मान लो सरकार

मान लो सरकारदुनियाँ का हर दर्द भुलाया बिसराया जा सकता है।बस अपने दर्द न दे वरना ये दर्द पत्थरों के वार से, ज्यादा घाव देते है, कोमल जिंदगी को नासूर बना देते है।इसमें कोई भी मलहम काम नही करता सिवा आपसी प्यार के। कहने को तो कहते है लोग, जलने से पहले धुँआ उठता जरूर है। लेकिन जब जिंदा लाशें जलती है तो उ



पंजाब के किसानों का आंदोलन

वर्त्तमान में दिल्ली की सीमा पर चल रहे पंजाब के किसान आंदोलन की जो रूप रेखा है वह एक आदर्श हो सकती है। लम्बे संघर्ष की रणनीतिक तैयारी गजब की है। रसद सप्लाई। थोड़े थोड़े दिन बाद लोगों का घर लौटना और नये लोगो का आकर जुड़ना। मौसम के हिसाब से कपड़ों का इंतजाम। मेडिकल सुविधाएँ



माटी

माटी को संवारने वाला अन्न का दाता काली सड़कों पर अपने हक के लिए अड़ा है। खुले रूप से मिले सबको ताजा ताजा, पैकेटों में बंद होकर बिकने वाली चीजें, उनके हक और न्याय के लिए अड़ा है। लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था नारा... "जय जवान जय किसान" आज दोनों को एक दूसरे के सामने खड़ा देखा है। राजनिति ने बेटियां,



सरकार और किसान नेता क्या ‘‘दिशाहीन‘‘ होकर मुद्दे से ‘‘भटक गये‘‘ या ‘‘परस्पर भटका‘‘ रहे है?

किसान आंदोलन के 22 दिन हो गये है। लेकिन अभी तक दोनों पक्षों के अंतिम निष्कर्ष व निर्णय पर पंहुच न सकने के कारण स्थिति रबड़ के समान खिंच कर वापिस न आने के कारण पूर्वतः दो विपरीत छोरों पर (दिल्ली सीमा के दोनों पार) रुकी हुई है। लेकिन इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि इन 21 दिनों में कुछ भी सकारात्मक व नका



किसान हीरा है।

किसान हीरा है।किसान हीरा है नगीना है। कभी किसी को लूट कर खाया नही।जमीन जोतकर गाजर मूली शकरकन्द चुकन्दर बोता है।फिर कही जाकर उन्हें खोद लादकर मंडी सुबह लाता है।वह जमीन के अंदर बाहर की समझ से फसल उगाता है।जो बाहर ऊगे उसको काटे चुने जो अंदर उसे उखाड़ते है।धान गेहूँ जौ बाजरा सरसों। तिल तीली अलसी सूखा कर,



किसान आंदोलन! उत्पन्न ‘‘आशंका के परसेप्शन‘‘ को दूर करने के लिए सरकार को ‘‘कदम उठाने‘‘ ही होंगे।

अभी हाल में ही मैंने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और मध्य प्रदेश के उपचुनावों के संबंध में यह लिखा था कि ‘‘अंकगणित की जीत‘‘ के साथ ही उससे उत्पन्न ‘‘परसेप्शन‘‘ को जीतने पर ही ‘‘जीत पूर्ण‘‘ कहलाती है। किसान आंदोलन को देखते हुए परसेप्शन का उक्त सिद्धांत संसद एवं सरकार द्वारा लागू अधिनियम एवं लि



ग़ज़ल

ग़ज़ल221 1222 221 1222काफ़िया-आररदीफ़- नहीं होगाअपमान किसानों का स्वीकार नही होगा।इक बार किया तुमने हर बार नही होगा।ये बन्द करो नाटक जो खेल रहे हो तुम,गर वार किया तुमने इकरार नहीं होगा।दिन रात परिश्रम कर खाद्यान्न उगाता मैं,इस बार हुआ फिर से बेकार नहीं होगा।धोखे से छला तुमने हर बार किसानों को,इस बार अन्



अन्नदाताओं का मसला है।

अन्नदाताओं का मसला है। कानून घिर गया।ठंड़ीयो से खेलेंगे, दिल्ली बॉर्डर को घेरेंगे।कोरोना को डंडा-लाठियों से किसान पिटेंगे।दिल्ली में घुसने की देरी है, अब किसानों की बारी है।काला कानून वापस लेने की तैयारी है। जय किसान।जिसको आना है बॉर्डर आओ, बुराड़ी को न जाना है।कोरोना मर गया। दिल्ली में फस गया।कोरोना



हम धरती पुत्र है।

हम धरती पुत्र है।सरकार ने मुँह फेर लिया, किसानों ने बॉर्डर पर डेरा डाल लिया।डेरा डाल, किसानों ने ललकारा है। अब धरती पुत्र ने जवानों का कर विरोध, सरकार से कानून वापस लेने का पैगाम भेजा है। मान लो किसानों का कहना मान लो। फसल को बड़ा कर किसान काटना जानता है।ये तो सरकार है, इसको भी जड़ से गाजर मूली की तरह



दिल्ली कूच न करो, दिल्ली के सारे बॉर्डर सील करो।

दिल्ली कूच न करो, दिल्ली के सारे बॉर्डर सील करोजय जवान, जय किसान एक दूसरे के आमने सामने।पहले किसान बाप, बेटा जवान, हक में आमने सामने।बदल गई नज़ीरे, जो कभी मन में उमंग भरती रही।पहले के आंदोलनों से नेता निकले, आज आंदोलन नेता के लिए।देश जहाँ था वही है, और टुकड़ों में बट गया। इंसान की सोच पहले भी ज़हर उगला



दुःखित कृषक है बेचारा

विधा-लावड़ी महंगाई की इस दुनिया में, दुःखित कृषक है बेचाराबदल गयी ये दुनियां देखो, बदला है जीवन सारा उठे अंधेरे प्रात सवेरे डोर हाँथ ले बैलों कीफसल उगाने की चाहत मेंचाल लगा दी खेतों कीन धूप से वो विचलित होतेन छांव की चाहत भरतेकरे परिश्रम कठिन हमेशासदा सभी ऋतुएँ सहतेकठिन परस्थिति में किसान तो, कर लेता



किसान मुद्दा क्या केवल विपक्ष जिम्मेदार है?

किसानमुद्दा क्या केवल विपक्ष जिम्मेदार है?ऐसापहली बार नहीं है कि सरकार द्वारा लाए गए किसी कानून का विरोध कांग्रेस देश कीसड़कों पर कर रही है। विपक्ष का ताजा विरोध वर्तमान सरकार द्वारा किसानों से संबंधित दशकों पुराने कानूनों में संशोधन करके बनाए गए तीन नए कानूनोंको लेकर है। देखाजाए तो ब्रिटिश शासन काल



बाढ ग्रस्त क्षेत्रों के किसान अपनाएं यह तरीका , होगा फायदा

बाढ ग्रस्त क्षेत्रों के किसान अपनाएं यह तरीका , होगा फायदाबाढ ग्रस्त क्षेत्र – जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं और कृषि का हमेशा से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है । कभी तेज आंधी तो कभी तेज बरसात कभी ओलावृष्टि तो कभी सूखा ये तमाम प्राकृतिक आपदाएं फसल को नष्ट कर देती हैं लेकिन बाढ़ एक ऐसी आपदा



Pure Saffron Farming – शुद्ध केसर की खेती के बारे में पुरी जानकारी

शुद्ध केसर दुनिया में पाया जाने वाला सबसे महंगा पौधा है | इतना महंगा होने के कारण इसे लाल सोना भी कहा जाता है | केसर की खेती करना बहुत ही आसान और सरल है | केसर की फसल में ज्यादा मेहनत की आवश्कयकता नहीं होती | और साथ ही इसकी फसल अवधि भी 3 – 4 महीने का होता है | केसर की कीमत भी दिन – बदिन बढ़ते जा रहे



अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!

अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!पहले लोन से परेशान अब कृषक प्रकृति की मार से बेबस हैं.इस बार हमारे लिये अनाज पैदा करने वालों दो तरफा या कहे तितरफा मार पड़ी है. लाकडाउन, टिड्डी दल फिर बाढ़.किसान कुदरत की इस मार को झेल ही रहे हैं कोई ठोस समाधान भी इस बारे में नहीं निकल रहा. आगे चलकर हर आम आदमी को किसानों



गरीब

हालातो ने उसे हर जगह घसीटा हैं | जिंदगी मेे जश्न नही फिर भी वो जीता हैं |हमदर्दी का हाथ मिलाने मे वो अब डरता हैं दुध का जला हैं साहब, छाछ भी फूंक - फुंक कर पीता हैं |



मुंग की खेती से प्रति एकड 25 हजार का शुद्ध घाटा । कौन करेगा इसकी भरपाई ?

एकड़ में मूँग फसल की लागत का पूरा हिसाब किताब -जमीन तैयार करने और बोने में ट्रेक्टर का डीजल 16 लीटर - 1120 रु.बीज का खर्चा (15 से 20 किलोग्राम) - 2000 रु.बीज उपचारित दवाई - 50 रुउर्वरक खाद (DAP)का खर्चा - 600 रु.कीटनाशक दवाई 4 स्प्रे का खर्चा - 3500 से 4000 रु.दवाई छिड़कने, पानी देने की मजदूरी - 15



असम की आग से किसानों और प्राक्रतिक जनजीवन पर क्या असर डाला

असम में इस आग से 1.5 किलोमीटर क्षेत्र को राख बना दिया है ।यह आग अब बुझने का नाम नही ले रही है ।इस आग की वजह से 7000 लोग बेघर हो चुके है । 35 घर पुरी तरह राख हो चुके हैं।असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को गुवाहाटी से करीब 550 किलोमीटर पूर्व तिनसुकिया जिले में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) क



किसानो को परेशान करने आया तिरंगा वायरस, बीज कंपनियों पर वायरस फैलाने का आरोप ,बंद हो सकता है उत्पादन

टमाटर में अब एक नए वायरस ने प्रवेश किया है. इससे टमाटर की खेती में पैदा होने वाले टमाटर के रंग और आकार में अंतर आ रहा है. इसे किसान तिरंगा वायरस कह रहे हैं. इस वायरस की वजह से टमाटर में खड्ढे हो रहे हैं और अंदर से काला होकर सड़ने लगता है. टमाटर पर पीले चिट्टे होने की वजह से अब उसकी खेती पर संकट मंडरा



जय जवान जय किसान

लाल बहादुर शास्त्री, जिनका प्रधानमंत्री काल बहुत कम रहा, पर जनता के दिलो-दिमाग पर बहुत गहरा असर छोड़ गया. कल तक उनके विरोधी भी आज उनकी बात करते है, उनको महान बताते है. उनके दिए नारे " जय जवान, जय किसान " की बात करते है. आज की राजनीति ने उस नारे में से जय किसान निकाल दिया अ



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