बसेरा

बसेरातिनतिन बिन, बना बसेरा लेती चिड़ियाँ।सांझ से रह बसेरे मे, रात गुजार लेती चिड़ियाँ।उड़ भोर परे खेतों से, दाना चुँग लेती चिड़ियाँ ।कुछ दबा चोच मे दाना, उड़ आती चिड़ियाँ ।बैठ बुने बसेरे मे, बच्चो को दाना चुनती चिड़ियाँ।कर प्यार पूरा, उड़ेल दाना बच्चे के मुँह मे,दूर गगन मे उड़ जाती चिड़ियाँ।न मांगती भीख किस



कीड़ा जड़ी की खेती की जानकारी

कीडाजडी का परिचयदरअसल ये जो कीड़ा जड़ी है जिसे Yarsagumba के नाम से भी जानते हैं ये एक प्रकार की फंगस होती है जैसे मशरूम भी एक फंगस है। जो औषधीय गुणों से भरपूर होती है । ये पहाड़ी क्षेत्रों में अपने आप से उग आती है । जब बर्फ पिघल जाती है तो वहां के लोग इसे इकठ्ठा कर लेते हैं और इसे सुखाकर बेच देते ह



बाढ ग्रस्त क्षेत्रों के किसान अपनाएं यह तरीका , होगा फायदा

बाढ ग्रस्त क्षेत्रों के किसान अपनाएं यह तरीका , होगा फायदाबाढ ग्रस्त क्षेत्र – जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं और कृषि का हमेशा से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है । कभी तेज आंधी तो कभी तेज बरसात कभी ओलावृष्टि तो कभी सूखा ये तमाम प्राकृतिक आपदाएं फसल को नष्ट कर देती हैं लेकिन बाढ़ एक ऐसी आपदा



Pure Saffron Farming – शुद्ध केसर की खेती के बारे में पुरी जानकारी

शुद्ध केसर दुनिया में पाया जाने वाला सबसे महंगा पौधा है | इतना महंगा होने के कारण इसे लाल सोना भी कहा जाता है | केसर की खेती करना बहुत ही आसान और सरल है | केसर की फसल में ज्यादा मेहनत की आवश्कयकता नहीं होती | और साथ ही इसकी फसल अवधि भी 3 – 4 महीने का होता है | केसर की कीमत भी दिन – बदिन बढ़ते जा रहे



रेपुरा कश्मीर में अंगुर की खेती,विदेशों मे है इसकी मांग

रेपुरा कश्मीर में अंगुर की खेतीरेपुरा नामक गांव के बारे में शायद आजकल के लोग नही जानते होगें। लालचौक कश्मीर से मात्र 25 किलोमीटर दुर बसा है यह खुबसुरत गांव। कभी इस गांव के चर्चे चीन, अफगानीस्तान और ईरान तक थे। इस गांव की मिट्टी में पैदा होने वाले अंगूर की मिठास और आका



Spirulina Farming ! 100 मीटर क्षेत्र से कमाई 35 से ₹40000 प्रति माह

दुनिया भर में एलगी की एक हजार से ज्यादा प्रजातियां हैं। लेकिन उनमें से सिर्फ एक ही प्रजाति ऐसी है जो खाई जाती है और यह पौष्टिक गुणों से भरपूर है इसका नाम है स्पीरूलिना जिसे कुछ लोग ब्लू ग्रीन एलगी के नाम से भी जानते हैं ।प्राचीनकाल से ही लोग इसका औषधि व पूरक आहार के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं।



गोबर के बदले पैसे देगी सरकार , गौधन न्याय योजना शुरू

छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते सोमवार को गोधन योजना नाम से एक योजना लांच की है जिसके तहत पशुपालको से गोबर की खरीद की जाएगी । बताते चलें कि इस गोबर का इस्तेमाल जैविक खाद के उत्पादन के लिए किया जाएगा ।इस योजना के अनुसार, सरकार पंजीकृत पशुपालकों से 2 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गाय का गोबर खरीदेगी और इस



मुंग की खेती से प्रति एकड 25 हजार का शुद्ध घाटा । कौन करेगा इसकी भरपाई ?

एकड़ में मूँग फसल की लागत का पूरा हिसाब किताब -जमीन तैयार करने और बोने में ट्रेक्टर का डीजल 16 लीटर - 1120 रु.बीज का खर्चा (15 से 20 किलोग्राम) - 2000 रु.बीज उपचारित दवाई - 50 रुउर्वरक खाद (DAP)का खर्चा - 600 रु.कीटनाशक दवाई 4 स्प्रे का खर्चा - 3500 से 4000 रु.दवाई छिड़कने, पानी देने की मजदूरी - 15



जाने मौसम का हाल कहां तेज बारिश कहां गर्मी करेगी बेहाल

Kheti kare - आओ मिलकर खेती को लाभदायक बनाएअगले 24 घंटों के दौरान हिमालय की तलहटी के साथ धीरे-धीरे उत्तर की ओर स्थानांतरित होने की संभावना है। इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम की ओर से दक्षिण-पश्चिम की ओर से दक्षिण-पूर्वी ट्रॉपॉस्फेरिक स्तरों पर दक्षिण-पूर्वी हवाओं का अभिसरण उत्



एक था बचपन भाग 1(संस्मरण)

मेरी कार भुसावल शहर से सुनसगांव के रास्ते पे तेजी से दौड़ रही थी,और मेरे दृष्टिपटल पर अतीत के सारे दृश्य एक एक कर फिल्म की भांति लगातार अंकित होते जा रहे थे।आसपास के चलते मकानों और पेड़ों को देख पुरानी या



एक था बचपन (संस्मरण)भाग 1

मेरी कार भुसावल शहर से सुनसगांव के रास्ते पे तेजी से दौड़ रही थी,और मेरे दृष



असम की आग से किसानों और प्राक्रतिक जनजीवन पर क्या असर डाला

असम में इस आग से 1.5 किलोमीटर क्षेत्र को राख बना दिया है ।यह आग अब बुझने का नाम नही ले रही है ।इस आग की वजह से 7000 लोग बेघर हो चुके है । 35 घर पुरी तरह राख हो चुके हैं।असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को गुवाहाटी से करीब 550 किलोमीटर पूर्व तिनसुकिया जिले में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) क



पौधों में मिट्टी चढ़ाना

पौधों के विकास की अवस्था में मिट्टी चढ़ाना काफी मायने रखता है। आज के लेख में जानें पौधों में मिट्टी चढ़ाने से क्या फायदा होता हैऔर इसे किस तरह से करते हैं। किसान भाइयों, पौधों को मिट्टीचढ़ाने से उनको हवा,



"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसान बरगद पीपल खलिहानों में, गाते साँझ बिहान......लहराती फसलें .....

आधार छंद - सरसी (अर्द्ध सम मात्रिक) शिल्प विधान सरसी छंद- चौपाई + दोहे का सम चरण मिलकर बनता है। मात्रिक भार- 16, 11 = 27 चौपाई के आरम्भ में द्विकल+त्रिकल +त्रिकल वर्जित है। अंत में गुरु /वाचिक अनिवार्य। दोहे के सम चरणान्त में 21 अनिवार्य है"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसानबरगद पीपल खलिहा



"कुंडलिया" खेती हरियाली भली, भली सुसज्जित नार।

"कुंडलिया"खेती हरियाली भली, भली सुसज्जित नार।दोनों से जीवन हरा, भरा सकल संसार।।भरा सकल संसार, वक्त की है बलिहारी।गुण कारी विज्ञान, नारि है सबपर भारी।।कह गौतम कविराय, जगत को वारिस देती।चुल्हा चौकी जाँत, आज ट्रैक्टर की खेती।।-1होकर के स्वछंद उड़े, विहग खुले आकाश।एक साथ का है सफर, सुंदर पथिक प्रकाश।।सुं



चिंता-तेज़ी से घट रहा है मध्यप्रदेश में जमीन का पानी, बारिश के पानी को तिजोरी में सहेजने की कोशिश

मालवा के गाँवों से लौटकर मनीष वैद्यइंदौर, आपने शायद ही कभी सुना होगा कि बारिश के पानी को तिजोरी में रखा जाता हो, लेकिन मालवा के किसान अपने खेतों पर अब इसे चरितार्थ कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए बकायदा जमीन पर लाखों की पोलीथिन बिछाकर बार



गाय को सम्मान देकर यहाँ हर आदमी अमीर है, क्या भारत इस देश से सीख सकता है कुछ !

उरुग्वे एक दक्षिण अमरीकी देश है जो ब्राज़ील के पास है, सबसे पहले हम आपको इस देश का झंडा और इसका राष्ट्रीय चिन्ह दिखाना चाहते है, ये देखिये इसका झंडा झंडे पर सूर्य बना हुआ है, अब देखिये इसका राष्ट्रीय चिंन्ह (जैसे भारत में अशोक स्तंभ है) देखिये राष्ट्रीय चिंन्ह पर घोड़ा



देखिए टेक्नोलोजी के नाम पर विदेशी से क्या आ रहा है और उसके क्या परिणाम सामने आ रहे है

कोई विदेशी कंपनी हमको टेक्नोलॉजी देने नहीं आ रही है और वह कभी आएंगे भी नहीं क्योंकि जो उनके पास लेटेस्ट टेक्नो



कान्हा पशु आश्रय स्थल

आवारा जानवरों के उत्पातों से गाँव के किसानों के अलावा शहर की आबादी भी पीड़ित है।शहर की सड़को पर शाम को इनके झुन्ड जाम की स्थिति उत्पन्न कर देते हैं।भीड़भाड़ वाले स्थानों पर तो दुर्घटना का भय बना रहता है।ऐसे में इनके पुनर्वास के लिए सुझाई गई कान्हा पशु आश्रय स्थल योजना अमल



कूड़ा प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता

गाँव में सफाई व्यवस्था हेतु सफाई कर्मचारी की नियुक्ति कई वर्ष पहले हुई परन्तु ठोस कूड़ाकरकट के सही निस्तारण की कोई योजना धरातल पर नहीं उत्तर पाईं।आज भी सफाई कर्मचारी नाली साफ़ करने के बाद निकले कूड़े को पास के तालाब या गाँव के बाहर सड़क किनारे फेकने का काम कर रहा है।वहाँ से



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