खुशी

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सबसे बड़ी खुशी

कुछ पाने के लिए कुछ खोना जरूरी है,खुश होने के लिए कुछ त्यागना भी जरूरी है;अपने त्याग से गर किसी को खुशी मिले, तो वह अपने लिए सबसे बड़ी खुशी है।



क्या जीना

दिल क्या चाहें, कोई समझे ना.. खुद खुशी करने से अच्छा है कि किसी की खुशियों को सजाया जाएं, खुद को मारने से बेहतर है कि किसी के साथ जी लिया जाए,, बेमायने ही सही.... खुद पर यूं एक एहसान कर लिया जाए, शायद वक्त परेशानियों का कुछ कट जाए। भटके मन को राह दिखाना आसान कहां है? पर हर हाल में चलना ही बेहतरीन है



हुआ वही।

हुआ वही।बड़े होने से पहले जो ख्वाब देखा आज भी वही है।माँ की ममता पापा के पैसे ने बचपन से बड़ा किया।गुरु की मेहनत स्कूल कालेज की जगह ने ज्ञान दिया।समाज की ठोकरों परस्थितियों से जीने का सहारा मिला।दो वक्त की रोटी के लिए ज्ञान परदेशी का हुनर बना।हुनर से कमाए चंद सिक्के, खुद की परवरिश के लिए।आँचल तले स्तन



मुसकुराहट भाग -५

अगले दिन कल्पना धीर से मिली। वह अपनी खुशी से लाए हुए सामान को देना चाहती थी फिर यह सोच कर रूक गई कि धीर अभी तो यही है। दो दिन बाद दे दुंगी लेकिन मन में सपना की शंका और धीर के सवाल के डर से वह उसे बता ही नहीं पाई। हालांकि वह खुश थी। कल्पना का मन होता कि वह उसे बनवाने के लिए दें दे कि आ



तब मै बहुत खुश था

हां मै बहुत खुश था ,जब मै छोटा था । पापा लाए थे हार डाल कर नयी सायकिल, सारे दोस्तो को इकट्ठा कर ,मै बहुत खुश था,सभी को एक एक राउंड का वादा कर ,मैंने नहीं छोड़ी सायकिल दिन भर।हां मैं बहुत खुश था,जब घर पर टी वी आया,वो भी ब्लैक & व्हाइट ,रोब



[Photos] इस प्यार को क्या नाम दूं के अर्णव और खुशी: टीवी की एक सबसे बेहतरीन जोड़ी | आई डब्लयू एम बज

इस प्यार को क्या नाम दूं के खुशी और अर्णव एक आदर्श कपल है। जोड़ी एक आदर्श ऑन-स्क्रीन कपल का प्रतीक है और सिल्वर स्क्रीन पर भी दोनों ने कुछ समय से काफी अच्छी केमिस्ट्री शेयर की है। खुशी अर अर्णव की जोड़ी से लोग उनकी क्यूट, मनमोहक और रोमांटिक



खुदकुशी के लिए बच्ची को लेकर पटरी पर लेटी महिला, 100 की स्पीड में ऊपर से निकली ट्रेन, हुआ ये चमत्कार

भोपाल: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में हैरतअंगेज मामला सामने आया है. एक महिला अपनी डेढ़ महीने की नवजात को सीने से लगाकर रेलवे ट्रैक पर लेट गई. आशंका थी कि महिला और बच्ची के शरीर के परखच्चे उड़ गए होंगे, लेकिन लोग यह देख हक्के बक्के रह गए कि 100 की स्पीड से ऊपर से ट्रेन नि



खुदखुशी के मोड़ पर

जिंदगी बिछड़ी हो तुम तन्हा मुझको छोड़ कर आज मैं बेबस खड़ा हूँ, खुदखुशी के मोड़ पर || जुगनुओं तुम चले आओ, चाहें जहाँ कही भी हो शायद कोई रास्ता



ई -रिक्शा चालकों के लिए खुशखबरी

आज इलेक्ट्रॉनिक दुनिया है ,सब कुछ ''ई '' होता जा रहा है ,मतलब ई -गवर्नेंस ,ई -कार्ट ,ई -रिक्शा इत्यादि ,ऐसे ही आज आपको जहाँ भी जाना हो अपने स्कूटी ,स्कूटर ,मोटर साइकिल आदि की कोई आवश्यकता नहीं , हर जगह ई -रिक्शा उपलब्ध है और अच्छी बात यह है कि इसे खींचने का काम आदमी



“मुक्तक” रहती है खुशी किस गली में

मापनी- २२२१ २२१२ २..... “मुक्तक” रहती है खुशी किस गली मेंखिलते हैं पुष्प भी कली मेंकोई तो बताए वो खिली क्याचहकी क्या हँसके भल भली में॥-१ कहते हैं अभी वो नदां हैफूलों में दिखी जो जुदा हैआमोदी लगी सुख भरी सी जिन मन में दया वो खुदा हैं॥-२ महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी



क्या वास्तव में पैसे से सुख खरीद सकते है ? क्या अमीर होने से आप खुश हो जाएंगे ?

जब हम सुख (happiness) की बात करते है तो उसकी परिभाषा हर इंसान के लिए अलग अलग है। सुखी होना मतलब खुश (happy) होना। अब किसी के लिए उसके अच्छे सपनो का सच हो जाना सुख का अनुभव है, किसी भूखे को अच्छा खाना मिल जाने से खुशी मिलती है उसको सुख का अनुभव होता है, छोटा बच्चा अपनी माँ को देखकर सुख का अनुभव कर





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