे..

देखती, समझती, परखती और खामोश होने पर बहुत कुछ कहती हैं ये आंखेलेकिन जब बर्दाश्त के बाहर होता है दुख तो कभी-कभी जी भर के सैलाब सा बहती हैं ये आंखे....हर किसी को कुछ बताने, जताने को उत्सुक रहती हैं ये आंखे..इंतेजार में किसी की हर रात सुबह देखने को बन्द होती हैं ये आंखेहर किसी को सब कह देने का मौका भी



पर्यावरण

🌱🌱पर्यावरण पर एक रचना🌱🌱🌲🌳🌴☘️🌿🍃🌿☘️🌴🌳🌲ब्रह्म पुष्प मानिंद हर मानवसर्वदा खिला रहे।कटहली चंपा जैसा महके-हरकोई मस्त रहे।।काँटों से बच हट हरपलअग्रसारित होता रहे।सतायु बन हरकोई नेह कीडगर पर चलता रहे।।कमल पंक में खिलता-इंसान हर बाधा से लड़ता रहे।गुलाब की पँखुड़ियाँ जैसाइंसान - इत्र बन गमकाता रहे।



अलमारी में रखे पुराने खत

"कहानी पुराने खतों की"अलमारी में रखे पुराने खत कीबात आज सुधिजनों को बतानी थी।कुछ लिखते खत में मन बाहर की,मिलने पर बातें होती जुवान थी।।अब है चैटिंग की सुविधा अनंत,तब 'श्याही' होती भरवानी थी।अनलिमिटेड डाटा है आज,तब कागज पर कलम चलानी थी।।खत की बात निराली,लिख कर पत्र-मंजुषा में डाली जाती थी।कोने में स



गीत

🎶🎶🎶गीत🎶 🎶🎶गीत आज एक मनहर लिखा जाये।सस्वर साज बजा के सब मिल गायें।।राधाभाव में खो हम धुल मिल जायें।आओ मधुबन में रास रचाया जाये।।गीत आज एक मनहर लिखा जाये-१वृंदावन की गलियों में विचरा जाये।मन भर माखन- दधि खाया जाये।।गोपियन के मन की भी सुना जाये।दुख-सुख मिलजुल बाँटा जाये।।गीत आज एक मनहर लिखा जाये



गीत

🎶🎶🎶गीत🎶 🎶🎶गीत आज एक मनहर लिखा जाये।सस्वर साज बजा के सब मिल गायें।।राधाभाव में खो हम धुल मिल जायें।आओ मधुबन में रास रचाया जाये।।गीत आज एक मनहर लिखा जाये-१वृंदावन की गलियों में विचरा जाये।मन भर माखन- दधि खाया जाये।।गोपियन के मन की भी सुना जाये।दुख-सुख मिलजुल बाँटा जाये।।गीत आज एक मनहर लिखा जाये



तुम्हारे चरण की शरण आ गए हैं

कोरोना कीविकरालता एक ओर कुछ कम होने लगी है – जैसा समाचारों से ज्ञात हो रहा है,तो वहीं दूसरी ओर समाचारों से ही ये भी ज्ञात हुआ कि काली और सफ़ेद फंगस के मामलेबढ़ते जा रहे हैं... और अब तो हमारे देश का भविष्य – हमारे बच्चे – इससे संक्रमितहोते जा रहे हैं... सच में स्थिति तो बहुत चिन्ता जनक है,क्योंकि बच्चो



दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-4

जिस प्रकार अंगद ने रावण के पास जाकर अपने स्वामी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र के संधि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था , ठीक वैसे हीं भगवान श्रीकृष्ण भी महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले कौरव कुमार दुर्योधन के पास पांडवों की तरफ से शांति प्रस्ताव लेकर गए थे। एक दूत के रूप में अंगद और श्रीकृष्ण की भू



मन के कागज पर

मन के कागज पर🎄🎄🎄मन की कविता🎄🎄🎄मन के कागज पर बस लिखता जाऊँमन की व्यथा सुधिजनों तक पहुँचाऊँकुछ अपनी कुछ जग की बात बतलाऊँमन से कागज की सुंदर एक नाँव बनाऊँक्षीरसागर तक बह कर विष्णुलोक तक जाऊँहरि से एक टूक बात मन की आज मैं बताऊँलक्ष्मी को भी खरी खोटी मन भर आज सुनाऊँदु:ख प्रतारण असह्य दिया माँ स



है कौन ये अदृश्य

मित्रों, रात कितनी ही बड़ी क्यों नहो, हर रात का सवेरा होता है... इस कोरोना की भयानक अँधियारीरात भी बीतेगी और सुख का उजियाला हर ओर फैलेगा... किंचित लालिमायुत उषा को आगेकरके अरुण रथ पर सवार भोर का सूरज आशा का संदेसा लेकर आएगा... यदि हम सावधान रहकर करतेरहे पालन कोरोना के नियमों का... और एक बात, वैक्सीन



बंद दरवाजे पर दस्तक

📿बंद दरवाजे़ पर दस्तक📿बंद दरवाज़े पर दस्तकजरा भी नहीं सुहाती हैअंदर की बात बाहर सेसमझ में नहीं आती हैलगा कान दरवाजे से-गर नहीं कुछ सुना हैजानते हैं हम- मगरघर नहीं रहा कभी सूना हैबंद दरवाज़े पर दस्तक दी-आवाज कुछ आनी हैसुराखों से पार हो मौत-गहरी नींद सुला जानी हैगंदी हवा(MP)कहा इसको-कँपा शांत कर ले ज



मैं तो हूँ शाश्वत सत्य सदा

कोरोना की विकरालता तोकुछ कम हुई है, जिसे देखकर अभी तो ऐसा प्रतीत होता है कि बहुत शीघ्र इस कष्टसे संसार को मुक्ति प्राप्त होगी... किन्तु अभी बहुत लम्बा मार्ग तय करना है जीवनको पुनः सामान्य स्थिति में लाने के लिए... जो घाव इस बीमारी ने दिए उन्हें भरनेमें वास्तव में बहुत समय लगेगा... किन्तुसाथ ही हम एक



दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-3

रामायण में जिक्र आता है कि रावण के साथ युद्ध शुरू होने से पहले प्रभु श्रीराम ने उसके पास अपना दूत भेजा ताकि शांति स्थापित हो सके। प्रभु श्री राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें ज्ञात था कि युद्ध विध्वंश हीं लाता है । वो जान रहे थे कि युद्ध में अनगिनत मानवों , वानरों , राक्षसों की जान जाने वाली थी ।



सूक्ष्म मलिन से खद्योतों को

गीत सूक्ष्म मलिन से खद्योतों को दिनकर कहने वालो , गहन अमावस में पूनम की छटा निरखने वालो , तुम कितनाजग को भरमाओ ,



है कौन ये अदृश्य

नमस्कार मित्रों... आज सभी कोरोना के कारणडरे हुए हैं... एक ऐसा वायरस जिसके रूप में एक अदृश्य शक्ति ने हर किसी को घरोंमें कैद किया हुआ है... किन्तु यह भी सत्य है कि ऐसी कोई रात नहीं जिसकी सुबह नहो... इसीलिए है विश्वास कि शीघ्र ही सुख का सवेरा होगा और कष्ट की इस बदली कोचीरता सूर्य चारों ओर अपनी मुस्करा



आशा

आशाआशा है कोरोना अलविदा कहहिया न और अब जलायेगा।दर्पण है यह छाई "तमसा" का-साथ अपने लिये जायेगा।।आदि-अंत नहीं हो जिसका-सिसकियाँ भर रह जाती हैं।खौफ़नाक कहानी-अंत हो नींद संगधुल-मिल जाती है।।शुरुआत हुई तो मुक़ाम भी बेशक-साहिल से किश्ती टकरायेगी।राह में काँटें हैं,कारगर मरहम लगा नेह की-नासूर भरके जायेगी।



जन्म दिन मनाना सही नहीं

□■◇◆●○● कविता ●○●◆◇■□☆जन्म दिन मनाना सही नहीं☆फलसफ़ा जन्म दिन मनाने कीआदत है सही नहींरूह की पैदाइश और मौतकभी भी होती हीं नहींमातम मौत का मनाने कीआदत खोटी सही नहींरहमोकरम उनका,सुबहा जब टूटी नींद तो उठ गयासोंचा चलो एक औरजन्म दिन मनाने का है आ गयारोज जश्न मनालें,मुस्कुरा के न जीना बात सही नहींख़्वाब भी



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