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कहानी - कुऍं को बुखार

कहानी- कुंए को बुखार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश ’ अंकल ने नहाने के कपड़े बगल में दबाते हुए कहा, ‘‘ रोहन ! थर्मामीटर रख लेना। आज कुंए का बुखार नापना है ? देखते हैं कुंए को कितना बुखार चढ़ा है ?’’ ‘‘ जी अंकल ! थर्मामीटर रख लिया ,’’ रोहन ने कहा



भारतीय

मिट गयीं वो हस्तियाँ,और उनकी बस्तियाजो मिटाने के लिए, हमे आई हैंथम गयीं वो आँधियाँ,बुझ गयीं वो बातियाजो जलाने के लिए, हमे आई हैंकट गये वो कर,झुक गये वो सरजो झुकने के लिए, हमे आए हैं– कुँवर दीपक रावत



वीर जवान

ऐ वीर जवान तू तो है तूफान तूने चाहा जहाँ पहुँच पाया वहाँ तू चला जहाँ तेरा कारवाँ तूफ़ानो में बढता गया रुका नहीं कभी तू गया जहाँ पहाड़ो पे भी चड़ता गया जब हवा चली ढक गये वो निशान जो बने थे वहाँ मिट गये वो निशान ऐ वीर जवान पैरो के निशान मिलते ही नहीं ढूंडू मैं क





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