खुशियां

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खुशियां

खुशियां खरीदना चाहता है पैसों से ,लेकिन जानता नहीं किखुशियां टिकती नहीं,जो खरीदी जाए पैसों से।खुशियां वफ़ा नहीं होती है,पैसों की ।वह तो मुराद होती है,प्रेम की।गर खुशियों की दुकान जो होती,तो शायद खुशियां उधार न मिलती।फिर खुशियां हर किसी



साफ्ट कॉर्नर

लघुकथासाफ्ट कॉरनर " मैं जानती हूँ कि आपके दिल में मेरे लिये एक खास किस्म का साफ्ट कॉरनर है परन्तु मेरे लिये आप एक अच्छे और शायद सच्चे दोस्त हैं ,इसके अलावा कुछ नहीं । इसे ही मान लिजिये प्लीज क्योंकि उसी नाते मैं आपको ,अपनी कोई भी बात बड़ी बेबाकी से कह लेती हूँ । " शिखा ने अपनी चिर परिचित मासूमीयत



त्यौहार है रंगों का

आओ बैर मिटाये ... थोडा गुलाल लगाये ! में रंग दू तुझे लाल तू रंग दे मुझे गुलाल लाल पीला हरा गुलाबी जो चाहो ... बस प्यार से लगाये ! आओ बैर मिटायेअपनो को भिगाये ! नाचे ढोल बजाये बस खुशियां लुटाये ! ! जयति' रंग दो गुलाल गले मिलो लाओ बहार !!! त्यौहार है रंगों का द





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