1


लहर

हौसला होता नहीं, जुटाना पड़ता है। पैर उठता नहीं, उठाना पड़ता है। दुनियां जरूरत की है, बिन जरूरत के बोल मिलता नहीं, मिलाना पड़ता है। काम, नाम होता नहीं, मेहनत से बनाया जाता है। हमेशा अच्छा मिलता नहीं, समझौता करना पड़ता है। मुश्किल वक्त जब भी आता है। चहेतों के सच्चे चेहरे लेकर आता है। आशियाना बनता नही



संतुलन

संतुलनहर तरफ़ अफ़रा -तफ़री का माहौल था ,अचानक उठे तूफ़ान की थपेड़ों में जहाज़ हिचकोले खा रहा था । पूरा वातावरण बेचैनी और खौफ़ में सिमट गया था । तभी जहाज़ के कप्तान ने आकर कहा – यह बहुत मुश्किल का समय है , मगर धैर्य से स्थिति को नियंत्रण में किया जा सकता है । आप सब घबराएँ नहीं ,मैं जहाज़ को किनारे तक ले जाने



“गज़ल” नदी का किनारा टपकता रहा है॥

“गज़ल”कभी आदमी पल निरखता रहा हैकिराए के घर पर मचलता रहा हैउठा के रखा लाद जिसको नगर में तराजू झुका घट पकड़ता रहा है।।नई है नजाकत निहारे नजर को सजाकर खिलौना सिहरता रहा है।।मदारी चितेरा बनाया वखत को तमाशे दिखाकर सुलगता रहा है।।नचाता बंदरिया जमूरा बनाकर नए छोर नखरा उठाता रहा है





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x