19 नवम्बर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस और भारत

19 नवम्बर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस ‘भारत में’ ? डॉ शोभा भारद्वाज 19 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने का चलन 1960 से चल रहा है | पुरूष दिवस की विशेष रूप से शुरुआत त्रिनिदाद एवं टोबागो में की गयी थी अब यह 70 देशों में मनाया जाता है भारत में भी 19 नवम्बर 2007 के दिन सेव इंडियन



‘‘उच्चतम् न्यायालय का ‘‘निर्णय’’ कितना प्रभावी ‘‘कितना औचित्यपूर्ण’’?

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार ‘‘उच्चतम् न्यायालय’’ के समस्त निर्णय न्यायिक और बंधनकारी होते है। लेकिन इसके बावजूद हमेशा ही उच्चतम् न्यायालय के निर्णयांे के औचित्य पर बहस होती रही है और यह स्वस्थ्य व मजबूत लोकतंात्रिक न्याय व्यवस्था का एक श्रेष्ठ उदाहरण है। आरोपित नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से



"गीत" कितना सुंदर मौसम आया

मापनी - 22 22 2222"गीत"कितना सुंदर मौसमआया साथी तेरा साथसुहायापकड़ चली हूँ तेरीबाहेंआँचल मेरा नभलहराया।।रहना हरदम साथ हमारेशीतल है कितनी यहछाया।।नाहक उड़ते विहगअकेलेमैंने भी मन कोसमझाया।।दूर रही अबतक छविमेरीआज उसे फिर वापसपाया।।चँहक रही हूँ खेलरही हूँसाजन तूने मनहरषाया।।गौतम तेरा बाग खिलाहैभौंरा सावन



"गीत"शीतल झरना बहता पानी फूलों सजी बहार सखीकितना दृश्य मनोरम लगता बगिया है गुलजार सखी

"गीत"शीतल झरना बहता पानी फूलों सजी बहार सखीकितना दृश्य मनोरम लगता बगिया है गुलजार सखीमौसम झूम रहा मतवाला मनमयूर नर्तकी बनानीले पीले लाल बसंती प्रिय रंगो का बाग घनानाचे मोर मयूरी देखे लेकर नैनो में प्यार सखीशीतल झरना बहता पानी फूलों सजी बहार सखी।।ओढ़े चूनर गाती कजरी देख



कितना कुछ बदल जाता है, आधी रात को

कितना कुछ बदल जाता है, आधी रात कोकवि: शिवदत्त श्रोत्रियजितना भी कुछ भुलाने कादिन में प्रयास किया जाता हैअनायास ही सब एक-एक करमेरे सम्मुख चला आता हैकितना कुछ बदल जाता है, आधी रात को....असंख्य तारे जब साथ होते हैउस आसमान की छत परमैं खुद को ढूढ़ने लगता हूँ तबकिसी कागज़ के ख़त परधीरे धीरे यादों का एक फिरघे



तुजसे ही इश्क़ करती है - शिखा

Aaj bhi teri ye diwani tujse hi ishq karti hai,Aaj bhi teri ek hansi se hi vo muskurati hai.Teri sirf ek mithi nazar or vo nikhar jaati hai,Pyar se hi tere vo jaise saj jaaya karti hai.Teri sirf ek chhuan or vo tadap jaati hai,Baaho mai simatne ko teri betab ho jaati hai.Teri sirf ek dilkash zappi



मदन मोहन सक्सेना की ग़ज़लें : ग़ज़ल (रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है )

ग़ज़ल (रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है )  मुसीबत यार अच्छी है पता तो यार चलता है कैसे कौन कब कितना,  रंग अपना बदलता है किसकी कुर्बानी को किसने याद रक्खा है दुनियाँ  में जलता तेल और बाती है कहते दीपक जलता है मुहब्बत को बयाँ करना किसके यार बश में है उसकी यादों का दिया





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