खोखला

जनता बनी छनौटा

जनता बनी छनौटा कम आमदानी मे जीने वाला आज भी, उन्ही जंग लगी पटरियों मे दौड़ रहा हैं।पहले के नेता कमआमदनी के सागर वाली उफ़ान हुआ करते थे।आज के आईएस सरकार की गुलामी से जनता की गुलामी करना ज्यादा पसंद करते हैं।महफिल मे जमा इंसानों का मनोरंजन करने वाले अभिनेता अपने पहले दो अक्षर खा कर,नेता बन रहे हैं।देश



“न्यायपालिका में भ्रष्टाचार या अवहेलना न्यायालय की”? - उत्कर्ष श्रीवास्तव

न्याय का अर्थ है नीति-संगत बात अर्थात उचित अनुचित का विवेक | वात्स्यायन ने न्याय सूत्र में लिखा है- “प्रमाणैर्थपरीक्षणं न्यायः“ अर्थात प्रमाणों द्वारा अर्थ का परिक्षण ही न्याय है | भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान किय





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