कृषि

फसल बीमा बाजार पर सरकार का एमएसपी बढ़ोतरी का असर

बीमा कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक 14 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने के लिए सरकार के कदम प्रधान मंत्री फासल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के साथ-साथ फसल बीमा बाजार पर भी कम प्रभाव डालेगा।'पीएमएफबीवाई के लिए अंडरराइटिंग प्रक्रिया फसल के लिए कीमतों या एमएसपी पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय, हम ए



फसल बीमा बाजार पर सरकार का एमएसपी बढ़ोतरी का असर

बीमा कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक 14 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने के लिए सरकार के कदम प्रधान मंत्री फासल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के साथ-साथ फसल बीमा बाजार पर भी कम प्रभाव डालेगा।'पीएमएफबीवाई के लिए अंडरराइटिंग प्रक्रिया फसल के लिए कीमतों या एमएसपी पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय, हम ए



योगी के राज में लौकी भी सीधी हो गई, गुंडे क्या चीज़ है.....!

हाल ही में इंटनेट पर दो तस्वीर सामने आयी है | जहाँ एक ओर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश हाथों में एक लौकी पकडे हुए है, जिसका आकर थोड़ा टेढ़ा है | वही दूसरी ओर यूपी के मुख्यमंत्री योगी भी एक तस्वीर में लौक



क्या आप जानते हैं ???

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बारिश

बहुतो ने गवयी  अपनी जान कोआपकी राह देखतेआजा अबतो बरसआपके न आने सेधरती ओर जिंदगीबंजर सी हो गई  हैआजा अबतो बरसआपकी  बेरुखी नेकितनो की उल्झन बढाईअपनो से बिछडकेकितनो ने मिटा दिया अपने आपकोआजा अबतो बरस जबतक  देखेंगे नलहरते खेत को धरती परन सुकून मिलेगा उनको जन्नत मे भीआजा अबतो बरसबहुतो का उजडा है चमनअबके



भूखे को भूख , खाए को खाजा ...

भूखों को भूख सहने की आदत धीरे - धीरे *भूखे को भूख, खाए को खाजा...!!भूखे को भूख सहने की आदत धीरे - धीरे पड़ ही जाती है। वहीं पांत में बैठ  जी भर कर जीमने के बाद स्वादिष्ट मिठाइयों का अपना ही मजा है। शायद सरकारें कुछ ऐसा ही सोचती है। इसीलिए तेल वाले सिरों पर और ज्यादा तेल चुपड़ते जाने का सिलसिला लगाता



Audio: PM मोदी किसान को भगवान कहते हैं वहीं देश के अफसर उन्हें गली में घूमने वाला कुत्ता

शिवराज सरकार के पशु चिकिसत्क डा.अजय सचान ने किसानो को कुत्ता कहा , दैनिक जागरण के पत्रकार से बात करते हुए डा. अजय ने कहा की किसान गली-गली घुमते है रमाकांत मिश्राटीकमगढ़ : प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी किसानो को देश का अन्नदाता कहते है और शिवराज सिंह चौहान किसानो के हित में बड़ी बड़ी बाते करते है लेकिन शि



किसान की घड़ी की कहानी

एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसेतो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप सेजुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था.उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे मेंखोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में ….पर तामामकोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने निश्चयकिया



वो अँधेरे से उजाला माँग बैठा, बहुत भूखा था निबाला मांग बैठा|

मेरी याद दिल से भुलाओगे  कैसे,गिराकर नज़र से उठाओगे कैसे|सुलगने ना दो ज़िन्दगी को ज्यादा,चिरागों से घर को बचाओगे  कैसे  



मिलावटी होते इन्सान

मिलावटी खाद्यान्न खाते-खाते इन्सान भी दिन-प्रतिदिन मिलावटी होते जा रहे हैं। यह पढ़-सुनकर तो एकबार हम सबको शाक लगना स्वाभाविक है। यदि इस विषय पर गहराई से मनन किया जाए तो हम हैरान रह जाएँगे कि धरातलीय वास्तविकता यही है। हम मिलावटी हो रहे हैं यह कहने के पीछे तात्पर्य है कि हम सभी मुखौटानुमा जिन



किसान चिंतित है

किसान चिंतित हैसुशील शर्माकिसान चिंतित है फसल की प्यास से ।किसान चिंतित है टूटते दरकते विश्वास से।किसान चिंतित है पसीने से तर बतर शरीरों से।किसान चिंतित है जहर बुझी तकरीरों से।किसान चिंतित है खाट पर कराहती माँ की खांसी से ।किसान चिंतित है पेड़ पर लटकती अपनी फांसी से।किसान चिंतित है मंडी में लूटते लुट



भूखा बचपन

रोटी की सही कीमत जानता है ,भूख से बिलबिलाता बदहाल बेसहारा बच्चा ,ढूंढ रहा है जो होटल के पास पड़ी झूठन में रोटी के चन्द टुकड़े,जिन्हें खाकर बुझा सके वो अपने उदर की आग को ,जिसकी तपन से झुलस रहा है उसका कोमल, कुपोषित ,कमजोर बदन |झपट पड़ा था जो फैंकी गयी झूठन पर उस कुते से प



किसान का दर्द

किसान अपने खेत की तैयारी के बाद बीज के लिए सरकारी बीज गोदाम की ओर दो लाभ प्राप्त करने की उम्मीद से जाता है।एक सरकारी अनुदान और फाउंडेशन सीड में कम बीमारी का दावा।मगर वास्तव में उसे दोनों में छलाबा ही मिलता हैन तो कोई अनुदान की गारंटी है और न ही उच्च गुणवत्ता के बीज की।खरीफ में धान के बीज की पौध डाली



#किसान टीवी



किसान Short Inspirational Hindi Story on Farmers Life

एक गांव में एक किसान अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। किसान गरीब था, नौकरी नहीं थी, कुछ जमीन थी, जिसमें अनाज उगाकर अपना गुजारा करता था। इस बार भी किसान और उसकी पत्नी ने पूरी महेनत और लगन से अपने खेतों में काम किया, और उसमें अनाज उगाया। फसल काफी अच्छी हुई, किसान अपनी फसल को देखकर काफी खुश था,



भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा

भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा,जब से होश संभाला केवल ग़म देखा। नहीं मिला ठहराव भटकते क़दमों को,जिसके भी मन में झाँका बेदम देखा। वादों और विवादों की तक़रीर सुनी,जख्मीं होंठों पर सूखा मरहम देखा। बिना किये बरसात बदरिया चली गई, कई मर्तबा ऐसा भी मौसम देखा। सर पे छप्पर नहीं मह्ज नीला अम्बर था,उन आंखों में स्वा



अच्छा हुआ मैं किसान ना हुआ, सपने सच नही होते...किसान पर कविता - CGNet Swara

CGnet Swara is a platform to discuss issues related to Central Gondwana region in India. To record a message please call on +91 80 500 68000.



बुंदेलखंड में किसानों का मूलमंत्र बना जुगाड़, साइकिल से जोतते हैं खेत

सूखे की मार और खराब आर्थि‍क स्‍थिति ने किसानों को नए-नए जुगाड़ करना सिखादिया है। खेत जुताई के लिए हल नहीं था तो बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा के एक किसानने साइकिल को ही हल बना लिया और जुताई शुरू कर दी। किसान का कहना है कि बिना लागतके यह उसके लिए काफी किफायती साबित हो रहा है। बुंदेलखंड में किसानों की जि



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