लघु



नालायक़ बेटा

रामानंद बाबू को अस्पताल में भर्ती हुए आज दो महीने हो गये। वे कर्क रोग से ग्रसित हैं। उनकी सेवा-सुश्रुषा करने के लिए उनका सबसे छोटा बेटा बंसी भी उनके साथ अस्पताल में ही रहता है। बंसी की मां को गुजरे हुए क़रीब पांच वर्ष हो चुके हैं। अपनी मां के देहावसान के समय बंसी तक़रीबन बीस वर्ष का था। सुबह के आठ बज



डॉग लवर

ओमप्रकाश भारतीय उर्फ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी थे। पलटू जी ने लगभग सभी नस्ल के कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें कुत्तों से इतना प्रेम था कि कुत्तों के मल-मूत्र भी वे स्वयं साफ किया करते थे। उनके श्वान प्रेम पर अखबार एवं पत्रिकाओं में सै



नीचे का खुदा

3- नीचे का खुदादोनों सिपाहियों की ड्यूटी थी ,वो दोनों स्नाइपर थे और वो दोनों दुश्मनों के निशाने पर भी थे ।आबिद और इकबाल।वैसे इकबाल हिन्दू था और नाम था इकबाल सिंह ,जबकि आबिद का नाम आबिद पटेल था ।इकबाल को सब इकबाल कहकर ही बुलाते थे ताकि लोगों को लगे के वो मुसलमान है क्योंकि वो शक्ल सूरत और रव



कर्फ्यू

कर्फ्यू,(लघुकथा)शहर में कर्फ्यू लगा था।मिसेज शुक्ला काफी परेशान थीं ।बच्ची का ऑपरेशन हुआ था ओठों का।वो कुछ भी खा-पी नहीं पा रही थी ।सिर्फ चिम्मच या स्ट्रॉ से कुछ पी पाती थी खाने का तो कुछ सवाल ही नहीं पैदा होता था।सुबह



मनोरंजन ( लघुकथा )

लघुकथा मनोरंजन " कुछ भी हो भाई नाटक दमदार है . एक - एक किरदार को बड़ी मेहनत से गढ़ा गया है और हर कलाकार ने पूरे मन से काम किया है ." " ठीक कहा भाई ! हीरोइन भले ही नई है पर एक्टिंग ऐसी की है कि जैसे उसका जन्म इसी किरदार के लिए हुआ हो . कहीं से लगता ही नहीं है कि ये वो जुम्मन - बी नहीं है जो दो



चकाचौंध

“चकाचौंध” पत्रिका अपने प्रकाशन के चार साल पूरेकर चुकी थी, किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इस पत्रिका की बिक्री इतनी बढ़ जाएगी,अब ऐसे में सभी सदस्यों को मीटिंग में बुलाया गया और उनके योगदान के लिए बधाई दीगई। तभी मीटिंग में एक व्यक्ति ने पत्रिका



और उसने रिश्वत नहीं दी ….......

मंटूबड़ा खुश था । प्राइमरी में टीचर लगे उसेअभी साल भर भी नहीं हुआ था कि सरकार द्वारा प्रायोजित डी-एड पाठ्यक्रम के लिए उसकानामांकन हो गया । प्राइमरी स्तर के बालकों कोपढ़ाने के लिए डी-एडकी पढाई काफी महत्वपूर्ण है । समय परसमस्त शिक्षक सेंटर पहुँच गए । पाठ्यक्रमप



लघुकथा ............वीरानगी

लघुकथावीरानगी " तो फिर तूने उनका पीछा किया ! "" हां किया , मेरे पास और कोई चारा नहीं है ।"" कितनी दूर तक गयी ? "" जब तक कि वे मुझसे औझल नहीं हो गये ।"" अगर उन्हें पता लग गया तो ?"" तो क्या ? मैं उन्हें एसा सबक सिखाऊँगी कि सारी ऊमर याद रखेंगें " वो बहुत आवेश में थी । " तुझे पूरा यकीन है कि वे किसी अ



शब्दबाण

शब्दबाण********************************* उसके वह कठोर शब्द - " कौन हूँ मैं ..प्रेमिका समझ रखा है.. ? व्हाट्सअप ब्लॉक कर दिया गया है..फिर कभी मैसेज या फोन नहीं करना.. शांति भंग कर रख दिया है ।" यह सुनकर स्तब्ध रह गया था मयंक.. ********************************** अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर



मीठी शरारत

मेरी नयी लघुकथामीठी शरारतबात उन दिनो की है जब मैं हाईस्कूल का विद्यार्थी था। प्राइमरी स्कूल से आये एक साल हुआ होगा। अभी भी अनजानापन, झिझक, भय पूरी तरह गये नहीं थे। मित्र भी नहीं बन पाये थे। स्कूल आना, क्लास करना और छुट्टी होते ही वापस हो जाना। सारे काम खामोशी में ही होते थे।स्थितियाँ ऐसी ही थीं कि



टेंशन

लघुकथा ..................टेंशन अवकाशप्राप्ति बड़ी इज्जत से हुई . सभी ने उनके पूरे कार्यकाल की बड़ी तारीफ़ की . उनकी ईमानदारी और कर्मठता को हरेक ने सराहा . उपहारों का सिलसिला तो अगले दिन तक भी चलता रहा . कुछ ने कहा , " ऐसे समर्पित अधिकारी बहुत कम होते हैं और यदि आपके अनुभव का लाभ , विभ



कसक

लघुकथा कसकदिन ढले काफी देर हो चुकी थी ।शाम, रात की बाहों में सिमटने को मजबूर थी । वो कमरे में अकेला था । सोफे का इस्तमाल बैड की तरह कर लिया था उसने । आदतन अपने मोबाईल पर पुरानी फिल्मों के गाने सुनकर रात के बिखरे अन्धेरे में उसे मासूमियत पसरी सी लगी । वो उन गानों के सुरीलेपन के बीच अपने तल्ख हुए सु



मयंक का हठयोग

मयंक का हठयोग ( लघु कथा ) ********* अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सुबह का



लघुकथा -बदलती निगाहें

कहानी-बदलती निगाहेंवक्त के साथ लोग भी बदल जाते है,लेकिन स्मिता से मुझें ऐसी उम्मीद नहीं थी. मुझे यकीन ही नहीं हो



लघुकथा- अल्पायु

अपने स्कूल के आम के पेड़ के नजदीक खड़ा थी तन्वी, ये वही पेड़ था जिस पर वो आम तोड़ने जा चढ़ी थी। नन्ही तन्वी जो बमुश्किल १० साल की थी.जैसे तैसे चढ़ तो गई लेकिन उतरना जैसे टेढ़ी



रामनाम सत्य..!

रामनाम सत्य ..!!!***************( लघु कथा )रामनाम सत्य .. रामनाम सत्य.. क्या कोई शवयात्रा है ? सड़क पर तो ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा था.. फिर क्यों भरी दुपहरी में यह व्यक्ति ऐसे बुदबुदा रहा था .! क्या यह उसका अंतर्नाद है अथवा विरक्त मन की आवाज ..ठीक से समझ नहीं



#सपनों_का_गुल्लक

नानी के यहाँ से जब लौटा था तो नाना जी ने 50/-नानी जी ने 50/-मामा जी और मासी ने 100/- -100/- रुपये दिए थे स्कूल की छुट्टी लगे हुए भी लग भग २० दिन से अधिक हो रहे है वो पैसे भी गुल्लक में रोज़ डालता हूँ और आज पापा ने 50/- रुपये और दे दिए राजू गुल्लक में पैसे डालते हुए अपने गुल्लक से बत्या रहा था। अब इन



लड़की

वह ठसाठस भरी बस में तिल-तिल बढ़ता हुआ आखिर उस सीट तक पहुँच ही गया जिसके किनारे की साइड में एक पन्द्रह वर्षीय खूबसूरत लड़की बैठी थी। चंद पल वह स्थिर खड़ा रहा फिर आहिस्ता से अपना दाहिना हाथ सीट की पुश्त पर रख कर लड़की के बाएं कंधे को उंगलियों से स्पर्श किया। लड़की



यातना गृह

यातना गृह..!*********** मीरजापुर के एक रईस व्यक्ति के " करनी के फल " पर लिखा संस्मरण***************************** यह पुरानी हवेली उसके लिये यातना गृह से कम नहीं है..मानों किसी बड़े गुनाह के लिये आजीवन कारावास की कठोर सजा मिली हो .. ऐसा दंड कि ताउम्र इस बदरंग हवेली के चहारदीवारी के पीछे उस वृ



#भगवान_की_लाठी

मोहन के घर से हर शाम उसकी बीवी की बहुत ज़ोर ज़ोर रोने बिलखने की आवाज़ आया करती थी । मोहन रोज़ शराब पि कर आता और घर में ख़ूब तमाशा करता। उसे बस बहाना चाहिए अपनी बीवी पर हाथ उठाने का,आज भी वो नशे में धुत घर में दाखिल होते ही अपनी बीवी पर बरस पड़ा " उमा , उमा कहा हो ज़रा मेरे लिए पानी ले आना, और लड़खड़ाते हुए ह



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