लघु

मृत्युदंड

वह एक निर्मम हत्या करने का दोषी था. पुलिस ने उसकेविरुद्ध पक्के सबूत भी इकट्ठे कर लिए थे. पहले दिन ही जज साहब को इस बात का आभास हो गया था किअपराधी को मृत्यदंड देने के अतिरिक्त उनके पास कोई दूसरा विकल्प न होगा. लेकिन जिसदिन उन्हें दंड की घोषणा करनी थी वह थोड़ा विचलित हो गये थे. उन्होंने आज तक किसीअपराध



लघुकथा-सात

1 जनवरी 20..आतंकवादियों ने सेना की एक बस पर अचानक हमला कर दिया. बसमें एक भी सैनिक नहीं था. बस में स्कूल के कुछ बच्चे पिकनिक से लौट रहे थे. एकबच्चा मारा गया, पाँच घायल हुए.सारा नगर आक्रोश और उत्तेजना से उबल पड़ा. लोग सड़कों परउतर आये; पहले एक नगर में, फिर कई नगरों में. हर कोई सरकार को कोस रहा था. हरसमा



लघुकथा-छह

‘बच्चे, उस बाड़ से दूर रहना, उसे छूना नहीं. उसमें बिजलीचल रही है.’‘लेकिन यह बाड़ यहाँ क्यों है? इसमें बिजली क्यों चल रहीहै.’‘यह सब हमारी सुरक्षा के लिये है.’‘हमारी सुरक्षा? किस से?’वृद्ध एकदम कोई उत्तर ने दे पाए. कुछ सोच कर बोले,‘बच्चे, यह बात तो मैं भी समझ नहीं पाया.’‘वह हमें मूर्ख बना रहे हैं.’‘शायद



लघुकथा- पाँच

लघुकथा- चारनेताजी अपने चिर-परिचित गंभीर शैली में लोगों को संबोधितकर रहे थे, ‘सरकार ने जो यहाँ बाँध बनाने का निर्णय लिया है वह यहाँ के किसानों केविरुद्ध के साजिश है. बाँध बना कर नदी का पानी ऊपर रोक लिया जायेगा. फिर उस पानीसे बिजली बनाई जायेगी और बिजली बनाने के बाद वह प



लघुकथा-चार

लड़की ने कई बार माँ से दबी आवाज़ में उस लड़के की शिकायतकी थी पर माँ ने लड़की की बात की ओर ध्यान ही न दिया था. देती भी क्यों? जिस लड़केकी वह शिकायत कर रही थी वह उसके अपने बड़े भाई का सुपुत्र थे, चार बहनों का इकलौता लाड़लाभाई. पर लड़की के लिए स्थिति असहनीय हो रही थी. उसकी अंतरात्माविद्रोह कर रही थी. अंततः उस



लघुकथा-तीन

‘बेटा, थोड़ा तेज़ चला. आगे क्रासिंग पर बत्ती अभी हरी है,रैड हो गयी तो दो-तीन मिनट यहीं लगजायेंगे.’‘मम्मी, मेरे पास लाइसेंस भी नहीं है. कुछ गड़बड़ हो गयी.....’‘अरे तुम समझते नहीं हो, हमारी किट्टी में रूल है की जोभी पाँच मिनट लेट होगा उसे गिफ्ट नहीं मिलेगा.’ ‘तो पहले निकलना था न, सजने-सवरने में तो.....



लघुकथा-दो

उस युवक का इतना ही दोष था कि उसने उन दो बदमाशों को एकमहिला के साथ छेड़छाड़ करने से रोका था. वह उस महिला को जानता तक नहीं था, बस यूँही,किसी उत्तेजनावश, वह बदमाशों से उलझ पड़ा था.भरे बाज़ार में उन बदमाशों ने उस युवक पर हमला कर दियाथा. एक बदमाश के हाथ में बड़ा सा चाक़ू था, दूसरे के हाथ में लोहे की छड़.युवक ने



लघुकथा-एक

तीव्र गति से चलती स्कूल-वैन चौराहे पर पहुंची. बत्तीलाल थी. वैन को रुक जाना चाहिये था. परन्तु सदा की भांति चालक ने लाल बत्ती कीअवहेलना की और उसी रफ्तार से वैन चलाता रहा.दूसरी ओर से सही दिशा में चलता एक दुपहिया वाहन बीच मेंआ गया. वैन उससे टकरा कर आगे ट्राफिक सिग्नल से जा टकराई और पलट गई.देखते-देखते कई



"लघुकथा, अब कितनी बार बाँटोगे"

लघुकथा "अब कितनी बार बाँटोगे"अब कितनी बार बाँटोगे यही कहकर सुनयना ने सदा के लिए अपनी बोझिल आँख को बंद कर लिया। आपसी झगड़े फसाद जो बंटवारे को लेकर हल्ला कर रहे थे कुछ दिनों के लिए ही सही रुक गए। सुनयना के जीवन का यह चौथा बंटवारा था जिसको वह किसी भी कीमत पर देखना नहीं चाहती थी। सबने एक सुर से यही कहा



सादत हसन मंटो की 9 प्रसिद्ध लघु कथाएं - #9 Best Stories of “Manto” in Hindi

सादत हसन मंटो एक महान लेखक, लेखक और भारत-पाकिस्तानी मूल के नाटककार थे। वह दक्षिण-एशियाई इतिहास में लघु कथाओं के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक हैं। मंटो की छोटी कहानियों को साहित्य में सुनहरे काम के रूप में गिना जाता है, जब भी कोई उर्दू में छोटी कहानियों के बारे में स



"वेटिंग रूम, लघुकथा"

वेटिंग रूम, लघुकथागर्मी का तपता हुआ महीना और कॉलेज के ग्रीष्मावकाश पर घर जाने की खुशी में रजिया और नीलू अपने बैग को पीठ पर लटकाए हुए स्टेशन की ओर कदम बढ़ाए जा रही थी। ट्रेन अपने समय पर थी और दोनों दिल्ली पहुँच गई। दूसरी ट्रेन आने में अभी पाँच घंटे इंतजार करना था अतः वेटिंग रूम का शरण लेना उचित लगा। थ



सही तो है - एक लघुकथा

आज रिंकू को आने दो आते ही कहती हूं बेटा जल्दी ही मेरा चश्मा बदलबा दो अब आँखों से साफ नही दिखता।लो आ भी गया रिंकू आतुर होकर मैन की बात कह डाली। " अरे माँ दो मिनट चैन से बैठने भी नही देती कौन सी तुम्हे इस उम्र में कढाई सिलाई करनी है? और फ



एक अरसे बाद - एक लघु कथा

एक अरसे बाद आज मायके जाने का मौका मिला है मौसी की बेटी की शादी जो है । बस स्टैंड पर उतरी तो लगा जैसे अपना शहर आ गया ।कितने भी साल हो जाये बचपन का शहर हमेशा दिल के करीब रहता है। एक लड़के को खड़ा देखा तो पूछा " बेटा यहाँ मंगल चाचा की मिठाई की दुकान हुआ करती थी अब नही दिख रही?"उसने जबाब दिया "ऑन्टीवो



उलझन -- लघु कविता

इक मधुर एहसास है तुम संग - ये अल्हड लडकपन जीना , कभी सुलझाना ना चाहूं - वो मासूम सी उलझन जीना ! बीत ना मन का मौसम जाए - चाहूं समय यहीं थम जाए ; हों अटल ये पल -प्रणय के साथी - भय है, टूट ना ये भ्रम जाए संबल बन गया जीवन का - तुम संग ये नाता पावन जीना ! बांधूं अमर प्रीत- बंध मन के तुम सं



“कजरी का धीरज” (लघुकथा)

लीलाधारी प्रभुकृष्ण जन्माष्टमी के परम पावन पुनीत अवसर पर आप सभी महानुभावों को हार्दिक बधाई!“कजरी का धीरज” (लघुकथा)कजरी की शादी बड़ीधूम-धाम से हुई पर कुछ आपसी अनिच्छ्नीय विवादों में रिश्तों का तनाव इतना बढ़ा किउसके ससुराल वालों ने आवागमन के सारे संबंध ही तोड़ लिए और कजरी अपनी ससुराल कीचाहरदीवारों में सि



राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस

भारत में उत्पादोंके सकल उत्पादनका 40 प्रतिशत लघुउद्योगों द्वारा आपूर्ति कीजाती है| यह भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाताहै। 30 अगस्त 2000 को भारतीय सरकार ने छोटे पैमाने पर उद्योग का समर्थन करनेकी नीति की घोषणा की थी | लघु उद्योग दिवस हर साल 30 अगस्त को मना



पटरी पर

लापरवाही केके के चेहरे से और हाव भाव से झलकती रहती थी. बाल अगर पंखे की हवा में तितर बितर हो गए तो हो गए केके ने कंघी नहीं करनी है. अगर किसी दिन एक जूते की लेस खुली रह गई तो रह गई कसनी नहीं है. कई बार बैंक में काम करते करते केके जूते उतार देता और फाइल लेकर हॉल के दूसरे कोन



माँ कहाँ गई

माँ कहाँ गई आज माँ को गुज़रे हुए साल होने को आया। धीरे-धीरे सबनॉर्मल होने लगा था।सब काम धंधे पहले की ही तरह चलने लगे थे। एक दिन गीता (मेरी पत्नी) सफाई करते समय माँ की अलमारीको भी जो अस्त व्यस्त पड़ी थी, ठीक करने लगी जिसमे माँके पुराने कपड़े रखे थे।मैं उस समय वहीं खड़ा था। गीता मां का वह पीला सूट तहाने ल



नालायक

शादी करके, घर में कलह करके, अलग होकर, मुझे रुलाकर आज चार साल बादघर से अलग होने के बाद बड़े बेटे का फ़ोन आया वह कुछ कहना ही चाहता था कि मैं आदतनशुरू हो गया, नालायक तेरी हिम्मत कैसेहुई, फ़ोन करने की तू तो उसी दिनही मर गया था हमारे लिए, जिस दिन ये घर छोड़ कर गयाथा, वो कुछ कहना ही चाहता था किमैंने फ़ोन पटक द



दिल का टुकड़ा

नाम : आलोक फोगाट जन्म स्थान : मेहरौली (दिल्ली)फ़ोन : 9953986953, 9958003160 दिल का टुकड़ा आज शादी को 23सालहो गए। याद आता है---शादी में पहली बार जब उससे परिचय हुआ ससुर जी ने बताया येमेरे भाई, जो गांव में रहते हैं, उनका बेटा राहुल, हमा



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