ख्याल

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ख्याल तुम्हारा

तुम ख्वाबों से निकलकर ख्यालों में गुजरती हो कहीं!तब रूह को छू जाती हैं बरबस यादें तेरी,जल उठते है माहताब दिल के अंधियारे में कहीं,महक उठती है ख्यालों से सूनी सी ये तन्हाई,मद्धम सुरों में उभरता आलाप एक सुरमई।तुम ख्वाबों से निकलकर ख्यालों में गुजरती हो कहीं!मन पूछने लगता है पता खुद से खुद का ही,भूल सा





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