लेख, "वृद्धाश्रम की उपयोगिता: क्यों : कारण और निदान"

लेख, "वृद्धाश्रम की उपयोगिता: क्यों : कारण और निदान"भारतीय परिवेश और भारतीयता अपने दायित्व का निर्वहन करना बखूबी जानती है। जहाँ तक आश्रमों की बात है अनेकों आश्रम अपने वजूद पर निहित दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं जिसमेँ गृहस्ताश्रम, पथिकाश्रम, शिक्षाश्रम, बाल आश्रम, विधवा आश्रम, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्र



अपनी दिशा से भटक रहा युवा

आज भारत देश में करोड़ो की सख्यां में युवा बेरोजगार है और दिशा विहीन हो कर भटक रहा है 1 इसके पीछे मै कई कारन मन रहा हूँ 1 अगर में उत्तर भारत की बात करूं जहां से मैं सम्बन्ध रखता हु तो मुझे ये ज्ञात होता है की दो और तीन कारन ही मुख्यत:



हमें लेखक क्यों बनना चाहिए? एक लेखक का भविष्य क्या होना चाहिए?

दोस्तों आज हर व्यक्ति पढ़-लिख कर नौकरी के क्षे़त्र में एकऊंचा औदा पाना चाहता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई पुलिस, कोई वकील तो कोई इंजीनियर। लेकिनएक लेखक के पहलू पर बहुत कम लोग ही ध्यान देते हैं। लेखक बनना एक गर्व की बात है। क्योंकि यह भी एक प्रकार की कला है जो हर क



कलश स्थापना मुहूर्त १०अक्टूबर

http://ptvktiwari.blogspot.com/2018/10/blog-post.html?m=1http://ptvktiwari.blogspot.com/2018/10/blog-post.html?m=1 जानिए : नवदुर्गा में कलश/ धट स्थापना सही समय पर क्यों जरूरी है।



“गज़ल”क्या बताऊँ क्यों नहीं सुनता हूँ मैं

क़ाफ़िया ज़िंदा आ स्वर रदीफ़ हूँ मैं वज़्न -२१२२ २१२२ २१२अरकान-फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन“गज़ल”क्या बताऊँ क्यों नहीं सुनता हूँ मैंहर घड़ी हैवान से लड़ता हूँ मैंदेख वह ले जा रहा है आदमीदौड़ कर रोको उसे कहता हूँ मैं।।फूलकर कुप्पा हुआ सहकार पाकब उठेंगे हाथ बस तकता हूँ मैं।।राम आए थे ब



गूँजी सी है साडी फ़िज़ा - क्यों हो गया न

क्युन हो गया से गोयनजी सी साई फिजा गीत के गीत संगीतकार शंकर एहसान लॉय की एक अद्भुत रचना है। गोवेजी सी है साड़ी फिजा गीत पढ़ें जो जावेद अख्तर द्वारा अच्छी तरह से लिखे गए हैंक्यों हो गया न (Kyun Ho Gaya Na )गूँजी सी है साडी फ़िज़ा की लिरिक्स (Lyrics Of Goonji Si Hai Sari Fiza )गूँजी सी है साडी फ़िज़ाजै



क्यों हो गया न (Kyun Ho Gaya Na )

"Kyun Ho Gaya Na" is a 2004 hindi film which has Amitabh Bachchan, Vivek Oberoi, Aishwarya Rai, Rati Agnihotri, Om Puri, Tinu Anand, Suniel Shetty, Dia Mirza, Gaurav Gera, Ajit Ahuja, Rahul Singh and Kajal Aggarwal in lead roles. We have and one song lyrics of Kyun Ho Gaya Na. Shankar Ehsaan Loy h



ओड़िशा में सड़क हादसे में चार की मौत

19:19 HRS IST क्योंझर, 31 जुलाई (भाषा) ओड़िशा के क्योंझर जिले में आज तड़के सड़क किनारे लगे पेड़ से कार के टकराने से उसमें सवार चार लोगों की मौत हो गयी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। क्योंझर सदर पुलिस थाने के प्रभारी स्मृति रेखा प्रधान ने बताया कि सभी लोग एक कार्यक्रम में भाग लेक



“गज़ल”क्या लिखा क्योंकर लिखा क्या भर दिया मैंने

बह्र- २१२२ २१२२ २१२२ २ काफ़िया- अर रदीफ़- दिया मैंने“गज़ल”क्या लिखा क्योंकर लिखा क्या भर दिया मैंनेकुछ समझ आया नहीं क्या डर दिया मैंनेआज भी लेकर कलम कुछ सोचता हूँ मैंवो खड़ी जिस द्वार पर क्या घर दिया मैंने।।हो सके तो माफ़ करना इन गुनाहों कोजब हवा में तीर थी क्यों शर दिया मैंन



क्यों नहीं मिलता पूजा पाठ का फल ?

धर्म गुरु श्री राज कृष्ण शर्मा जी +91 9216111690 गुरु जी प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे You Tube Channel, INC MEDIA ASSOCIATES ( https://www.youtube.com/channel/UCyAq... ) पर लाइव रहेंगे नमस्कार दर्शकों, आज के इस वीडियो में बताय



"गीतिका" पर्दे में जा छुपे क्यों सुन चाँद कल थी पूनम।

"गीतिका" पर्दे में जा छुपे क्यों सुन चाँद कल थी पूनम।कैसे तुझे निकालूँ चिलमन उठाओ पूनम। इक बार तो दरश दो मिरे दूइज की चंदा-जुल्फें हटाओ कर से फिर खिलाओ पूनम।।हर रोज बढ़ते घटते फितरत तुम्हारी कैसीजुगनू चमक रहें हैं बदरी हटाओ पूनम।।फिर घिर घटा न आए निष्तेज हुआ सूरजअब तो गगन



आरएसएस के आमंत्रण की ‘‘प्रणब दा’’ द्वारा स्वीकारिता पर इतना हंगामा क्यों?

‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’’ मुख्यालय नागपुर में प्रत्येक वर्ष संघ तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग के समापन (दीक्षांत समारोह) का आयोजन करता है। इसके अतिरिक्त संघ प्रत्येक वर्ष विजया-दशमी (दशहरा) के शुभ अवसर पर मुख्यालय नागपुर में ही वार्षिकोत्सव का आयोजन भी करता है। इन अवसरो पर संघ देश की विभिन्न प्रमुख हस्ति



कविता

जिंदगी का कर सुक्रिया, मानव का जन्म लिया .जिंदगी मिली बड़े भाग्य से, इसको ना काट दुर्भाग्य से .करना है तो कर समाज सेवा, तभी तुझे मिलेगा मेवा,डर तू ऊपर वाले से , जिंदगी देने वाले से .जिंदगी का कर सुक्रिया, मानव का जन्म लिया.......लोगो से प्यार कर , जिंदगी सवार कर



‘कन्याभ्रूण’ आखिर ये हत्याएँ क्यों?

बेटा वंश की बेल को आगे बढ़ाएगा,मेरा अंतिम संस्कार कर बुढ़ापे में मेरी सेवा करेगा| यहाँ तक की मृत्यु उपरान्त मेरा श्राद्ध करेगा जिससे मुझे शांति और मोक्ष की प्राप्ति होगी और बेटी, बेटी तो क्या है पराया कूड़ा है जिसे पालते पोसते रहो उसके दहेज की व्यवस्था के लिए अपने को खपाते रहो और अंत में मिलता क्या है



गजल, बे-वजह की यह जलन तपते तपाते क्यों

बह्र - २१२२ २१२२ २१२२ २,कफिया- आते, रदीफ-क्यों...."गजल"चाह गर मन की न होती तो बताते क्योंआह गर निकली न होती तो सुनाते क्योंआप भी तकने लगे अनजान बीमारीबे-वजह की यह जलन तपते तपाते क्यों।।खुद अभी हम तक न पाए भाप का उठनाकब जला देगी हवा किससे छुपाते क्यों।।शोर इतना तेज था विधन



आँसुओं के भी दाम

आँसुओं के भी दामलब्ज़ खुद ही बयान होते हैं,आँसुओं के भी दाम होते हैंIपंछी, रोको तो दौड़ते बादलों को, व्योम में कहाँ विराम होते हैं I चाँद तारों की दोस्ती रात भर, जुगनुओं के तो नाम होते है Iदुपहरी धूप, जिश्म की जलन, जैसे वर्षों की थकान होते हैं Iअर्श पर चाँदनी,त्रण पर म



दशहरा क्यों मनाया जाता है !

दशहरा पूरे भारतवर्ष में मनाया जाने वाला एक महत्‍वपूर्ण धार्मिक त्‍योहार है, जिसे हिन्‍दु धर्म के अनुसार माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम से जोडकर देखा जाता है। इस त्‍यौहार को मानने के संदर्भ में अास्‍था ये है कि माँ दुर्गा ने महिषासूर से लगातार नौ दिनो तक युद्ध करके दशहरे के



मैं सौ साल तक कैसे जिऊँ?

मैं सौ साल तक कैसे जिऊँ? नीलम भागी मुझे आजकल एक ही चिंता हर समय सताती है, वो ये है कि मैं ऐसा क्या करुँ कि मेरी उम्र सौ साल हो। इसलिए आयु बढ़ाने के जितने भी नुस्ख़े, मुझे जहाँ से भी मिलते हैं, मैं उन्हे ले ले



ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

Hindi Sahitya | Hindi Poems | Hindi Kavitaकल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान हैबीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सकेजिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अनजान हैगर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाहअब आज के इस दौर में दीखते कहा



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)प्रस्तुत ब्लॉग में मैनें उन ग़ज़लों और रचनाओं को एक जगह संकलित करने का प्रयास किया है , जिन्हें किसी पत्रिका ,मैग्जीन ,अखबार,संस्करण या किसी वेव साइट में शामिल किया गया है। आशा ही नहीं बल्कि पूरा बिश्वास



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